रंगश्री के तत्वावधान में गंगा तट पर हुआ इतिहास सम्मेलन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Nov 2019 8:08 AM

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बक्सर : इतिहासकार देवेंद्र चौबे ने कहा कि इतिहास को नये सिरे से देखने की जरूरत है. अभी तक जो इतिहास लिखा गया है, वह पढ़े लिखे विद्वानों ने लिखा है. हमारी कोशिश है कि जनता के मन में जो जन समाज का इतिहास है, उसको सामने लाया जाये. उन आंदोलनों और संघर्षों को जनता […]

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बक्सर : इतिहासकार देवेंद्र चौबे ने कहा कि इतिहास को नये सिरे से देखने की जरूरत है. अभी तक जो इतिहास लिखा गया है, वह पढ़े लिखे विद्वानों ने लिखा है. हमारी कोशिश है कि जनता के मन में जो जन समाज का इतिहास है, उसको सामने लाया जाये. उन आंदोलनों और संघर्षों को जनता के नजरिये से देखा जाये, जिसे अब तक मुख्यधारा के इतिहासकार अपनी निगाह से देखते रहे हैं. वे गुरुवार को अहिरौली के गंगा तट पर रंगश्री इतिहास ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित सातवां सर्जनात्मक इतिहास सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे थे.
इस मौके पर उन्होंने कहा कि केवल नेतृत्वकर्ता का ही इतिहास न पढ़ा जाये, बल्कि उन छोटे-छोटे नायकों को भी इतिहास के केंद्र में खड़ा किया जाये जिन्होंने गांव और कस्बों के इतिहास को बदलते हुए राष्ट्र इतिहास की धारा को अपनी चेतना से प्रभावित किया और यहीं इतिहास गांव और किसानों की जिंदगी में बिखरा हुआ है. जिसे सहेजने की जरूरत है.
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार कुमार नयन ने ‘मेरा गांव, मेरा इतिहास’ विषय पर बहुत ही बारीकी से अपनी बातों को रखा. श्री नयन ने कहा कि प्रत्येक गांव की अपनी सभ्यता और संस्कृति है. उसका इतिहास जो प्राकृतिक और वैज्ञानिक तरीके से सभ्यता की गति के साथ विकसित हुई है. ऐसे गांवों के इतिहास को जानने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि हर गांव में कुछ ऐसे व्यक्ति मिलेंगे, जिन्होंने जाति, धर्म, संप्रदाय, नस्ल से ऊपर उठकर अपने गांव के लिए बहुत कुछ किया है. ऐसे लोग हमारे गांव के लिए आदर्श हैं. इन सबकी विवेचन और व्याख्या इतिहास में होनी चाहिए. जिससे हम अपने गांव, समाज, देश और समस्त विश्व को मनुष्यता, अहिंसा और न्यायपूर्ण समाज दे सकें.
इनके अलावे अवकाश प्राप्त शिक्षक गणेश उपाध्याय, डॉ महेंद्र प्रसाद, पत्रकार शशांक शेखर, राम इकबाल ठाकुर, मुखिया रंजीत चौधरी, फौदार मांझी ने समेत अन्य ने कहा कि ग्रामीण समाज का अपना एक अलग इतिहास है, जिसने तत्कालीन समाज को प्रभावित किया है. ऐसे में इन इतिहासों को भी मुख्यधारा के इतिहास में लाना होगा, जिससे आने वाली पीढ़ी अपने समाज को बेहतर तरीके से जान पाये.
इसके पूर्व इतिहासकार, साहित्यकार और समाजिक कार्यकर्ताओं ने ‘इतिहास समाचार’ बुकलेट का लोकार्पण किया. वहीं, गंगा आरती और लोकगीतों का गायन भी हुआ. मौके पर सूर्य देव चौबे, मधुसूदन चौबे, मधुसूदनाचार्य जी, बहादुर मांझी, वैद्यनाथ उपाध्याय, प्रमोद कुमार, कृष्णा नंद समेत अन्य मौजूद थे.
‘ग्रामीण इतिहास’ पुस्तक का शीघ्र होगा प्रकाशन
बक्सर जिला कस्बाई क्षेत्र है. इसके गांवों में स्वतंत्रता आंदोलन, इसके पूर्व एवं बाद के सामाजिक गतिविधियों में कई नायकों का इतिहास दफन है. चाहें आप बात करें 1857 की क्रांति, 1764 का बक्सर युद्ध या स्वतंत्रता आंदोलन की. इन सारे गतिविधियों में बक्सर के ग्रामीण क्षेत्रों के नायकों ने अपने तरीके से भाग लिया और समाज को एक नयी दिशा दी.
रंगश्री इतिहास ट्रस्ट इसी इतिहास की पड़ताल कर रहा है और इसी कड़ी में इतिहासकार देवेंद्र चौबे, दीपक कुमार राय एवं रश्मि चौधरी के संपादन में ‘ग्रामीण इतिहास’ पुस्तक प्रकाशित होगा. इस पुस्तक का संदर्भ स्थानीय, वैचारिक और राष्ट्रीय है. इस पुस्तक में न सिर्फ बक्सर के ग्रामीण इतिहास की जानकारी मिलेगी, बल्कि चीन, जापान और मॉरिशस के कई गांवों का इतिहास जानने को मिलेगा.
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