डबल एस की प्लानिंग और फरार हो गये पांच कैदी
Updated at : 05 Jan 2017 6:55 AM (IST)
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लापरवाही . देवधारी के खुलासे ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की खोली पोल भागने के बाद पैदल पहुंचे नदी के रास्ते यूपी के बारा कला हाल्ट बक्सर : एस स्कवायर की प्लानिंग इतनी जोरदार थी कि जेल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी. गिरफ्तार देवधारी ने जो पुलिस के सामने खुलासे किये इससे […]
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लापरवाही . देवधारी के खुलासे ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की खोली पोल
भागने के बाद पैदल पहुंचे नदी के रास्ते यूपी के बारा कला हाल्ट
बक्सर : एस स्कवायर की प्लानिंग इतनी जोरदार थी कि जेल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी. गिरफ्तार देवधारी ने जो पुलिस के सामने खुलासे किये इससे सुरक्षा की दृष्टि से काफी संवेदनशील कहे जानेवाले बक्सर सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल कर सामने आ गयी. देवधारी ने पुलिस अधीक्षक उपेंद्र शर्मा को बताया कि भागने की प्लानिंग पांच दिन पहले की गयी थी. हालांकि इसको लेकर एक माह पहले से ही इसकी तैयारी की जा रही थी. इसमें सोनू सिंह और सोनू पांडेय ने अहम भूमिका निभायी. एस स्कवायर की जोड़ी ने ऐसा गुल खिलाया कि कारा प्रशासन की काफी किरकिरी हुई. इसको लेकर पुलिस अधीक्षक उपेंद्र शर्मा ने नगर थाने में प्रेसवार्ता की.
प्रेसवार्ता के दौरान एसपी ने बताया कि जेल से भागने का प्लानिंग का मास्टर माइंड भोजपुर के धनगाई के सोनू पांडेय और बक्सर ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र का कांट गांव निवासी सोनू सिंह है. सबसे पहले सोनू सिंह ने म्यूजिक रूम से पंखे का रॉड निकाला और उसे मोड़ कर हुक के आकार का बना लिया. घटना के दिन पांचों एक जगह पर सोये हुए थे. इसके साथ ही कई और बंदी भी थे. लेकिन इन बंदियों को इनके मंसूबों पर थोड़ा- सा भी संदेह नहीं हुआ. रात्रि के जब 12 बजे तब पांचों बंदी अपने मिशन को अंजाम देने में जुट गये. डेढ़ बजे के आसपास खिड़की तोड़ कर कैंपस पर निकले और हुक को धोती और चादर से बांध कर रस्सी के जैसा बना कर दीवार फांद कर फरार हो गये.
भागनेवाले कैदियों की संख्या थी छह : 31 दिसंबर की रात्रि बक्सर सेंट्रल जेल से पांच कैदी नहीं बल्कि छह कैदी फरार होनेवाले थे. इसमें से फरार हुए कुख्यात सोनू पांडेय का भाई सुनील पांडेय भी था. लेकिन जिस हिसाब से खिड़की काटी गयी थी उसके आकार में सुनील नहीं आ सका. इस कारण वह फरार होने से वंचित रह गया. देवधारी ने बताया कि सुनील मोटा होने के चलते वह नहीं फरार हो सका. उसने अपने सभी साथियों को कहा कि आपलोग भाग जाओ. मैं नहीं आ पाऊंगा.
बक्सर टू यूपी इसके बाद हाजीपुर, मुजफ्फरपुर और पहुंच गया मोतिहारी : बक्सर सेंट्रल जेल से फरार होने के बाद सभी बंदी एक साथ यूपी के बारा कला हाल्ट पहुंचे. जहां से ट्रेन पकड़ कर प्रांजीत सिंह और देवधारी पटना पहुंचे. जबकि अन्य कैदी अलग-अलग रास्तों पर निकल पड़े. पटना पहुंचने के बाद प्रांजीत और देवधारी बस से हाजीपुर पहुंचे. हाजीपुर जाने के बाद हाजीपुर से फिर बस पकड़ कर दोनों मुजफ्फरपुर तथा मोतिहारी पहुंचे. मोतिहारी पहुंचने के बाद एक मंदिर में जाकर दोनों ने अपनी रात गुजारी. इस दौरान किसी बात को लेकर मारपीट भी हुई. जिसके बाद पुलिस दोनों को वहां से खदेड़ी तो दोनों फरार हो गये. देवधारी छपरा पहुंचा और प्रांजीत का अब भी कोई पता नहीं है.
एक साल ही बची थी देवधारी की सजा :देवधारी की सजा महज एक साल ही बची थी. ऐसे में फरार होने के बाद उस पर एक और मामला दर्ज हो गया. इसके साथ ही इस मामले में भी सुनवाई के बाद सजा हो सकती है.
जेल प्रशासन से यहां हुई चूक
बंदियों को कहीं भी आने जाने की पूरी आजादी थी.
आधे घंटे तक खिड़की तोड़ते रहे और प्रशासन ने खोजबीन तक नहीं की.
इन बंदियों के सामानों की भी नियमित रूप से नहीं होती थी जांच.
म्युजिक रूम से पंखा का रड निकालने के बाद भी खोजबीन नहीं हुई.
छापेमारी की भनक बंदियों को पहले ही लग जाती है.
मोबाइल पर बंदी परिजनों से करते हैं बातचीत.
पंखे का रॉड निकाल कर तोड़ी दीवार, आधे घंटे में ही पूरा खेल तमाम
फरार कैदियों के लिए छापेमारी जारी, होंगे सलाखों के अंदर : एसपी
एसपी उपेंद्र शर्मा ने बताया कि फरार चल रहे चार कैदियों की गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी जारी है. इसके साथ ही बंदियों के घरों पर भी निगरानी रखी जा रही है. दो बंदियों का सुराग मिल चुका है.
सभी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जायेगा. उन्होंने बताया कि कैदियों की गिरफ्तारी को लेकर बलिया, गाजीपुर, गहमर, बनारस, मोतिहारी, भोजपुर सहित कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है. इसके साथ ही कैदियों को गिरफ्तार करने के लिए आधुनिक अनुसंधान का भी मदद लिया जा रहा है.
आवाज के बाद भी नहीं खुली प्रशासन की नींद
आधे घंटे तक जेल की खिड़की को पांचों बंदी तोड़ते रहे. इस दौरान कई बार आवाज भी हुई.
लेकिन जेल प्रशासन की नींद नहीं टूटी. जेल प्रशासन के इस गहरे नींद ने अब बेनींद कर दिया है. जेल प्रशासन की हुई इस लापरवाही का खामियाजा अब कई अधिकारी एवं कर्मचारियों को चुकानी पड़ेगी.
इससे एक बात तो साफ हो जाता है कि जेल प्रशासन सुरक्षा को लेकर संजीदा नहीं है.
आधे घंटे तक बंदी खिड़की के ईंट को तोड़ते रहे और ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगी. वाच टावर पर भी खड़ा प्रहरी केवल दिखावे के लिए था.
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