बिहार: सदर अस्पताल से एंटी रेबीज टीके की चोरी और कालाबाजारी, हरियाणा पुलिस ने ओटी सहायक से उगलवाए राज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 May 2023 7:17 AM
बिहार: मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में एंटी रेबीज टीके की चोरी और कालाबाजारी का मामला सामने आया है. हरियाणा में हुई एक गिरफ्तारी ने बिहार के अस्पताल से चल रहे पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया. ओटी सहायक की चोरी पकड़ी गयी और उसे गिरफ्तार किया गया.
मुजफ्फरपुर. मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल से एंटी रेबीज टीका चोरी करके इसे बेचा जाता था. इसकी पूरी प्लानिंग पिछले साल हैदराबाद में बनी थी. टीका हरियाणा पहुंचने पर ओटी सहायक को गिरफ्तार किया गया है. हरियाणा पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया और ट्रांजिट रिमांड पर लिया है.
थर्ड डिग्री बाइट होने पर दिया जाने वाला एंटी रेबीज इमनोग्लोबिन इंजेक्शन को पांच राज्यों में खपाया जाता था. ओटी असिस्टेंट नीलेश ने सात माह में करीब 3500 वॉयल इंजेक्शन इन राज्यों में फैले अपने रैकेट के सदस्यों को भेज चुका था. दो दिन बाद भी एक खेप इन राज्यों में भेजने की तैयारी थी. इन सभी वॉयल को उड़ीसा, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश व राजस्थान में फैले अपने रैकेट के सदस्यों को भेजता था.
इधर हरियाणा पुलिस के द्वारा ओटी असिस्टेंट नीलेश कुमार को गिरफ्तार किए जाने के बाद मंगलवार को दिनभर सेंट्रल स्टोर व डिस्ट्रिक स्टोर में इंटेड का मिलान किया गया. इसमें पाया गया कि जुलाई 2022 में नीलेश ने 5000 वॉयल एंटी रेबिज इमनाेग्लाेबिन इंजेक्शन की डिस्ट्रिक्ट स्टोर से मांग की थी. इसके बाद डिस्ट्रिक्ट स्टोर ने सेंट्रल स्टोर से डिमांड किया.
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बीएमआइसीएल से 5000 वॉयल यह इंजेक्शन भी मंगा लिया गया. इसमें 3700 वॉयल इंजेक्शन का वॉयल सेंट्रल स्टोर ने डिस्ट्रिक्ट स्टोर को विभिन्न माह में दी गई. नीलेश ने बडी संख्या में थर्ड डिग्री बाइट वाले मरीज के आने की बात बताकर डिस्ट्रिक्ट स्टोर से 3500 वॉयल उठाव भी कर लिया. सेंट्रल स्टोर प्रभारी डॉ नवीन कुमार ने कहा कि 5000 की मांग की गयी थी, जिसमें 3700 वाॅयल इंडेंट लेकर दिया गया. 2300 वॉयल अभी भी सेंट्रल स्टोर में उपलब्ध है.
कमर से उपर गर्दन, चेहरा, पेट में या शरीर के कई स्थान पर यदि कुत्ता काटता है ताे उसे थर्ड डिग्री बाइट कहा जाता है. ऐसे मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो जाता है. मरीज की डेंजरस स्थिति होने पर उसे एंटी रेबिज इमनोग्लोबिन इंजेक्शन दी जाती है. इस इंजेक्शन को देने से मरीज को तुरंत इंम्युनिटी हो जाता है. बताया जाता है कि सरकार 4247 रुपए में एक इंजेक्शन की खरीद करती है.
कोराना संक्रमण की जांच के लिए सरकार की ओर से आए एंटीजन कीट घोटाला मई 2021 में सदर अस्पताल में हुआ था. इसमें 5 लोगों की भूमिका सामने आयी थी.
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