26 वर्षों से चल रहा 115 रुपये पॉकेटमारी का केस

Updated at : 11 Feb 2017 8:44 AM (IST)
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26 वर्षों से चल रहा 115 रुपये पॉकेटमारी का केस

जमानत रद्द होने से अब तक कई बार जेल जा चुका है आरोपित बक्सर : तारीख पर तारीख और सिर्फ तारीख मिलती जा रही, मगर इंसाफ नहीं मिला. ‘दामिनी’ फिल्म के इस चर्चित डायलॉग की पटकथा फिल्मी थी, लेकिन हम जिस व्यथा की बात कर रहे हैं वह हकीकत है. 10 वर्ष की उम्र में […]

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जमानत रद्द होने से अब तक कई बार जेल जा चुका है आरोपित
बक्सर : तारीख पर तारीख और सिर्फ तारीख मिलती जा रही, मगर इंसाफ नहीं मिला. ‘दामिनी’ फिल्म के इस चर्चित डायलॉग की पटकथा फिल्मी थी, लेकिन हम जिस व्यथा की बात कर रहे हैं वह हकीकत है.
10 वर्ष की उम्र में पॉकेटमारी के आरोप में गिरफ्तार एक बदनसीब को 26 वर्षों से न्याय की उम्मीद है. इस उम्मीद में वह जेल भी जा चुका है. उस बदनसीब का नाम शेरा है. उसके मुकदमे के कई मूल कागजात नहीं मिल रहे, जिसके कारण यह स्पष्ट नहीं है कि अब तक उसने कितने दिन जेल में बिताये हैं. मामला दिसंबर 1990 का है. शेरा के अधिवक्ता के अनुसार कोर्ट द्वारा मार्च 1991 में संज्ञान लिया गया. इस बीच शेरा जमानत पर बाहर रहा. 21 अगस्त 2011 को जमानत रद्द हो जाने पर उसे जेल जाना पड़ा. फिर वह 17 सितंबर 2011 को जमानत पर छूटा, तब से वह बाहर है.
महज 115 रुपये की पॉकेटमारी का आरोप : शेरा को जेल में इसलिए रहना पड़ा. क्योंकि उस पर पॉकेटमारी का इल्जाम है. पॉकेटमारी हुई थी 26 बरस पहले. यानी दिसंबर 1990 में. नगर थाना बक्सर के बस स्टैंड में. बस इसी घटना के बाद शेरा की बदनसीबी का दौर शुरू हो गया.
शुरुआती शक के आधार पर पुलिस ने शेरा को दो अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. केस के दो अन्य आरोपित बरी हो चुके हैं.
नहीं मिल रहे मुकदमे से जुड़े कागजात : सिविल कोर्ट बक्सर में शेरा के अधिवक्ता अरविंद पांडेय के मुताबिक मुकदमे का मूल रेकॉर्ड अभिलेख पर नहीं रहने के कारण मुवक्किल को परेशानी हो रही है. कोर्ट द्वारा वर्ष 2011 से मूल अभिलेख की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक मूल रेकॉर्ड नहीं मिले हैं. यहीं कारण है कि उसे केस में देरी से तारीखें मिलती रहीं. माननीय न्यायालय पर उन्हें भरोसा है कि उनके मुवक्किल को न्याय मिलेगा.
इंसाफ की उम्मीद आंखों में आंसू
26 सालों से शेरा बचपन की गलती का खामियाजा भुगत रहा है, लेकिन उसने इंसाफ की उम्मीद नहीं छोड़ी है. वह कहता है मुझे याद तो नहीं कि मैंने पॉकेटमारी की थी, लेकिन कानून पर भरोसा है. फिलवक्त शेरा आरा में कबाड़ी का सामान खरीदकर और ठेला खींचकर जीवन-यापन कर रहा है.
अब तक आरोप साबित नहीं
पुलिस फाइलों में दर्ज आरोप के मुताबिक शेरा के विरुद्ध पॉकेटमारी करते रंगेहाथ पकड़े जाने की शिकायत थी, लेकिन शेरा के पास से चोरी के रुपये बरामद नहीं हुए थे. देश का कानून साफ कहता है कि हर मुजरिम को उसके जुर्म के लिए तय सजा ही मिलनी चाहिए. उससे कम या ज्यादा नहीं. शेरा 26 वर्षों से न्याय की आस में जिंदगी जी रहा है.
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