मेलों से मजबूत होती है सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना, राजगीर में बोले महर्षि चिदात्मन

Published by : Vikash Jha Updated At : 10 Jun 2026 7:21 PM

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ज्ञान मंच से प्रवचन करते महर्षि चिदात्मन जी महाराज

Nalanda News: राजगीर में गढ़ महादेव मंदिर के ज्ञान मंच से प्रवचन करते हुए महर्षि चिदात्मन उर्फ फलाहारी बाबा ने कहा कि मेले सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक एकता के सशक्त माध्यम हैं. उन्होंने राजगीर के मलमास मेले को सामाजिक समानता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला ऐतिहासिक आयोजन बताया.

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Nalanda News (रामविलास की रिपोर्ट): भारतीय संस्कृति में मेलों की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठानों या मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज, संस्कृति और अध्यात्म को एक सूत्र में जोड़ने वाला सबसे प्रभावी माध्यम है. यह बातें प्रसिद्ध संत महर्षि चिदात्मन जी महाराज उर्फ फलाहारी बाबा ने बुधवार को राजगीर के गढ़ महादेव मंदिर स्थित ज्ञान मंच से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही.

वैदिक परंपरा में मेलों का विशेष महत्व

फलाहारी बाबा ने कहा कि वैदिक संस्कृति में मेलों का विशेष महत्व रहा है. ऋग्वेद में वर्णित ‘संगच्छध्वं संवदध्वं’ का संदेश एक साथ चलने, विचार साझा करने और हृदयों के मिलन की प्रेरणा देता है. मेलों का आयोजन इसी वैदिक भावना का सजीव स्वरूप है. उन्होंने कहा कि कुम्भ मेला हो अथवा राजगीर का ऐतिहासिक पुरुषोत्तम मलमास मेला, ये आयोजन भारत की सामूहिक चेतना, आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक एकता के महान उत्सव हैं.

ज्ञान-विज्ञान के केंद्र रहे हैं मेले

महर्षि चिदात्मन ने कहा कि प्राचीन काल में जब संचार और परिवहन के साधन सीमित थे, तब मेले ज्ञान-विज्ञान के आदान-प्रदान के प्रमुख केंद्र हुआ करते थे. देश के विभिन्न हिस्सों से संत, महात्मा, विद्वान, संन्यासी और गृहस्थ एकत्र होकर धर्म, दर्शन, समाजशास्त्र, खगोलशास्त्र और लोककल्याण से जुड़े विषयों पर शास्त्रार्थ करते थे. इन विचार-विमर्शों से समाज को नई दिशा और नई चेतना प्राप्त होती थी.

मलमास मेला सामाजिक समानता का प्रतीक

उन्होंने कहा कि राजगीर का मलमास मेला अपनी विशिष्ट पहचान के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां सप्तधारा और ब्रह्मकुंड में स्नान के दौरान जाति, वर्ग, धन और पद का भेद समाप्त हो जाता है. एक ही पवित्र जलधारा में स्नान कर सभी श्रद्धालु स्वयं को ईश्वर का अंश मानते हैं. यही सामाजिक समरसता और समानता सनातन संस्कृति की वास्तविक शक्ति है.

स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलता है बल

फलाहारी बाबा ने कहा कि मेले केवल आध्यात्मिक जागरण के केंद्र नहीं हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के भी मजबूत आधार हैं. ऐसे आयोजनों से हस्तशिल्प, लोककला, लघु व्यापार और पारंपरिक व्यवसायों को नया जीवन मिलता है. उन्होंने कहा कि मेले भारत की आध्यात्मिक और आर्थिक दोनों धमनियों में ऊर्जा का संचार करते हुए राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

श्रद्धालुओं ने सुना प्रेरणादायक प्रवचन

गढ़ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे. श्रद्धालुओं ने महर्षि चिदात्मन उर्फ फलाहारी बाबा के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और भारतीय संस्कृति, अध्यात्म तथा सामाजिक एकता के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया.

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विकाश झा एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और कंटेंट प्रोफेशनल हैं, जिन्हें मीडिया, डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2020 में भोपाल से हुई, जिसके बाद उन्होंने ETV Bharat, Bharat Express और News24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदार भूमिकाओं का निर्वहन किया। News24 से आगे बढ़ते हुए उन्होंने Adglobal360 India Pvt. Ltd. के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं। क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव है और वे क्रिकेट को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अपनी लेखनी का महत्वपूर्ण विषय मानते हैं। उन्हें यात्रा करना, नए लोगों और स्थानों को जानना तथा समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले विकाश डिजिटल मीडिया की तेज रफ्तार दुनिया में तथ्यों पर आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।

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