बिना रजिस्ट्रेशन के सैकड़ों की संख्या में धड़ल्ले से चल रहे पैथोलॉजी सेंटर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Sep 2019 2:25 AM

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बक्सर : जिले में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बहाल करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दिनों पैथोलॉजी जांच केंद्रों पर अभियान चलाया था.जिसके बाद जिले में महज 17 पैथोलॉजी केंद्र ही प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के सहारे इन दिनों चल रहे हैं.इसके बाद आज भी जिला मुख्यालय, अनुमंडल मुख्यालय एवं प्रखंड स्तर पर सैकड़ों की संख्या में […]

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बक्सर : जिले में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बहाल करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दिनों पैथोलॉजी जांच केंद्रों पर अभियान चलाया था.जिसके बाद जिले में महज 17 पैथोलॉजी केंद्र ही प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के सहारे इन दिनों चल रहे हैं.इसके बाद आज भी जिला मुख्यालय, अनुमंडल मुख्यालय एवं प्रखंड स्तर पर सैकड़ों की संख्या में पैथोलॉजी जांच केंद्र विभागीय उदासीनता के कारण चल रहे हैं. नियमों की दरकार कर शहर के सड़कों से लेकर गांव की गलियों में अवैध तरीके से पैथोलॉजी केंद्र चल रहे हैं.

वहीं जिले में 41 अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हो रहे हैं. इनमें ज्यादा केंद्रों पर तकनीशियन ही अल्ट्रासाउंड जांच का कार्य करते हैं. जबकि सभी केंद्रों के रजिस्ट्रेशन के दौरान डॉक्टरों का नाम एवं कागज लगाया गया है, लेकिन वे कभी भी केंद्र के इर्द-गिर्द भी नजर नहीं आते हैं.
नीम-हकीमों के हाथ में जांच केंद्र का संचालन होने के कारण गलत रिपोर्ट की संभावना हमेशा बनी रहती है, जिससे मरीजों का इलाज भी प्रभावित होता है. जिले में संचालित न तो कभी पैथोलॉजी जांच केंद्रों का और न ही कभी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों का स्वास्थ्य केंद्रों के द्वारा जांच किया जाता है. जिले में सभी तरह के जांच केंद्र अंधेर नगरी, चौपट राजा की तर्ज पर संचालित हो रहे हैं.
प्रतिदिन हर गली-मुहल्ले में एक जांच केंद्र खुल रहे हैं. ज्ञात हो कि सदर अस्पताल में संचालित हो रहे पीपीपी मोड में संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्र 2012 में तत्कालीन सिविल सर्जन ने टेक्निशियन द्वारा जांच किये जाने के कारण बंद कर दिया था. इसके बाद तेजी से अल्ट्रासाउंड केंद्रों के खुलने का सिलसिला जारी हुआ जो आज 41 की संख्या पर पहुंच गया है.
चिकित्सक केंद्र पर जांच नहीं करते
अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालन के लिए जिन चिकित्सकों के नाम पर रजिस्ट्रेशन कराया गया है. ज्यादातर केंद्रों पर रजिस्टर्ड चिकित्सक कभी भी केंद्र पर जांच नहीं करते हैं. इनके बदले टेक्नीशियन ही कार्य करते हैं. यदि डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करते हैं तो संचालकों को अपेक्षाकृत लाभ नहीं मिल पाता है. जिसके कारण संचालक महज 30 हजार रुपये में ही टेक्नीशियन की सहायता से केंद्र का संचालन करते
. विभागीय स्तर पर अब तक कभी भी जांच नहीं करायी गयी है.वहीं विभागीय सूत्रों की मानें तो एक नीयत राशि सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों से सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मियों द्वारा वसूली की जाती है. इसके कारण इन केंद्रों की कभी भी विभाग द्वारा जांच नहीं किया जाता है.
अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र बना फायदे का व्यवसाय
इन दिनों पैथोलॉजी जांच केंद्र की अपेक्षा अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र गली-कूचियों में काफी तेजी से खुल रहे हैं.अल्ट्रासाउंड जांच आज फायदे का व्यवसाय बन चुका है. प्रतिदिन एक मोटी रकम प्राप्त हो जाती है. सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के कई दलाल जिले में घूमते नजर आयेंगे.
लगभग सभी गांवों में व ग्रामीण चिकित्सकों के द्वारा मामूली बीमारी को लेकर भी अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लिख दिया जाता है. इसके कारण गरीबों का आर्थिक दोहन होता है. जबकि मरीजों को सबसे ज्यादा जांच पैथोलॉजिकल की जरूरत पड़ती है. जबकि 17 लाख की आबादी में महज 17 पैथोलॉजिकल जांच स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड है.
अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर शिकंजा कसा जायेगा
जिले में पैथोलॉजिकल जांच केंद्रों एवं अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर शिकंजा कसा जायेगा. टीम बनायी जा रही है. केंद्रों पर औचक जांच की जायेगी. टेक्नीशियन के सहारे चलने वाले केंद्रों पर कार्रवाई की जायेगी. वहीं अवैध रूप से संचालित हो रहे पैथोलॉजी केंद्रों पर भी कार्रवाई की जायेगी.
डॉ उषा किरण वर्मा, सिविल सर्जन, बक्सर

सेंटर

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