गोकुल जलाशय में हो रही ओलिंपिक की तैयारी

Updated at : 06 Mar 2017 5:14 AM (IST)
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गोकुल जलाशय में हो रही ओलिंपिक की तैयारी

सेवानिवृत्त अंतरराष्ट्रीय तैराक व गोल्ड विजेता विजेंद्र दे रहे प्रशिक्षण बक्सर : ब्रह्मपुर प्रखंड के दियारा इलाके के गांव भले मूलभूत सुविधाओं का अभाव झेल रहे हैं. हर वर्ष आनेवाले बाढ़ के कारण किसानों की फसलें बरबाद हो जाती हैं. दियरांचल का यह इलाका सूखा की मार भी झेलता है, लेकिन इन प्राकृतिक आपदाओं के […]

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सेवानिवृत्त अंतरराष्ट्रीय तैराक व गोल्ड विजेता विजेंद्र दे रहे प्रशिक्षण

बक्सर : ब्रह्मपुर प्रखंड के दियारा इलाके के गांव भले मूलभूत सुविधाओं का अभाव झेल रहे हैं. हर वर्ष आनेवाले बाढ़ के कारण किसानों की फसलें बरबाद हो जाती हैं. दियरांचल का यह इलाका सूखा की मार भी झेलता है, लेकिन इन प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद यहां की जमीन पर तैराकी की नयी फसल तैयार हो रही है. नैनीजोर, सपही, निमेज व अन्य गांवों के युवक तैराकी को अपना कैरियर बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. इलाके के गोकुल जलाशय में तमाम अभावों के बावजूद नवयुवक तैराकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं. इन युवकों में शायद ही किसी ने स्विमिंग पुल देखी हो,

लेकिन इनके अंदर ओलिंपिक जैसे गेम में जाने की तैयारी चल रही है़ इनके कोच विजेंद्र राय ने बताया कि प्रोफेशनल तैराक स्विमिंग पूल में तैरते हैं. इसलिए अब ये स्विमिंग पूल में तैरना चाहते हैं. इन युवकों की प्रतिभा निखारने के लिए गांव के ही अंतरराष्ट्रीय तैराक विजेंद्र ने कदम उठाया है. सेना के रिटायर्ड कैप्टेन विजेंद्र वाटर पोलो एवं तैराकी में पूरे देश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं. अपने कैरियर में 110 गोल्ड, 145 सिल्वर एवं 70 कांस्य मेडल हासिल किये हैं.
जज्बे के दम पर जीत का ख्वाब
ब्रह्मपुर प्रखंड के सपही गांव के पास स्थित गोकुल जलाशय में तैराकी के लिए व्यवस्था नहीं है. ग्रामीण जलाशय के आसपास मल-मूत्र त्याग करते हैं. पशुओं को धोने की यही एक जगह है. इससे जलाशय में गंदगी का अंबार लगा रहता है. प्रशिक्षक विजेंद्र राय ने बताया कि इन बच्चों में जज्बा है. जिसके दम पर ये किसी भी प्रतियोगिता में जीत का ख्वाब देखते हैं. इन्हें तैराकी का ‘व्याकरण’ भले ही नहीं पता है, लेकिन इनकी तैराकी का स्टैंडर्ड काफी ऊंचा है. फिलहाल करीब दर्जन भर नवयुवक तैराकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं. इनमें पंकज, नीतीश पांडेय, विशाल तिवारी, दिनेश साहनी, पवन तिवारी व अन्य राज्यस्तरीय प्रतिभागी रह चुके हैं. आगामी 28 जून से पुणे में होने वाले सब जूनियर व जूनियर चैंपियनशिप के लिए प्रशिक्षण दे रहे हैं.
क्या हैं गोकुल जलाशय : गंगा से कटकर करीब 25 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला एक खूबसूरत जलाशय है. इस जलाशय में पानी की उपलब्धता और लंबाई-चौड़ाई को देखते हुए पानी से जुड़े खेलों का विकास हो सकता है, अगर सरकार इस जलाशय पर ध्यान दे तो यहां नौकायान और तैराकी का प्रशिक्षण और स्पर्धा दोनों इस जलाशय में संभव है. कुछ सालों से इस जलाशय में पूर्व कैप्टन विजेंद्र राय यहां तैराकी का प्रतियोगिता करा रहे हैं.
गोकुल जलाशय का मिला फायदा
गोकुल जलाशय के करीब होने का फायदा मिला कि बचपन से ही तैराकी करने का शौक सेना में जाकर कैरियर का रूप ले लिया. नौकरी में रहते 110 गोल्ड, 145 सिल्वर एवं 70 कॉस्य मेडल हासिल किये. 2010 में कॉमनवेल्थ गेम में ऑब्जर्वर नियुक्त हुए. वर्तमान में झारखंड सरकार के चीफ कोच के रूप में कार्यरत हैं. गांव के गोकुल जलाशय में प्रतिवर्ष तैराकी प्रतियोगिता का आयोजन करवाते हैं. ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभा संपन्न लड़कों को तैराकी का प्रशिक्षण देते हैं.
कैप्टन विजेंद्र

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