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मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने किया कुंड स्नान

राजगीर में मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष दो दिनों तक श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया.

प्रतिनिधि, राजगीर. राजगीर में मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष दो दिनों तक श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया. परंपरा और पंचांग के मतभेद के कारण कुछ श्रद्धालुओं ने 14 जनवरी को तो कुछ ने 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया। दोनों ही दिनों में दही-चूड़ा और तिलकूट जैसे पारंपरिक भोजन का लोगों ने भरपूर आनंद लिया. पर्व के अवसर पर राजगीर के धार्मिक और पर्यटक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा. राजगीर-तपोवन तीर्थ रक्षार्थ पांडा कमेटी के प्रवक्ता सुधीर कुमार उपाध्याय और सचिव विकास उपाध्याय के अनुसार

मकर मेला के दूसरे दिन तक ढ़ाई लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने राजगीर के प्रसिद्ध गर्मजल कुंडों और झरनों में स्नान किया. मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन इन पवित्र कुंडों में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और शारीरिक रोगों से भी मुक्ति मिलती है. इसी आस्था के चलते अहले सुबह से ही कुंडों पर स्नानार्थियों की लंबी कतारें देखी गईं. सुबह से लेकर शाम तक कुंड स्नान का सिलसिला लगातार चलता रहा. श्रद्धालुओं ने स्नान के उपरांत लक्ष्मी नारायण मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और भगवान की आरती में शामिल हुए. मंदिर परिसर “जयकारों” और भक्ति गीतों से गूंजता रहा। कई श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य कर जरूरतमंदों की सहायता भी की, जिससे पर्व का सामाजिक संदेश भी स्पष्ट रूप से सामने आया. मकर संक्रांति और मेला को लेकर राजगीर आने वाली ट्रेनों, बसों और ई-रिक्शाओं में खासी भीड़ देखी गई. पटना, गया, नवादा, नालंदा, शेखपुरा, जहानाबाद सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु राजगीर पहुंचे. परिवहन के साधन लगातार पैक होकर आते रहे, जिससे शहर की सड़कों पर भी चहल-पहल बनी रही. कुंड स्नान और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति के पारंपरिक भोजन दही-चूड़ा और तिलकूट का आनंद लिया. इसके साथ ही लोगों ने मकर मेला का भ्रमण किया, जहां विभिन्न सांस्कृतिक, मनोरंजन और ग्रामीण उत्पादों के स्टॉल लोगों को आकर्षित करते रहे. कई पर्यटकों ने राजगीर की पहाड़ियों में ट्रेकिंग कर प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद उठाया. कुल मिलाकर मकर संक्रांति के अवसर पर राजगीर में धर्म, संस्कृति, परंपरा और पर्यटन का अद्भुत संगम देखने को मिला. मेला शुरुआत के पहले दो दिनों ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन गतिविधियों को भी नया उत्साह प्रदान किया है.

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