बिहार पंचायत चुनाव: मुखिया बनने के लिए क्या है योग्यता, जानें पूरा नियम

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कौन नहीं लड़ सकता बिहार में मुखिया का चुनाव?

Bihar Panchayat Election: बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो रही हैं. मौजूदा मुखिया और सरपंचों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर में खत्म होगा. चुनाव से पहले 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का नया गठन होगा. इससे मुखिया की सीटें बढ़ सकती हैं. जानें कौन मुखिया का चुनाव लड़ सकता है और किन लोगों पर रोक है.

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Bihar Panchayat Election: बिहार में मौजूदा मुखिया और सरपंचों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म होने वाला है. इससे पहले पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना है. चुनाव से पहले 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों और वार्डों की सीमा तय की जाएगी. इसके बाद कई पंचायतों का पूरा चुनावी गणित बदल सकता है.

बिहार में गांव की सरकार के अगले चुनाव को लेकर हलचल बढ़ने लगी है. ऐसे में इससे पहले ही पंचायत चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है. पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश ने भी हाल में कहा था कि पंचायत चुनाव समय पर कराने की कोशिश की जा रही है. चुनाव की तारीखों से पहले पंचायतों के नए सिरे से गठन की प्रक्रिया पूरी होगी.

2011 की जनगणना से तय होगा पंचायतों का नया नक्शा

अगले पंचायत चुनाव में 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा. आबादी के हिसाब से पंचायतों और वार्डों का गठन किया जाएगा. यानी किस पंचायत में कितनी आबादी है, इसके आधार पर उसके क्षेत्र और वार्डों की संख्या तय की जा सकती है.

इस परिसीमन के बाद कई पंचायतों की सीमाएं बदल सकती हैं. कुछ पंचायतों में नए वार्ड जुड़ सकते हैं, जबकि कुछ जगहों पर पंचायतों का नया गठन भी हो सकता है. इसका सीधा असर मुखिया और दूसरे पंचायत पदों की संख्या पर पड़ेगा.

8 हजार से बढ़कर करीब 13 हजार हो सकते हैं मुखिया के पद

फिलहाल बिहार में करीब 8053 मुखिया के पद हैं. नई आबादी के हिसाब से पंचायतों का गठन होने के बाद इन पदों की संख्या बढ़ सकती है. इसके करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. अगर ऐसा होता है तो पंचायत चुनाव में मुखिया बनने के लिए दावेदारों की संख्या भी काफी बढ़ सकती है. गांवों में अभी से संभावित उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर सकते हैं.

मुखिया का चुनाव लड़ने के लिए उम्र कितनी होनी चाहिए?

अगर आप बिहार पंचायत चुनाव में मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उम्र की शर्त जानना जरूरी है. मुखिया पद के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए. 21 साल से कम उम्र का व्यक्ति बिहार में मुखिया का चुनाव नहीं लड़ सकता. यानी नामांकन के समय उम्मीदवार की उम्र 21 साल या उससे ज्यादा होना जरूरी है.

पंचायत की वोटर लिस्ट में नाम होना जरूरी

मुखिया या पंचायत के किसी दूसरे पद का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार का नाम संबंधित पंचायत की मतदाता सूची में होना चाहिए. इसके साथ ही उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना भी जरूरी है. इसलिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों को सबसे पहले अपनी वोटर लिस्ट में नाम और दूसरी जरूरी जानकारी की जांच कर लेनी चाहिए.

सरकारी नौकरी करने वाले लोग नहीं लड़ सकते चुनाव

सरकारी कर्मचारी रहते हुए पंचायत चुनाव नहीं लड़ा जा सकता. पंचायत के अधीन लाभ का पद रखने वाले लोगों पर भी चुनाव लड़ने की रोक हो सकती है. इसके अलावा कुछ सरकारी सहायता पाने वाले संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारी भी पद पर रहते हुए चुनाव नहीं लड़ सकते. अगर ऐसा व्यक्ति पंचायत चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे पहले संबंधित पद छोड़ना होगा.

मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता

ऐसा व्यक्ति जिसे सक्षम अदालत ने मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित किया है, वह पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता. चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार का कानूनी रूप से पात्र होना जरूरी है.

गंभीर अपराध के मामले में तय सजा पाने वाले व्यक्ति पर पंचायत चुनाव लड़ने की रोक लग सकती है. यानी किसी उम्मीदवार के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले में निर्धारित सजा होने पर उसकी चुनाव लड़ने की पात्रता प्रभावित हो सकती है. किस मामले में कितनी सजा के बाद अयोग्यता लागू होगी, यह संबंधित चुनाव कानून और नियमों पर निर्भर करता है.

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रिजर्व्ड सीट के लिए अलग पात्रता जरूरी

अगर मुखिया की सीट किसी खास वर्ग के लिए आरक्षित है तो उस सीट पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को संबंधित वर्ग की पात्रता पूरी करनी होगी. यानी सामान्य सीट और आरक्षित सीट के लिए नियम एक जैसे नहीं होते. आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने से पहले उम्मीदवार को यह देखना होगा कि वह उस वर्ग के लिए तय शर्तों को पूरा करता है या नहीं.

2011 की जनगणना के आधार पर होने वाला पंचायतों का नया गठन अगले चुनाव में बड़ा बदलाव ला सकता है. पंचायतों और वार्डों की संख्या बदलने के साथ मुखिया के पद भी बढ़ सकते हैं. ऐसे में 2026 का पंचायत चुनाव बिहार के गांवों में पहले के मुकाबले ज्यादा बड़ा चुनाव बन सकता है.

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परितोष शाही

लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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