बिहारशरीफ. हरनौत कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में चल रहे देसी(कृषि विस्तार सेवाओं में इनपुट डीलरों के लिए डिप्लोमा) डिप्लोमा कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षुओं को पान अनुसंधान केंद्र इस्लामपुर में शुक्रवार को भ्रमण कराया गया. वहीं केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ सीमा कुमारी ने बताया कि वहां पर विभिन्न औषधीय पौधे (पताल मेघ, अश्व गंघा आदि) लगाया गया है. इसके फायदे के बारे जानकारी दी गयी. उन्होनें ने कहा की कालमेघ (पताल मेघ) एक कड़वा औषधीय पौधा है. जिसके कई गुण हैं. जो मुख्य रूप से लिवर को ठीक करने, बुखार कम करने, सूजन घटाने, पाचन सुधारने और इम्यून सिस्टम मजबूत करने, शुगर कंट्रोल, त्वचा रोगों और वायरल संक्रमणों में लाभकारी है. वहीं अश्वगंधा एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है. जो अपने तनाव-रोधी, सूजन-रोधी और कायाकल्प गुणों के लिए जानी जाती है. ये तनाव कम करने, नींद सुधारने, ऊर्जा बढ़ाने, पुरुष प्रजनन क्षमता बढ़ाने, मस्तिष्क कार्यप्रणाली बेहतर करने और रक्त शर्करा व कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में मदद करती है. वहीं इस प्रशिक्षण के नोडल पदाधिकारी सह मृदा विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ यूएन उमेश ने बताया कि जिले के विभिन्न प्रखंडों से 40 प्रशिक्षणार्थी को हर शुक्रवार को प्रशिक्षण दिया जाता है. उन्होंने बताया ये प्रशिक्षण 48 सप्ताह का है।जो 28 मई 2025 से शुरू है. जबकि आगामी 28 मई तक ये चलेगा. बताया कि यह देसी डिप्लोमा कोर्स पूरा करने के बाद, मैट्रिक पास युवा जिला कृषि कार्यालय से खाद, बीज और कीटनाशक का लाइसेंस प्राप्त करने के पात्र हो जाएंगे. इसके लिए उन्हें रसायन स्नातक या कृषि स्नातक की डिग्री की आवश्यकता नहीं होगी. इस कार्यक्रम की पहल मैनेज हैदराबाद द्वारा की गई है, जिसका उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है.
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