अब भीख नहीं, मिलेगा रोजगार, नालंदा के 1211 भिक्षुकों को आत्मनिर्भर बनाएगी सरकार

Author Kanchan kumar|Edited by Sakshi Kumari
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अधिकारियों के साथ बैठक करते डीएम उदिता सिंह

नालंदा जिला प्रशासन ने 1211 भिक्षुकों को रोजगार से जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य केवल भिक्षावृत्ति रोकना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों का सम्मानजनक पुनर्वास और कौशल विकास कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है.

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Nalanda Beggars Employment Scheme : नालंदा जिले को भिक्षामुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. वर्ष 2026 के सर्वेक्षण में जिले में 1,211 भिक्षुकों की पहचान की गई है. अब प्रशासन का फोकस केवल भिक्षावृत्ति रोकने पर नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों के सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने पर रहेगा.

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नालंदा में 1,211 भिक्षुकों की हुई पहचान

जानकारी अनुसार, बिहारशरीफ में जिला पदाधिकारी उदिता सिंह की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना की समीक्षा बैठक आयोजित हुई. बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026 के सर्वेक्षण के दौरान नालंदा जिले में 1,211 भिक्षुकों की पहचान की गई है. प्रशासन अब इन सभी लोगों को चरणबद्ध तरीके से स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और पुनर्वास योजनाओं से जोड़ने की तैयारी कर रहा है.

Nalanda Beggars Employment Scheme : हर भिक्षुक का होगा आवश्यकता आधारित मूल्यांकन

डीएम उदिता सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक भिक्षुक की परिस्थितियों का गहराई से अध्ययन किया जाए. यह पता लगाया जाए कि कोई व्यक्ति वृद्धावस्था, दिव्यांगता, मानसिक बीमारी, आर्थिक तंगी या अन्य कारणों से भिक्षावृत्ति कर रहा है. इसके आधार पर प्रत्येक व्यक्ति का आवश्यकता आधारित मूल्यांकन तैयार कर पुनर्वास की अलग-अलग कार्ययोजना बनाई जाएगी.

मंदिरों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में चलेगा विशेष अभियान

जिले के प्रमुख मंदिरों, धार्मिक स्थलों, रेलवे स्टेशन, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. पोस्टर, होर्डिंग और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा. डीएम ने कहा कि हर क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग रणनीति तैयार की जाएगी.

Nalanda News : पुनर्वास और रोजगार पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भिक्षावृत्ति में संलिप्त लोगों की काउंसलिंग कर उन्हें सरकारी योजनाओं, कौशल विकास प्रशिक्षण, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए. उन्होंने कहा कि सम्मानजनक पुनर्वास ही भिक्षामुक्त समाज की सबसे मजबूत नींव है. सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर कार्रवाई कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.

55 लोग बने आत्मनिर्भर, उत्पादक समूहों से भी जुड़े लाभुक

मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अब तक 55 लाभुकों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता दी जा चुकी है. वहीं 15 पुनर्वासित लाभुक उत्पादक समूहों से जुड़कर सामूहिक आजीविका गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं. इनमें बावन बूटी साड़ी और दुपट्टा निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं.

दो पुनर्वास गृहों में मिल रही आश्रय की सुविधा

जिले में शांति कुटीर और सेवा कुटीर नामक दो पुनर्वास गृह संचालित हैं. शांति कुटीर में अब तक 582 लोगों को आश्रय दिया गया, जिनमें 534 का सफल पुनर्वास हो चुका है. वर्तमान में वहां 48 लाभुक रह रहे हैं. वहीं सेवा कुटीर में 111 लोगों को आश्रय मिला, जिनमें 71 का पुनर्वास किया जा चुका है और 40 लाभुक अभी वहां रह रहे हैं.

"भिक्षा नहीं, अवसर दें" अभियान को मिलेगा जनसहयोग

बैठक में पुलिस, धर्मगुरुओं, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका पर भी चर्चा हुई. प्रशासन ने लोगों से अपील की कि सड़क पर भिक्षा देने के बजाय जरूरतमंदों को पुनर्वास योजनाओं से जोड़ने में सहयोग करें.

15 दिन के भीतर सौंपेंगे रिपोर्ट

"भिक्षा नहीं, अवसर दें" और "दान नहीं, सम्मान दें" संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया. अगले 15 दिनों के भीतर सभी संबंधित विभाग अपनी कार्रवाई पूरी कर जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपेंगे. इसके बाद चिन्हित भिक्षुकों को उनकी जरूरत के अनुसार सरकारी योजनाओं, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और पुनर्वास कार्यक्रमों से जोड़ने की प्रक्रिया और तेज की जाएगी.

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