नालंदा : निजी बस मालिकों की मनमानी के विरोध में सरकारी बस डिपो के चालकों व कर्मियों ने की हड़ताल

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सरकारी बस स्टैंड में खड़ीं बसें.

निजी बस मालिक की दबंगई और मारपीट से नाराज बिहारशरीफ के सरकारी बस कर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की, यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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अमर कुमार वर्मा की रिपोर्ट

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Government Bus Strike : निजी बस संचालकों की  मनमानी, चालकों व संवाहकों के साथ मारपीट और विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज सरकारी बस कर्मियों ने मंगलवार सेअनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है.हड़ताल के कारण बिहारशरीफ सरकारी बस स्टैंड से पटना मार्ग पर संचालित करीब 39-40 बसों के अलावा राजगीर एवं  नवादा का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया. अचानक बसों का संचालन बंद होने से पटना जाने वाले दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों, मरीजों और अन्य यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी.

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विरोध जताते सरकारी बस डिपो के कर्मचारी.

चालकों ने कहा-पटना में की गयी थी मारपीट

हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि पिछले करीब 15-20 दिनों से पटना में कुम्हार बस के मालिक मनोज कुमार द्वारा सरकारी बसों के परिचालन में लगातार बाधा डाली जा रही है तथा मारपीट की जा रही है. चालकों ने बताया कि इस संबंध में हमने बढ़िया अधिकारियों को पत्र लिखा है परंतु अधिकारी कान में तेल डालकर सोए हुए हैं इस तरह से अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार का ध्यान नही दिया जा रहा है और हमलोग की समस्या का निदान नहीं हो रहा है.

रूट बदलने का दवाब बनाते हैं निजी बस के मालिक

चालकों ने बताया कि कुम्हरार, राजेंद्र नगर, भूतनाथ रोड सहित कई स्थानों पर सरकारी बसों को रोककर निर्धारित मार्ग से वापस भेज दिया जाता है. चालकों ने आरोप लगाया कि इस दौरान चालक और संवाहकों के साथ कुमार बस के मालिक मनोज कुमार द्वारा बार-बार गाली-गलौज तथा मारपीट  की जाती है. कर्मचारियों आरोप लगाया कि कई बार सरकारी बसों में सवार यात्रियों को भी रास्ते में उतारने का दबाव बनाया जाता है.चालक राम कुमार और गुड्डू कुमार ने कहा कि वे विभाग के आदेश के अनुसार निर्धारित मार्ग पर बस चलाते हैं. किसी निजी बस संचालक के दबाव में रूट बदलना उनके लिए संभव नहीं है. उनका कहना है कि सुरक्षा के बिना वे काम नहीं करेंगे.

विभाग की व्यवस्था पर भी जतायी नाराजगी

हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने केवल निजी बस संचालकों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि विभागीय व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जतायी है. संवाहक राजेश कुमार बताया कि आठ घंटे के बजाय उनसे 12 से 16 घंटे तक ड्यूटी ली जा रही है. सुबह चार बजे से रात दस बजे तक काम करने के बावजूद वेतन समय पर नहीं मिलता है, जिससे हमलोगों को अपना घर चलाना भी मुस्किल हो रहा है. बस चालकों ने बताया कि सरकारी और निजी बसों के किराये में अंतर को भी कर्मचारियों ने बड़ी समस्या बताया.  उनके अनुसार निजी बसों का किराया करीब 100 से 120 रुपये है, जबकि सरकारी बसों का किराया करीब 148 से 172 रुपये तक पहुंच गया है. अधिक किराये के कारण यात्री निजी बसों को प्राथमिकता देते हैं.

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बस बंद रहने से सुनसान पड़ा बस स्टैंड.

सरकारी बस नहीं चलने से यात्रियों को हुई परेशानी

हड़ताल की जानकारी नहीं होने के कारण सुबह बस स्टैंड पहुंचे यात्रियों को काफी परेशानी हुई। पटना एयरपोर्ट से दिल्ली जाने के लिए निकले सुरेश कुमार ने बताया कि बस स्टैंड पहुंचने पर हड़ताल की जानकारी मिली। अब उन्हें निजी वाहन का सहारा लेना पड़ेगा। अन्य यात्रियों ने भी सरकारी बस सेवा जल्द बहाल कराने की मांग की. वरीय

अधिकारियों को दी गयी हड़ताल की सूचना

बिहारशरीफ बस स्टैंड के स्टेटिस्टिकल क्लर्क अरुण कुमार ने हड़ताल की पुष्टि करते हुए बताया कि पटना से आने-जाने वाले सरकारी बसों के चालक-संवाहकों के साथ मारपीट की शिकायतें मिली हैं. कर्मचारियों का कहना है कि वे मारपीट का सामना करते हुए ड्यूटी नहीं करेंगे.  पूरे मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दे दी गई है. फिलहाल वरीय स्तर से निर्णय होने तक सरकारी बसों का परिचालन बंद रहने की बात कही है.


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