राजगीर में केंद्रीय विद्यालय का सपना होगा साकार, बिहार कैबिनेट की मंजूरी से निर्माण का रास्ता साफ

Bihar Cabinet Meeting: बिहार कैबिनेट ने राजगीर के महादेवपुर में केंद्रीय विद्यालय स्थापना के लिए 5 एकड़ जमीन लीज पर देने को मंजूरी दे दी है. फैसले से वर्षों से लंबित परियोजना को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
Bihar Cabinet Meeting: पर्यटन नगरी राजगीर में लंबे समय से प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालय की स्थापना का मार्ग अब पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है. बुधवार को बिहार कैबिनेट द्वारा इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद संपूर्ण क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है. वर्षों से लंबित पड़ी इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर स्थानीय लोगों की उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं, लेकिन राज्य सरकार के ताजा निर्णय ने एक बार फिर केंद्रीय विद्यालय के शीघ्र संचालन की उम्मीदों को नई रफ्तार दे दी है.
कैबिनेट के फैसले के तहत अंचल राजगीर, मौजा पिलखी, थाना संख्या-484 के विभिन्न खाता एवं खेसरा की कुल प्रस्तावित रकवा-05 एकड़ लैण्ड बैंक हेतु अर्जित भूमि पर नवीन केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना की जाएगी. इसके लिए केन्द्रीय विद्यालय संगठन, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को एक रूपये के टोकन मूल्य पर 30 वर्षों के लिए लीज नवीकरण विकल्प के साथ भूमि बंदोबस्त किये जाने की विधिवत स्वीकृति प्रदान की गयी है.
साल 2025 में ही जिला प्रशासन ने शुरू की थी पहल
इस केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए जिला प्रशासन ने वर्ष 2025 में ही आवश्यक बुनियादी प्रक्रिया पूरी कर ली थी. तत्कालीन जिलाधिकारी कुंदन कुमार और अपर समाहर्ता मनीष शर्मा की विशेष पहल पर महादेवपुर स्थित लैंड बैंक की सरकारी भूमि में से पांच एकड़ का यह भूखंड विद्यालय निर्माण के लिए चिन्हित कर विभागीय स्वीकृति हेतु राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था. इसके साथ ही केंद्रीय विद्यालय संगठन और संबंधित मंत्रालयों को भी आवश्यक तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए थे. इस पूरी योजना को गति देने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपना महत्वपूर्ण और सराहनीय सहयोग दिया था. विश्वविद्यालय ने अपने परिसर में केंद्रीय विद्यालय के अस्थायी संचालन के लिए एक सुसज्जित भवन उपलब्ध कराने की लिखित सहमति दी थी और आवश्यक बुनियादी संसाधनों की व्यवस्था का भी पूरा आश्वासन दिया था.
मोबाइल फ्लैशलाइट की रोशनी में तैयार हुआ था प्रस्ताव
नालंदा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रमेश प्रताप सिंह परिहार ने शिक्षा के विस्तार और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को देखते हुए हरसंभव सहयोग की अपनी प्रतिबद्धता जताई थी. इस संबंध में जमीन का आधिकारिक प्रस्ताव तैयार करने की शुरुआती प्रक्रिया भी बेहद चुनौतीपूर्ण रही थी. जिला प्रशासन के तत्कालीन आला अधिकारियों के निर्देश पर राजगीर के अंचलाधिकारी अनुज कुमार, केंद्रीय विद्यालय नालंदा के प्राचार्य विवेक किशोर, हेडमास्टर संजय कुमार रंजन तथा स्थानीय राजस्व कर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए देर रात वाहनों की हेडलाइट और मोबाइल फ्लैशलाइट की रोशनी में ही भौतिक रूप से स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक भू-दस्तावेज तैयार किए थे, जिन्हें तत्काल जिला प्रशासन के माध्यम से आगे बढ़ाया गया था. हालांकि, उस समय केंद्र स्तर पर तुरंत तकनीकी मंजूरी नहीं मिलने से यह योजना कुछ समय के लिए ठंडे बस्ते में चली गई थी.
आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा संस्थान
अब बिहार कैबिनेट की अंतिम स्वीकृति के बाद इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को जमीनी स्तर पर एक नई और मजबूत गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. महादेवपुर में प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालय के अत्याधुनिक भवन निर्माण से राजगीर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक एवं राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा आसानी से उपलब्ध हो सकेगी. यह संस्थान समूचे क्षेत्र के शैक्षणिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा. बिहार सरकार के इस लोक कल्याणकारी निर्णय का केंद्रीय विद्यालय नालंदा के प्राचार्य विवेक किशोर, नगर परिषद की सभापति जीरो देवी, जदयू जिला उपाध्यक्ष सुवेन्द्र राजवंशी, वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार, पूर्व प्रखंड प्रमुख सुधीर कुमार पटेल, मुखिया प्रतिनिधि पंकज कुमार सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने स्वागत करते हुए इसे राजगीर के सुनहरे भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय बताया है.
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