शरीर में उभरे दाग को नहीं करें नजरअंदाज

Published at :20 Jul 2016 7:37 AM (IST)
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शरीर में उभरे दाग को नहीं करें नजरअंदाज

बिहारशरीफ : रीर के किसी अंग में उभरे दाग को लोग कभी भी नजरअंदाज नहीं करें. तांबे रंग का दाग लेप्रोसी बीमारी हो सकती है. अतएव इस रंग के उभरे दाग दिखने पर तुरंत स्थानीय अस्पताल में जाकर चिकित्सकों से दिखावें. ताकि बीमारी का सही रूप से पता चल सके. यह बातें सोमवार से सदर […]

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बिहारशरीफ : रीर के किसी अंग में उभरे दाग को लोग कभी भी नजरअंदाज नहीं करें. तांबे रंग का दाग लेप्रोसी बीमारी हो सकती है. अतएव इस रंग के उभरे दाग दिखने पर तुरंत स्थानीय अस्पताल में जाकर चिकित्सकों से दिखावें. ताकि बीमारी का सही रूप से पता चल सके. यह बातें सोमवार से सदर अस्पताल परिसर स्थित जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में शुरू हुए चार दिवसीय राष्ट्रीय लेप्रोसी उन्मूलन अभियान के प्रशिक्षण कार्यक्रम में डीएलओ डॉ रविंद्र कुमार ने कहीं. लेप्रोसी बीमारी की पहचान व बचाव के लिए जिले के हेल्थ एजुकेटर,एएनएम,फार्मासिस्ट व अन्य कर्मियों को इसके गुर सिखाये जा रहे हैं.

जिला कुष्ठ निवारण विभाग के चिकित्सा पर्यवेक्षक उमेश प्रसाद ने कर्मियों को जानकारी दी कि किसी व्यक्ति के शरीर के किसी अंग में अगर तांबे रंग का दाग दो या इससे अधिक दिखायी दे तो उसकी जांच करें. जांच में इस बात पर भी ध्यान दें कि दाग में सुनापन्न तो नहीं है. अगर दाग अधिक हो और उसमें सुनापन पायें तो संबंधित व्यक्ति अविलंब चिकित्सीय जांच के लिए निकट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भेजें.

ताकि दाग की जांच कर लेप्रोसी बीमारी की पुष्टि की जा सके. दूसरे दिन मंगलवार को प्रथम बैच के कर्मियों को ट्रेनिंग दी गयी. बुधवार से दूसरे बैच के कर्मचारी प्रशिक्षित किये जायेंगे. प्रशिक्षण प्राप्त कर्मी क्षेत्रों में कुष्ठ विकलांगता व्यक्तियों पर भी ध्यान दें. कोई व्यक्ति अगर इससे विकलांग हो गये हैं तो उसे भी चिह्नित कर जिला कुष्ठ निवारण विभाग ,बिहारशरीफ में भेजें. संबंधित व्यक्ति को इसकी जांच कर उसे शल्य चिकित्सा उपलब्ध करायी जा सके.
शल्य चिकित्सा से लोगों को कुष्ठ विकलांगता से निजात दिलायी जा सकती है. इसकी सुविधा यहां पर उपलब्ध है. चिहिंत मरीजों को विभाग की ओर ऑपरेशन कराया जाएगा. यह सुविधा मरीजों को नि:शुल्क उपलब्ध करायी जाती है.
बैचवार दी जा रही ट्रेनिंग
लेप्रोसी बीमारी के लक्षण की पहचान व उसके बचाव के लिए कर्मियों को बैचवार ट्रेनिंग दी जा रही है. प्रत्येक बैच में 30-30 कर्मियों को शामिल किया गया है. एक बैच के कर्मी दो दिनों की ट्रेनिंग लेंगे. ट्रेनर उमेश प्रसाद ने बताया कि यह बीमारी पूरी तरह से साध्य है. नियमित रूप से दवा का सेवन करने से बीमारी ठीक हो जाती है. लक्षण प्रतीत होने पर समय पर इसका इलाज करायें. दाग को हरगिज नहीं छिपायें. इस अवसर पर जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ मनोरंजन कुमार,जिला लेप्रोसी के प्रयोगशाला प्रावैधिकी विजय कुमार आदि लोग मौजूद थे.
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