हैदराबाद की नेहा को बक्सर की डॉ निष्ठा ने लिया शिक्षा के लिए गोद
Updated at : 24 Jan 2017 6:16 AM (IST)
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सगाई के अवसर पर लिया गया गोद बक्सर : चलो एहसास का रिश्ता बना दें. सभी बच्चों को उनकी मां दिला दें. किसी शायर के इस शेर को बक्सर की रहनेवाली डॉ निष्ठा चरितार्थ कर रही हैं. डॉ हिंगमणि और बक्सर कोर्ट के लोक अभियोजक नंद गोपाल प्रसाद की बेटी डॉ निष्ठा ने हैदराबाद की […]
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सगाई के अवसर पर लिया गया गोद
बक्सर : चलो एहसास का रिश्ता बना दें. सभी बच्चों को उनकी मां दिला दें. किसी शायर के इस शेर को बक्सर की रहनेवाली डॉ निष्ठा चरितार्थ कर रही हैं. डॉ हिंगमणि और बक्सर कोर्ट के लोक अभियोजक नंद गोपाल प्रसाद की बेटी डॉ निष्ठा ने हैदराबाद की एक संस्थान वर्ल्ड विजन से एक दस वर्षीया अनाथ बच्ची को शिक्षा प्रदान करने के लिए गोद लिया है. यह उनके अकेले का प्रयास नहीं है, बल्कि इनके मंगेतर राजीव शेखर का भी योगदान है. दरअसल, डॉ निष्ठा की सगाई 25 दिसंबर, 2016 को बक्सर शहर के ही रालोसपा नेत्री लता श्रीवास्तव और ललन प्रसाद लाल के पुत्र राजीव शेखर के साथ हुई है.
राजीव नार्वे की राजधानी ओस्ले में केप जर्मनी कंपनी में इंजीनियर हैं. इस सगाई को यादगार बनाने के लिए किसी दूसरे की मदद करने की इन दोनों ने सोचा. ऐसे में किसी अनाथ बच्ची को शिक्षा प्रदान करने से बड़ा काम क्या हो सकता था. तब अंतरजातीय विवाह करनेवाले इस जोड़े ने इंटरनेट से हैदराबाद की इस संस्थान की खोज की और इस संस्थान की अनाथ दस वर्षीया बच्ची नेहा वालपु को शिक्षा प्रदान के लिए गोद ले लिया. डॉ निष्ठा का उपनाम नेहा है ऐसे में नेहा नाम से ही संस्थान में बच्ची को खोजा गया और नेहा वालपु के लिए नेहा नाम लक्की साबित हुआ.
संस्थान के साथ कागजी प्रक्रिया भी अब पूरी हो चुकी है. फिलहाल, नेहा वालपु संस्थान में ही रहकर पढ़ाई करेगी. इसके लिए डॉ निष्ठा के एकाउंट से संस्थान को प्रत्येक माह आठ सौ रुपये डिपोजिट होंगे. जैसे-जैसे नेहा वालपु बड़ी होगी. शिक्षा का खर्च भी बढ़ता जायेगा.
डॉ निष्ठा और राजीव कहते हैं कि शिक्षा के लिए बच्ची को गोद लेकर काफी संतुष्टि हो रही है. हर किसी सक्षम व्यक्ति को दूसरे की भलाई के लिए आगे आना चाहिए. डॉ निष्ठा कहती हैं कि बच्ची से समय-समय पर मिला भी जायेगा और उसकी शिक्षा की रिपोर्ट भी ली जायेगी. लोहियावादी परिवार में पली-बढ़ी डॉ निष्ठा बचपन से ही दूसरों की मदद करती रही हैं. इनकी छोटी बहन हर्षा वकालत की पढ़ाई के दौरान लखनऊ में चार साल तक मदरसा में नि:शुल्क बच्चों को तालीम देती थीं. दिल्ली हाइकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हर्षा और बीबीए कर रहे राजशेखर ने डॉ निष्ठा एवं राजीव के इस पहल के लिए सराहा और धन्यवाद दिया. अन्य सुननेवाले बुद्धिजीवियों ने अप्रैल माह में परिणय सूत्र में बंध जानेवाले इस जोड़े को शुभकामना दे रहें हैं.
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