पाली और बौद्ध अध्ययन को मिले बढ़ावा, नव नालंदा महाविहार के पूर्व छात्रों ने सरकार से की शिक्षक नियुक्ति की अपील

Updated:
विज्ञापन
Bihar Sharif News

नालंदा विश्वविद्यालय की तस्वीर

Bihar Sharif News : बिहारशरीफ स्थित नव नालंदा महाविहार के शोधार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों ने राज्य सरकार से नए कॉलेजों में पाली एवं बौद्ध अध्ययन विषय शुरू करने और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है. उनका कहना है कि इससे नालंदा की ऐतिहासिक विरासत और महाविहार की वैश्विक पहचान को नई मजबूती मिलेगी.

विज्ञापन

बिहारशरीफ से कंचन की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : एक समय एशिया में पाली भाषा और बौद्ध अध्ययन का सबसे प्रतिष्ठित शोध संस्थान रहा नव नालंदा महाविहार एक बार फिर चर्चा में है. राज्य सरकार द्वारा कॉलेजविहीन प्रखंडों में नए महाविद्यालय खोलने तथा बड़े पैमाने पर शिक्षकों की नियुक्ति की तैयारी के बीच महाविहार के शोधार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों ने सरकार से पाली एवं बौद्ध अध्ययन विषय में भी शिक्षक बहाली शुरू करने की मांग उठाई है.

पाली भाषा और बौद्ध दर्शन की विरासत बचाने की मांग

उनका कहना है कि जिस भूमि से भगवान बुद्ध का ज्ञान और पाली भाषा की परंपरा विश्वभर में फैली, वहां के विद्यालयों और महाविद्यालयों में यदि इस विषय की पढ़ाई को बढ़ावा नहीं मिलेगा, तो इसकी ऐतिहासिक पहचान कमजोर होती जाएगी. पाली एवं बौद्ध अध्ययन के शोधार्थियों का कहना है कि वर्ष 1951 में स्थापित नव नालंदा महाविहार ने एक साधारण झोपड़ी से अपनी यात्रा शुरू की थी. बाद में यह संस्थान पाली भाषा, त्रिपिटक साहित्य और बौद्ध दर्शन के अध्ययन एवं शोध का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन गया. वर्ष 2006 में इसे डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद इसकी शैक्षणिक पहचान और मजबूत हुई. वर्तमान में यह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान के रूप में संचालित हो रहा है.

पाली अध्ययन के लिए दुनिया भर से आते थे छात्र, अब घट रही अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति

महाविहार से जुड़े शोधार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों के अनुसार, लगभग 10 से 15 वर्ष पहले तक यहां श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, जापान, वियतनाम, नेपाल, भूटान, चीन सहित 8 से 10 देशों के विद्यार्थी पाली भाषा और बौद्ध अध्ययन के लिए आते थे. उनका दावा है कि वर्तमान में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या और देशों का दायरा सिमटकर लगभग 4 से 5 देशों तक रह गया है. उनका मानना है कि पिछले दो दशकों में भारत और विदेश के कई विश्वविद्यालयों में पाली एवं बौद्ध अध्ययन विभाग स्थापित होने से नव नालंदा महाविहार की विशिष्टता पर असर पड़ा है.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रेरणा से हुई थी नव नालंदा महाविहार की स्थापना

नव नालंदा महाविहार की स्थापना 20 नवंबर 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रेरणा तथा प्रख्यात बौद्ध विद्वान भिक्षु जगदीश कश्यप के नेतृत्व में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य पाली भाषा, बौद्ध दर्शन, त्रिपिटक साहित्य और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का संरक्षण, अध्ययन और शोध को बढ़ावा देना है. इतिहासकारों के अनुसार, पांचवीं शताब्दी में स्थापित प्राचीन नालंदा महाविहार विश्व का सबसे बड़ा बौद्ध शिक्षा केंद्र था.

स्वर्णिम काल में 10 हजार विद्यार्थी और 2 हजार आचार्यों का केंद्र था नालंदा

अपने स्वर्णिम काल में यहां लगभग 10 हजार विद्यार्थी और दो हजार आचार्य अध्ययन-अध्यापन से जुड़े थे. भारत सहित चीन, तिब्बत, श्रीलंका, कोरिया, जापान, मंगोलिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, नेपाल, भूटान और मध्य एशिया के विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थी यहां शिक्षा प्राप्त करने आते थे. भारत समेत कई देशों में हो रही पाली की पढ़ाई आज भारत में लगभग 15 से 20 विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में पाली भाषा एवं बौद्ध अध्ययन के स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं. वहीं श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, लाओस, जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के विश्वविद्यालयों में भी पाली एवं बौद्ध अध्ययन के विभाग कार्यरत हैं.

पाली और बौद्ध अध्ययन के संरक्षण के लिए नए कॉलेजों में पद सृजन की मांग

इसके बावजूद पाली और बौद्ध अध्ययन को पूरी तरह समर्पित संस्थानों की संख्या आज भी बेहद सीमित है, जिनमें नव नालंदा महाविहार का महत्वपूर्ण स्थान है. नए कॉलेजों में पाली और बौद्ध अध्ययन के पद सृजित करने की मांग राज्य सरकार द्वारा कॉलेजविहीन प्रखंडों में नए महाविद्यालय स्थापित करने और लगभग नौ हजार से अधिक पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति की तैयारी के बीच महाविहार के शोधार्थियों ने पाली और बौद्ध अध्ययन विषय को भी शामिल करने की मांग की है.

नए इंटर और डिग्री कॉलेजों में पाली विषय शुरू करने की उठी मांग

शोधार्थी जीतेंद्र कुमार, महेंद्र बौद्ध सहित अन्य विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर नए इंटरमीडिएट एवं डिग्री महाविद्यालयों में पाली और बौद्ध अध्ययन विषय की पढ़ाई शुरू करने तथा विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की है. जितेंद्र कुमार, मनमोहन , बौद्ध विषय पर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिहार, विशेषकर नालंदा में ही पाली और बौद्ध अध्ययन को संस्थागत स्तर पर बढ़ावा नहीं मिलेगा, तो विश्व स्तर पर इसकी ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखना कठिन होगा. उनका मानना है कि सरकार यदि नए शैक्षणिक संस्थानों में इन विषयों को शामिल करती है, तो न केवल पाली भाषा और बौद्ध दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकेगा, बल्कि नव नालंदा महाविहार की अंतरराष्ट्रीय पहचान भी और मजबूत होगी.

Also Read : झुनकिया बाबा मंदिर मॉब लिंचिंग कांड: मुख्य आरोपी दीनानाथ शरण ने किया सरेंडर, स्पीडी ट्रायल की तैयारी

 
विज्ञापन
Kanchan Kumar

लेखक के बारे में

By Kanchan Kumar

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन