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राजगीर जू सफारी में सांस्कृतिक पर्यटन व वन्यजीव संरक्षण पर विशेष प्रशिक्षण

Updated at : 09 Dec 2025 10:02 PM (IST)
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राजगीर जू सफारी में सांस्कृतिक पर्यटन व वन्यजीव संरक्षण पर विशेष प्रशिक्षण

इसका उद्देश्य जू सफारी में कार्यरत सफारी गाइडों और वनरक्षियों को यहां के इतिहास, संस्कृति, पुरातात्विक धरोहर और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित गहन व सटीक जानकारी प्रदान किया गया.

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राजगीर. राजगीर के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सांस्कृतिक पर्यटन को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने विषय पर कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को राजगीर जू सफारी में किया गया. इसका उद्देश्य जू सफारी में कार्यरत सफारी गाइडों और वनरक्षियों को यहां के इतिहास, संस्कृति, पुरातात्विक धरोहर और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित गहन व सटीक जानकारी प्रदान किया गया. पर्यटकों को तथ्यपरक, प्रभावी तथा संरक्षण-उन्मुख मार्गदर्शन के लिए लैस किया गया. कार्यक्रम में हेरिटेज सोसाइटी, पटना के महानिदेशक डॉ. अनंत आशुतोष द्विवेदी तथा नालंदा विश्वविद्यालय के डॉ आजादहिंद गुलशन नन्दा ने राजगीर के प्राचीन इतिहास, मगध साम्राज्य, जरासंध अखाड़ा, बिंबिसार जेल, नालन्दा महाविहार, बुद्ध-महावीर से जुड़े स्थलों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा गर्मजल कुंडों की अनूठी परंपरा पर विस्तृत जानकारी दी. विशेषज्ञों ने वन क्षेत्र में पाई जाने वाली जैव-विविधता, प्रमुख वन्यजीवों और संरक्षण चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला. प्रशिक्षण के दौरान पर्यावरण अनुकूल पर्यटन, वन्यजीव सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण को पर्यटकों तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाने के उपाय बताए गए. प्रतिभागियों को फील्ड विजिट, समूह अभ्यास, इंटरएक्टिव सत्र तथा राजगीर के महत्वपूर्ण स्थलों यथा गृद्धकूट पर्वत, विश्व शांति स्तूप, साइक्लोपियन वॉल, जरासंध अखाड़ा, बिंबिसार जेल, विश्व धरोहर नालन्दा का प्रत्यक्ष अध्ययन कराया गया. साथ ही आपदा प्रबंधन, पर्यटकों से संवाद के मानक, आधुनिक सुरक्षा उपाय और जिम्मेदार पर्यटन की अवधारणा पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया. जू सफारी निदेशक राम सुंदर एम ने कहा कि राजगीर की जैव-विविधता और सांस्कृतिक धरोहर अत्यंत मूल्यवान है. ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल गाइडों और वनरक्षियों की दक्षता बढ़ाते हैं, बल्कि पर्यटकों को सुरक्षित, ज्ञानवर्धक और यादगार अनुभव प्रदान करने में सहायक होते हैं. जू सफारी प्रशासन ने इसे राजगीर को सांस्कृतिक एवं वन्यजीव पर्यटन के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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