स्वच्छता की अलख जगा रहे दुर्गमांगे
Updated at : 14 Jan 2017 8:38 AM (IST)
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बक्सर : यदि मन में समाज के लिए कुछ करने का जज्बा हो, तो उसे किसी भी परिस्थिति और किसी भी पद पर रह कर किया जा सकता है. इसका एक बेहतर उदाहरण शिक्षक दुर्गमांगे ने पेश किया है. शिक्षक दुर्गमांगे जिले में शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता के लिए भी दृढ़ संकल्पित हैं. दुर्गमांगे बक्सर […]
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बक्सर : यदि मन में समाज के लिए कुछ करने का जज्बा हो, तो उसे किसी भी परिस्थिति और किसी भी पद पर रह कर किया जा सकता है. इसका एक बेहतर उदाहरण शिक्षक दुर्गमांगे ने पेश किया है. शिक्षक दुर्गमांगे जिले में शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता के लिए भी दृढ़ संकल्पित हैं. दुर्गमांगे बक्सर सदर प्रखंड की बरुणा पंचायत के बिठ्ठलपुर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं. डुमरांव के नंदन गांव के रहनेवाले कौशल किशोर के पुत्र दुर्गमांगे बक्सर नगर के चीनी मिल में रहते हैं. दुर्गमांगे हर दिन सुबह पांच बजे घर छोड़ देते हैं और बिठ्ठलपुर गांव निकल जाते हैं.
गांव में लोगों से मिल कर स्वच्छता के महत्व को बताते हैं. सरकार की योजना हर घर शौचालय के लिए वे लोगों को प्रेरित करते हैं. मुख्यमंत्री के संदेश को लोगों तक पहुंचाते हैं. इस योजना से जमीनी स्तर पर जुड़ते हुए लोगों को प्रेरित करने के दौरान जब यह पता चला कि कई गरीब परिवारों को शौचालय बनाने में पैसे की कमी आ रही है, तो वे स्वयं अपने स्तर से 20 परिवारों को शौचालय बनाने में आर्थिक मदद किये, ताकि पैसे के अभाव में कहीं भी परेशानी न हो. मजदूरी करनेवाले रामभजन, जवाहर यादव, महंगू एवं संतोष कुमार समेत 20 लोगों ने बताया कि शौचालय बनाने का काम पहले होता है, फिर सरकार राशि देती है. इसके अतिरिक्त भी पैसे खर्च हो जाते हैं. ऐसे में शिक्षक दुर्गमांगे ने हमारी आर्थिक मदद कर इस योजना को सफल बनाये हैं.
डीएम रमण कुमार इस कार्य के लिए स्वच्छता संग्राम सेनानी में शामिल दुर्गमांगे को पुरस्कृत किया है. वहीं, सदर प्रखंड के बीडीओ मनोज कुमार सिन्हा भी उन्हें खूब सराहा है. दुर्गमांगे का केवल यहीं एक सामाजिक पक्ष नहीं है. बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी कई सहयोगात्मक कार्य करते हैं. भूगोल से एमए बीएड करने के बाद दुर्गमांगें ने शिक्षक की नौकरी को ही चुना. वर्ष 2014 में शिक्षक बने दुर्गमांगे कहते हैं कि बच्चे ही देश के भविष्य हैं, यदि इनका भविष्य नहीं सुधारा जायेगा, तो देश का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा. विवेकानंद और भगत सिंह के विचारों को माननेवाले दुर्गमांगे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पहचान कर पढ़ने के लिए अपने खर्च से उन्हें कॉपी, पेंसिल और किताब देते रहते हैं, ताकि बच्चों को पढ़ने में कोई परेशानी न हो.
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