मुख्यमंत्री तालाब मत्स्यिकी योजना से बेरोजगारों को मिलेगा लाभ, केंद्र और राज्य की 16 योजनाओं से मत्स्य पालकों को राहत

तालाब की फाइल तस्वीर
Bihar Sharif News : नालंदा में मछली उत्पादन और मत्स्य बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री तालाब मत्स्यिकी योजना सहित कई योजनाएं शुरू की हैं. हैचरी स्थापना और यांत्रिक एरिएटर पर 50 से 60 प्रतिशत तक अनुदान देकर युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है.
Bihar Sharif News : जिले में मछली उत्पादन और बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कमर कस ली है. ‘मुख्यमंत्री तालाब मत्स्यिकी योजना’ के तहत बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की विशेष योजना चलाई जा रही है. इसके अलावा केंद्र सरकार की 16 महत्वाकांक्षी योजनाएं भी मत्स्य पालकों के लिए लागू हैं. जिला मत्स्य विभाग द्वारा ‘उन्नत मत्स्य बीज उत्पादन योजना’ चलाई जा रही है.
मत्स्य पालकों को 50 से 60 प्रतिशत तक मिलेगा सरकारी अनुदान
चालू वित्तीय वर्ष में जिले में कुल 19 यूनिट मत्स्य बीज हैचरी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें सामान्य वर्ग को 8 यूनिट, अनुसूचित जाति को 3 यूनिट और पिछड़ा वर्ग को 8 यूनिट लगाने का प्रावधान है. सरकार द्वारा इकाई लागत पर सामान्य वर्ग के लाभुकों को 50%, जबकि अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के मत्स्य पालकों को 60% तक अनुदान दिया जाएगा.
विभिन्न वर्गों के मत्स्य पालकों को मिलेगा एरिएटर का लाभ
इससे जिले के मछली पालकों को आसानी से गुणवत्तापूर्ण बीज सस्ती दर पर उपलब्ध होगा. अभी दूसरे प्रदेशों से ऊंची कीमत पर बीज मंगाना पड़ता है. मत्स्य पालकों को तालाब में ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए यांत्रिक एरिएटर भी अनुदान पर दिया जाएगा. सामान्य वर्ग के 4, अनुसूचित जाति के 1 और पिछड़ा वर्ग के 3 मत्स्य पालकों को इसका लाभ मिलेगा.
मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ रोजगार सृजन पर जोर
एक यूनिट की लागत करीब 1.20 लाख रुपये है। जिला मत्स्य पदाधिकारी शंभू कुमार ने बताया कि मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ ही जिले के बेरोजगारों को इस क्षेत्र से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का सुनहरा अवसर दिया जा रहा है. सरकार कई लाभकारी योजनाएं चला रही है, जिसका लाभ उठाकर युवा अच्छी आय कर सकते हैं.
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