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बिहार के औरंगाबाद में नक्सलियों के 15 वॉकी-टॉकी और चाइनीज ड्रोन बरामद, आंख जांच करने वाली मशीन भी जब्त

बिहार के औरंगाबाद में नक्सलियों के ठिकानों पर छापेमारी की गयी तो दर्जन भर से अधिक वॉकी-टॉकी और चाइनीज ड्रोन बरामद हुए. आंख जांच करने वाली मशीन भी मिली.

Bihar: औरंगाबाद के मदनपुर प्रखंड के जंगलीतटीय इलाकों में सर्च अभियान चला रहे सुरक्षा बलों पर नक्सली हमले की साजिश एकबार फिर से विफल कर दी गयी. इस कार्रवाई में मोटोरोला के 15 सेट वॉकी-टॉकी, एक विदेशी ड्रोन, नक्सल साहित्य, आंख जांचने के उपकरण के अलावा अन्य सामान बरामद किये गये हैं. सोमवार को एसपी कांतेश कुमार मिश्र ने प्रेस कांफ्रेंस करके इसका खुलासा किया.

सुरक्षा बलों पर हमला करने की थी तैयारी

औरंगाबाद एसपी ने प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि पुलिस को ये सूचना मिली की मदनपुर थाना क्षेत्र के डोभा कस्मर स्थान, बंदी मोरवा, विदाई नगर, निमिया बथान व आसपास के क्षेत्रों में नक्सलियों की ओर से सुरक्षा बलों पर हमला करने की तैयारी की जा रही है. सूचना के बाद कोबरा 205 के समादेष्टा व उनके संयुक्त निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक अभियान मुकेश कुमार और 205 के उप समादेष्टा संजय बेलाल के संयुक्त नेतृत्व में कोबरा के साथ-साथ सीआरपीएफ 47 वाहिनी तथा स्थानीय टीम की ओर से तीन सितंबर को इलाके में संयुक्त सर्च अभियान चलाया गया.

बरामद सामग्री

इस अभियान में दवाई, खाने-पीने के सामान, काले रंग की नक्सली वर्दी, 14 मीटर काला कपड़ा, हर दिन उपयोग होने वाले सामान, 70 की संख्या में नक्सल बैज को बरामद कर उसी जगह पर नष्ट कर दिया गया. इस क्रम में एक चाइनिज ड्रोन,15 पीस मोटोरोला के वॉकीटॉकी, नक्सल साहित्य और आंख जांचने की मशीन कीट के साथ बरामद हुए. इस मामले से संबंधित प्राथमिकी चार सितंबर को मदनपुर थाने में दर्ज करायी गयी है. इसमें 11 नक्सलियों को नामजद और 10 से 15 अज्ञात नक्सलियों को आरोपित बनाया गया है. एसपी ने कहा कि लगातार हो रही कार्रवाई से नक्सलियों का मनोबल गिर गया है. बहुत जल्द नक्सली गतिविधियों पर सौ प्रतिशत अंकुश लग जायेगा.

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नक्सली दस्ते में डॉक्टर की भी मौजूदगी

तीन सितंबर को मदनपुर के नक्सल इलाके में छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में मेडिसिन यानी दवाइयों के साथ-साथ आंख जांचने वाली नियरविजन टेस्ट कीट बरामद किया जाना नक्सलियों की सुदृढ़ता को दर्शाता है. जाहिर है कि जब दवाई के साथ आंख जांचने वाली मशीन मिलेगी, तो स्पष्ट है कि नक्सलियों के दस्ते में डॉक्टर की भी मौजूदगी होगी. चाहे वह झोला छाप डॉक्टर ही क्यों न हो. स्पष्ट है कि जब किसी नक्सली की आंख में परेशानी होगी, तो साथ में रहे डॉक्टर उसकी जांच कर उसे चश्मा उपलब्ध करा देगा. विभिन्न प्रकार के लेंस पाये जाने के बाद समझा, तो यही जा रहा है कि नक्सलियों के पास किसी भी परिस्थिति में रहने और लड़ने के तमाम सामान मौजूद थे.

चाइनिज ड्रोन का करते थे इस्तेमाल

नक्सल प्रभावित इलाके से पहली बार चाइनिज ड्रोन मिलना नक्सलियों के खतरनाक संकेत को उजागर करता है. कैसे नक्सलियों के पास ड्रोन पहुंचा और ड्रोन का उपयोग किन वजहों से और कैसे करते थे, यह एक सवाल है. माना जा रहा है कि चाइनिज ड्रोन से नक्सली पुलिस के साथ-साथ इलाके की गतिविधियों को भांपने में लगे थे. हो सकता है कि नक्सलियों के पास और ड्रोन हो.

सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए वॉकीटॉकी

दूसरी बात यह है कि 15 की संख्या में जो वॉकीटॉकी बरामद किया गया है, उससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि नक्सलियों ने अपने सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए किस कदर अपनी तैयारियों का इंतजाम किया. वैसे वाकीटॉकी बहुत ही मंझे हुए नक्सलियों को दिया जाता था. सूत्रों से पता चला कि नक्सलियों की गतिविधियों को मजबूत बनाने में वाॅकीटॉकी एक बड़ा हथियार बन गया था. एसपी ने बताया कि बरामद ड्रोन की फॉरेंसिक जांच करायी जायेगी.

Posted By: Thakur Shaktilochan

Prabhat Khabar Digital Desk
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