Bhagalpur, कल मनेगा महर्षि मेंहीं परमहंसजी महाराज का परिनिर्वाण दिवस
Published by : MANISH KUMAR Updated At : 16 May 2026 11:30 AM
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कुप्पाघाट आश्रम में होगा विविध आयोजन
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भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट,
महर्षि मेंहीं परमहंस का परिनिर्वाण दिवस 17 मई (हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह) को है. इसे लेकर अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा की ओर से कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम में तैयारी पूरी कर ली गयी है. हालांकि इस बार सबसे बड़ी चिंता की बात है कि विक्रमशिला पुल क्षतिग्रस्त होने से कुप्पाघाट आश्रम में सत्संगियों की संख्या आधे से भी कम हो गयी. ऐसे में रौनक कम हो गयी. महासभा के मंत्री राम कुमार ने बताया कि परिनिर्वाण दिवस पर विविध आयोजन पुष्पांजलि, भंडारा, सत्संग-प्रवचन का आयोजन होगा. अबतक सैकड़ों श्रद्धालुओं का अब तक जुटान हो जाता था, लेकिन इस बार पूर्वी बिहार, झारखंड व अन्य प्रांतों के श्रद्धालु पहुंच रहे है. कुप्पाघाट आश्रम से कोसी-सीमांचल क्षेत्र नवगछिया, पूर्णिया, मधेपुरा, अररिया, सुपौल, खगड़िया, किशनगंज, कटिहार आदि से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, लेकिन इस बार पुल बाधक है. फिर भी कई श्रद्धालु नाव व जहाज से भी पहुंच रहे हैं. आयोजन को लेकर संरक्षक पूर्व डीएसपी कृष्णबल्लभ यादव, रमेश बाबा, रवींद्र बाबा, पंकज बाबा, अमित कुमार आदि लगे हैं.देशभर के 30 साधक कर रहे ध्यानाभ्यास
स्वामी सत्यप्रकाश बाबा ने बताया कि आश्रम से जुड़े संत महापरिनिर्वाण दिवस को लेकर आश्रम पहुंच चुके हैं. खासकर गुरुसेवी भगीरथ दास महाराज, गुरुचरण सेवी प्रमोद बाबा, गुरुनंदन बाबा, गुरु प्रसाद बाबा, अनिलानंद बाबा, कृष्णबल्लभ बाबा आदि पहुंच चुके हैं. साधक के रूप में 30 सत्संगी देशभर के पहुंचे हैं, जिनका ध्यानाभ्यास चल रहा है.महर्षि मेंहींजी ने कबीर के दोहे का पाठ कर ली थी आखिरी सांस
पंकज बाबा एवं संजय बाबा ने बताया कि 101 वर्ष तक इस धरा धाम पर जीवित रहने वाले संत सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस का परिनिर्वाण दिवस कुप्पाघाट भागलपुर में मनाया जायेगा. 8 जून 1986 रविवार को महर्षि मेंहीं परमहंस ने अपना पार्थिव शरीर का त्याग किया था. शरीर छोड़ने के दिन महर्षि मेंहीं परमहंस ने गुरुसेवी भगीरथ दास जी महाराज के हाथों से मूंग की घुघनी ग्रहण किया था. अंतिम समय में महर्षि मेंहीं परमहंस ने कहा था- सुकिरत कर ले नाम सुमिर ले को जानै कल की जगत में खबर नहीं पल की. कबीर साहब की इन वचनों को बोलते हुए अंतिम सांस लिए. 28 अप्रैल 1885 मंगलवार को महर्षि मेहीं परमहंस का जन्म नाना के घर मधेपुरा स्थित खोखशी श्याम गांव में हुआ था.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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