नालंदा : कमजोर मानसून से खरीफ खेती पर बड़ा संकट, धान की रोपनी ठप होने से खेतों में चर रहे मवेशी

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फोटो - राजगीर के इन खेतों में जहाँ होती थी धान की रोपनी, वहां चरते हैं मवेशी | Prabhat Khabar Network

फोटो - राजगीर के इन खेतों में खेतों में चरते मवेशी | Prabhat Khabar Network

Nalanda News : राजगीर अनुमंडल में कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खरीफ खेती पूरी तरह प्रभावित है, और धान की रोपनी ठप पड़ गई है. जल स्रोतों के सूखने से हालात गंभीर हो रहे हैं.

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Nalanda News : राजगीर अनुमंडल में इस वर्ष कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. आषाढ़ का आधे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक सामान्य बारिश नहीं होने से खरीफ खेती पूरी तरह प्रभावित हो गई है. धान की रोपनी तो दूर, बड़ी संख्या में किसान अभी तक धान का बिचड़ा भी नहीं डाल सके हैं.

जिन किसानों ने किसी तरह बिचड़ा तैयार किया है, वे भी उसे बचाने के लिए दिन-रात जद्दोजहद कर रहे हैं. पर्याप्त नमी नहीं मिलने से बिचड़े पीले पड़ने लगे हैं और खेतों में दरारें साफ दिखाई दे रही हैं. सावन शुरू होने में महज दस दिन शेष हैं, लेकिन राजगीर क्षेत्र की नदियां, नहरें, आहर, पोखर, ताल-तलैया और छोटे-छोटे जलस्रोत सभी सूखे पड़े हैं. खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच रहा है.

सिंचाई के साधनों की कमी

अनुज प्रसाद, राम नंदन प्रसाद, प्रशांत कुमार, विकास कुमार, जनार्दन सिंह एवं अन्य किसानों का कहना है कि जीवनदायिनी मानी जाने वाली नदियां भी इस बार खुद पानी के लिए तरस रही हैं, जिससे खेती की उम्मीदें लगातार कमजोर होती जा रही हैं. कई गांवों में कृषि कार्य के लिए लगाए गए निजी बोरिंग भी जवाब देने लगे हैं.

भूजल स्तर नीचे चले जाने से बोरिंग से पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा है. जिन किसानों के पास डीजल पंप, बिजली मोटर या बोरिंग की सुविधा है, उन्हें भी सिंचाई के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की बहुत कटौती होने लगी है, वहीं दूसरी ओर डीजल की बढ़ती लागत किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है.

वैकल्पिक फसलों पर विचार

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की समय पर रोपनी नहीं होने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा. यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को देर से पकने वाली या वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करना पड़ सकता है, जिससे खरीफ उत्पादन के साथ-साथ किसानों की आय भी प्रभावित होगी.

किसानों का कहना है कि हर वर्ष जुलाई के मध्य तक अधिकांश खेतों में रोपनी का कार्य तेज गति से चलने लगता था, लेकिन इस बार खेत सूने पड़े हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में जहां धान की रोपनी होती थी वहां मवेशी घास चर रहे हैं. किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही अच्छी वर्षा नहीं हुई तो राजगीर अनुमंडल क्षेत्र में हालात अकाल की ओर बढ़ सकते हैं. किसानों ने सरकार से सिंचाई के वैकल्पिक इंतजाम, डीजल अनुदान, बीज सहायता तथा फसल क्षति की स्थिति में विशेष राहत पैकेज उपलब्ध कराने की पुरजोर मांग की है.

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