पानी में डूब रही चार बच्चियों को बचाने के प्रयास में महिला की मौत

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पानी में डूब रही चार बच्चियों को बचाने के प्रयास में महिला की मौत

कोरमा थाना अंतर्गत गगौर गांव में बाढ़ के पानी में नहाने के दौरान डूब रही चार बच्चियों के बचाने के प्रयास में एक महिला अपनी जान गवां बैठी.

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घाटकुसुम्भा. कोरमा थाना अंतर्गत गगौर गांव में बाढ़ के पानी में नहाने के दौरान डूब रही चार बच्चियों के बचाने के प्रयास में एक महिला अपनी जान गवां बैठी. हालांकि,शुक्र यह रहा कि पानी में डूब रही चारों बच्चियां बचने में सफल हो गई. मृतक स्व धर्मेन्द्र बिंद की 40 बर्षीय पत्नी सीता देवी थी. इस घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों में शोक की लहर व्याप्त हो गई. इस सम्बन्ध में गगौर पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि अमरजीत कुमार ने बताया कि सीता देवी बाढ़ के पानी में बलखाना खंधा में नहाने गई थी. वहां पर कई बच्चियां नहा रही थी जिसमें चार बच्चे गहरे पानी में डूबने लगी, जिसे बचाने के लिए सीता देवी गई. चारों बच्चियों तो बच गई ,परंतु सीता देवी की डूब कर मौत हो गई. अमरजीत ने बताया कि 2024 में मृतका के दो पुत्र एवं एक पुत्री का दिल्ली में मौत छत के छज्जा गिरने के कारण हो गया था. उसके 10 दिन बाद उनके पति धर्मेंद्र बिन्द की छत पर से गिरने के कारण मौत हो गया था. फिर इस बार स्वयं सीता देवी के मौत पानी में डूबकर हो गई. इससे पहले सब परिवार सीता देवी अपने पति के साथ दिल्ली में मजदूरी का काम किया करती थी. तीनों बच्चों की मृत्यु के बाद बाहर जाना मुनासिब नहीं समझी और गांव में ही रहकर मजदूरी कर भरण पोषण करने की ठानी. जिसमें उनके पति धर्मेंद्र की मृत्यु छत पर से गिर जाने के कारण हो गया था. अब मृतका की दो पुत्री फिलहाल जीवित है. परिवार के चौथी सदस्य की मौत से बेटियों पर दुखों का पहाड़

अब किसके साथ बुरा समय आ जाय कुछ कहा नहीं जा सकता है.लेकिन पानी में डूबकर सीता देवी की मौत ने इस परिवार में जीवित दो बेटियों पर दुखों का पहाड़ लाद दिया है. जो घटनाएं इस परिवार में घट रही है, यह इस परिवार के लिए बड़ा ही कष्टप्रद है. परिवार में यह मौत की चौथी घटना है. मां सीता देवी की पानी में डूबने से हुई मौत के पहले पिता के छत से गिरने के कारण मौत हो चुकी है. एक साल पहले पिता की मृत्यू के दस दिन पहले दिल्ली में दो भाइयों की मौत घर का छज्जा गिरने और उसमें दबने के कारण हो चुकी थी. दुखों का यह बोझ अब इन बेटियों के सामने पहाड़ बन चूका है.

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Santosh Kumar Singh

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