बिहारशरीफ : 10 साल पहले मन की पीड़ा से शुरू हुआ अभियान, आज साढ़े 19 लाख पौधों के साथ बना हरियाली का जन आंदोलन

मिशन हरियाली नूरसराय के संस्थापक राजीव रंजन भारती की फोटो
Mission Hariyali Nalanda : बढ़ती गर्मी और घटती हरियाली ने एक युवा को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया। राजीव रंजन भारती ने 'मिशन हरियाली नूरसराय' की शुरुआत की, जो अब लाखों पौधों और लोगों को प्रेरित करने वाला एक जन आंदोलन बन गया है।
Mission Hariyali Nalanda : बढ़ती गर्मी, घटती बारिश और तेजी से खत्म होती हरियाली ने एक युवा के मन को इस कदर झकझोर दिया कि उसने केवल चिंता करने के बजाय बदलाव की राह चुन ली.बिहारशरीफ के नूरसराय निवासी राजीव रंजन भारती ने वर्ष 2016 में अपने कुछ मित्रों के साथ मिलकर मिशन हरियाली नूरसराय की शुरुआत की. आज यह छोटी-सी पहल पर्यावरण संरक्षण का बड़ा जन आंदोलन बन चुकी है. पिछले दस वर्षों में मिशन हरियाली ने नालंदा समेत आसपास के जिलों में साढ़े 19 लाख पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराकर रोपित कराए, करीब 15 लाख लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और 11 लाख से अधिक स्कूली बच्चों को पौधारोपण व प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया है.
बढ़ती गर्मी ने बदल दी सोच
संस्था के संस्थापक राजीव रंजन भारती बताते हैं कि करीब दस वर्ष पहले मित्रों के साथ हुई चर्चा में बढ़ती गर्मी, घटती वर्षा और लगातार कट रहे पेड़ों को लेकर चिंता जताई गई. तभी यह निर्णय लिया गया कि केवल सरकार के भरोसे रहने के बजाय समाज को स्वयं आगे आना होगा. इसी सोच के साथ 16 जून 2016 को 17-18 साथियों ने मिशन हरियाली नूरसराय की नींव रखी. आज इस अभियान से करीब 100 सदस्य जुड़े हैं, जबकि बैंककर्मी, चिकित्सक, शिक्षक, व्यवसायी, सरकारी और गैर-सरकारी अधिकारी भी इसमें सहयोग कर रहे हैं.
हर माह 20 से 25 हजार पौधों का नि:शुल्क वितरण
मिशन हरियाली के सदस्य नर्सरियों और किसानों से पौधे खरीदकर हर माह 20 से 25 हजार पौधे लोगों को उनकी निजी जमीन पर लगाने के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराते हैं. नालंदा के अलावा नवादा, शेखपुरा और आसपास के जिलों में भी यह अभियान लगातार चल रहा है.
11 लाख बच्चों को बनाया हरियाली का दूत
राजीव रंजन भारती का मानना है कि पेड़ लगाने से भी बड़ा काम बच्चों के मन में प्रकृति के प्रति प्रेम जगाना है. इसी सोच के तहत संस्था अब तक 11 लाख से अधिक स्कूली बच्चों से संवाद कर चुकी है. विद्यार्थियों को हर वर्ष कम-से-कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प दिलाया जाता है. संस्था स्कूलों के अलावा अस्पतालों, कॉलेजों, रेलवे स्टेशन, बाजार और सार्वजनिक स्थलों पर भी नियमित रूप से पौधों का वितरण करती है.
फलदार पौधों से बढ़ी हरियाली और आमदनी
पिछले दस वर्षों में संस्था ने मुख्य रूप से अमरूद, कटहल और महोगनी के साढ़े 19 लाख पौधे वितरित किए हैं. इनमें बड़ी संख्या में पौधे अब फलदार और इमारती वृक्ष बन चुके हैं. मिशन हरियाली का उद्देश्य "हर परिवार के पास कुछ पेड़ हों अपना " अभियान को जन-जन तक पहुंचाना है. मंगलवार को भी पावापुरी मेडिकल कॉलेज परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के बीच 300 अमरूद, 200 कटहल और 100 महोगनी सहित कुल 600 पौधे निःशुल्क वितरित किए गए. वर्तमान में सरकारी आंकड़ों के अनुसार नालंदा अमरूद उत्पादन में राज्य के अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है.
बेलदारीपर गांव बना हरियाली की पहचान
नूरसराय प्रखंड के ननौरा बेलदारी और चरुई बेलदारी गांव आज मिशन हरियाली की सफलता की जीवंत मिसाल हैं. करीब 400 घरों वाले इन गांवों में अब चार हजार से अधिक फलदार और इमारती पेड़ लहलहा रहे हैं. जिन ग्रामीणों ने कभी फलदार पौधे लगाने से परहेज किया था, वे आज अमरूद और कटहल बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं. महोगनी के दर्जनों बगीचे तैयार हो चुके हैं और ग्रामीणों का कहना है कि हरियाली बढ़ने से गांव का वातावरण पहले की तुलना में अधिक ठंडा और स्वच्छ हो गया है. मिशन हरियाली ने साबित कर दिया है कि एक व्यक्ति की सकारात्मक सोच और समाज की भागीदारी मिलकर पर्यावरण संरक्षण की बड़ी मिसाल कायम कर सकती है.
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