हेलीपैड बना, नहीं आया शव

Published at :20 Jul 2016 7:33 AM (IST)
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हेलीपैड बना, नहीं आया शव

दुखद. मुठभेड़ में सोमवार को हेड कांस्टेबल अनिल हुए शहीद खबर मिलते ही रो पड़ा पूरा जिला गया-औरंगाबाद की सीमा पर नक्सलियों से हुई मुठभेड़ शव बुधवार की देर रात तक डुमरांव आने की सूचना डुमरांव/नावानगर : या और औरंगाबाद की सीमा पर सोनदह के जंगल में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सोमवार की शाम […]

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दुखद. मुठभेड़ में सोमवार को हेड कांस्टेबल अनिल हुए शहीद

खबर मिलते ही रो पड़ा पूरा जिला
गया-औरंगाबाद की सीमा पर नक्सलियों से हुई मुठभेड़
शव बुधवार की देर रात तक डुमरांव आने की सूचना
डुमरांव/नावानगर : या और औरंगाबाद की सीमा पर सोनदह के जंगल में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सोमवार की शाम बक्सर का सपूत अनिल कुमार सिंह शहीद हो गया. नावानगर प्रखंड के परमेश्वरपुर गांव निवासी अनिल कुमार सिंह सीआरपीएफ के कोबरा बटालिया में हेड कांस्टेबल के पर पर तैनात था. मंगलवार की सुबह इसकी खबर मिलते ही पूरा बक्सर का माहौल गमगीन हो गया. शहीद के पैतृक गांव परमेश्वरपुर गांव और डुमरांव में मातम पसर गया. वहीं शहीद के घर में भी कोहराम और रोना-धोना मचा है.
अनिल के शहीद होने की खबर मिलने के बाद से ही पत्नी मीरा बेसुध पड़ी है. दोनों बच्चों व भाइयों का भी रो-रोकर बुरा हाल है. इधर, शहीद अनिल का शव बुधवार की देर रात तक डुमरांव आने की सूचना है. जानकारी के अनुसार पहले
हेलीकॉप्टर से शव को बक्सर लाने
की तैयारी थी. इसको लेकर प्रशासन द्वारा सारी तैयारी भी पूरी कर ली
गयी थी. नावानगर स्थित नवोदय विद्यालय के प्रागंण में हेलिपैड भी बना दिया गया था. डीएम व एसपी सहित जिले के तमाम आला अफसर पूरे दिन शव का इंतजार करते रहे, पर पोस्टमार्टम में विलंब के कारण अंतिम समय पर हेलिकॉप्टर से शव लाने की योजना स्थगित करते हुए सड़क मार्ग से लाने का निर्णय लिया गया. सूत्रों की मानें तो मंगलवार की शाम करीब छह बजे शहीद का शव गया से बक्सर के लिए भेजा गया.
वर्ष 2000 में हुई थी बहाली : नावानगर प्रखंड की बाबूगंज इंगलिश पंचायत स्थित परमेश्वरपुर गांव निवासी स्व रामचंद्र सिंह के पुत्र अनिल सिंह की बहाली वर्ष 2000 में सीआरपीएफ में हुई थी. ट्रेनिंग
लेने के बाद इनकी पहली पदस्थापना केरल में हुई. उसके बाद उनको जम्मू-कश्मीर भेजा गया. दो साल तक काश्मीर में रहने के बाद उनको कोबरा बटालियन में भेज दिया गया. अपनी बहादुरी व साहसिक कारनामे को लेकर अनिल हमेशा चर्चित रहे थे. इन्हें कोबरा में शामिल किया गया, जहां नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गये.
एक माह पहले ही गांव आया था अनिल : सीआरपीएफ के कोबरा बटालियन में तैनात अनिल कुमार सिंह महज एक माह पहले ही अपने गांव आया था. पिछले 17 जून को वह काम पर लौट गया था. तब उसने पंचायत चुनाव में भाग भी लिया था. भाई राजराम सिंह ने बताया कि जाते समय बोला था कि बहुत जल्द गांव आना है. उन्होंने बताया कि रोजाना मोबाइल से घर के लोगों की बात होती रहती थी. सोमवार को बात नहीं हो सकी थी. इससे मन घबरा रहा था. इस बीच मंगलवार की सुबह मुठभेड़ की खबर मिल गयी.
सीआरपीएफ के कोबरा बटालियन में था गांव का सपूत
रोजी-रोटी को ले बसा डुमरांव
अनिल के भाई राजाराम ने बताया कि करीब पांच वर्ष पूर्व मां व पिता की मौत के बाद परिवारिक बोझ मेरे कंधे पर आ पड़ा. गांव में माली हालत खराब थी़ ऐसे में कारोबार के सिलसिले में उनका परिवार डुमरांव आ गया. शहर के शहीद मर्द मुहल्ले में रह कर कारोबार शुरू किया. परिवार की गाड़ी खींचने में भैया अनिल का काफी सहयोग रहा है. उनके शहीद होने से घर की हालत खराब हो गयी है.
सात वर्ष पूर्व हुई थी शादी
परमेश्वरपुर गांव के रहनेवाले अनिल की शादी सीआरपीएफ में नौकरी के नौ साल बाद सिकरौल निवासी शिवजी सिंह की पुत्री मीरा के साथ हुई थी. उनको एक पुत्र और एक पुत्री है. इसमें बेटी आकांक्षा बड़ी है, जिसकी उम्र करीब पांच साल है. वहीं बेटा अभिनव की उम्र महज दो साल है. अनिल के शहीद होने के बाद पत्नी व बच्चों का हाल खराब हो चुका है. रोते-बिलखते परिजनों ने बताया कि पति की मौत की खबर मिलते ही पत्नी बेहोश हो गयी़ उसे किसी तरह ढाढ़स बंधाया गया़ इधर, मीरा ने बताया कि बच्चों के सुंदर भविष्य की कल्पना करने वाले पिता की मौत के बाद इन बच्चों का सपना जरूर पूरा करूंगी़
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