पूर्व सांसद की लगायी जायेगी प्रतिमा

Updated at : 26 Mar 2017 12:06 AM (IST)
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पूर्व सांसद की लगायी जायेगी प्रतिमा

पुण्यतिथि. राम बहादुर राय ने कहा, लालमुनि चौबे नहीं होते, तो बीएचयू से समाप्त हो जाता हिंदू शब्द लालमुनि चौबे की प्रथम पुण्यतिथि पर जुटे कई दिग्गज नेता बक्सर : जिला मुख्यालय स्थित नगर भवन में भाजपा के दिवंगत नेता व फकीर के रूप में ख्यातिप्राप्त पूर्व सांसद लालमुनि चौबे की प्रथम पुण्यतिथि समारोह पूर्वक […]

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पुण्यतिथि. राम बहादुर राय ने कहा, लालमुनि चौबे नहीं होते, तो बीएचयू से समाप्त हो जाता हिंदू शब्द

लालमुनि चौबे की प्रथम पुण्यतिथि पर जुटे कई दिग्गज नेता
बक्सर : जिला मुख्यालय स्थित नगर भवन में भाजपा के दिवंगत नेता व फकीर के रूप में ख्यातिप्राप्त पूर्व सांसद लालमुनि चौबे की प्रथम पुण्यतिथि समारोह पूर्वक मनायी गयी. कार्यक्रम में भारत सरकार के केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिंहा, सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री गिरीराज सिंह, वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय, बक्सर सांसद अश्विनी चौबे, आरा सांसद आरके सिंह, राज्यसभा सांसद आरके सिंहा, बेतिया विधायक संजय अग्रवाल, पूर्व विधायक संजय सिंह टाइगर, सदर विधायक संजय तिवारी शामिल हुए. कार्यक्रम की शुरुआत लालमुनि चौबे के तैलचित्र पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कर किया गया. इसके बाद चौबे के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया गया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय एवं संचालन भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष राजवंश सिंह ने किया. अपने अध्यक्षीय भाषण में रामबहादुर राय ने 2009 के लोकसभा चुनाव परिणाम पर आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय जान बूझ कर चौबे को हराया गया था. उन्हें मामूली वोटों से हराया गया था. यदि दुबारा गिनती होती तो चौबे जी जीत जाते, पर ऐसा नहीं हुआ. 2009 के चुनाव में सारा बिहार के भाजपा नेतृत्व विरोध में था, तो यशवंत सिंह ने चौबे जी के टिकट की पहल की. टिकट मिला भी पर सुशील मोदी एवं नीतीश ने मिल कर चौबे जी को जिलाधिकारी के माध्यम से हरवाया. उन्हें लगभग 23 सौ वोटों से हरवाया गया. लालमुनि चौबे नहीं होते, तो बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदू शब्द समाप्त हो जाता. 1965 में संसद में एक अध्यादेश पारित किया गया, जिसमें बनारस हिंदू विश्व विद्यालय से हिंदू शब्द हटाने को लेकर चौबे ने जोरदार आंदोलन खड़ा किया, जिसका सपोर्ट मार्क्सवादी व अन्य विचारधारावाले लोगों को भी करना पड़ा. ऐसा व्यक्तित्व था लालमुनि चौबे का. मैं मानता हूं कि उन्होंने पोथी नहीं पढ़ी, डिग्री नहीं हासिल की. उन्होंने अपने जीवनी से ऐसी पोथी बनायी जो यह श्रद्धांजलि है. यह चौबे जी का परिवार है, जिसमें उनको नहीं जाननेवाले, पहचाननेवाले और न माननेवाले सभी शामिल हैं.
रेलवे की जमीन पर लगेगी लालमुनि चौबे की प्रतिमा : कार्यक्रम में रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने उनके सादगी से भरे व्यक्तित्व की चर्चा के साथ ही राज्यसभा सांसद आरके सिंहा ने नगर में प्रतिमा लगाने की मांग पर रेलवे की खाली जगह पर पार्क व मूर्ति के लिए जमीन देने की बात स्वीकार की. इसके लिए बक्सर सांसद को सहयोगी बनाते हुए विभाग को इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण करने को कहा. रेल राज्य मंत्री ने इसके लिए अपने लिए गौरव की बात कहते हुए कहा कि ऐसे काम में उनकी सहभागिता भी होगी. मंत्री ने कहा कि चौबे जी की दो स्लोगन काफी चर्चित था, जिसमें एक था कि अंगरेजी में काम न होगा, फिर से देश गुलाम न होगा.
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