Bhagalpur news सेफ्टी टैंक में दम घुटने से तीन मजदूरों की मौत

नवगछिया प्रखंड के खैरपुर कदवा में सेफ्टी टैंक की सेटरिंग खोलने के दौरान दम घुटने से तीन मजदूरों की मौत हो गयी.
नवगछिया प्रखंड के खैरपुर कदवा में सेफ्टी टैंक की सेटरिंग खोलने के दौरान दम घुटने से तीन मजदूरों की मौत हो गयी. मृतकों की पहचान खैरपुर कदवा के राजमिस्त्री अच्छेलाल मंडल का पुत्र बमबम मंडल, पूरण मंडल का पुत्र जयनंदन मंडल दोनों चचेरा भाई, तीसरा लक्ष्मीनिया के स्व कल्लर मंडल का पुत्र श्रीलाल मंडल मंडल के रूप में की गयी है. गांव के ही ज्वाला यादव का पुत्र मिथुन यादव भवन निर्माण करवा रहे थे. निर्माण कार्य एक महीने से चल रहा था. शौचालय के सैफ्टी टैंक 21 दिन पहले बनवाया था. सेफ्टी टैंक का सेटरिंग खोला जा रहा था. इस दौरान तीनों व्यक्ति टैंक के अंदर प्रवेश किये. टैंक के भीतर जहरीली गैस का रिसाव हो गया या ऑक्सीजन की कमी हो गयी, जिससे एक-एक कर तीनों मजदूर बेहोश हो गये.
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद तीनों को टैंक से बाहर निकाला. तब तक उनकी हालत काफी गंभीर हो चुकी थी. आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए अनुमंडल अस्पताल नवगछिया लाया गया. चिकित्सक ने जांच करने के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने व मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गयी है. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज घटना के कारणों की जांच की जा रही है.
सेफ्टी टैंक बना मौत का कुआं, एक साथ तीन परिवार उजड़ गये
खैरपुर कदवा में सैफ्टी टैंक की सेंटरिंग खोलने के दौरान हुए हादसे में एक साथ तीन परिवार उजड़ गये. यह एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही और जानकारी के अभाव में तीन परिवारों के उजड़ने की कहानी है. ज्वाला यादव अपने सपनों का घर बनाने के लिए ढाई कट्टा जमीन बेच कर निर्माण कार्य करा रहे थे. एक महीने से निर्माण कार्य चल रहा था. 31 मार्च को बाथरूम के लिए सैफ्टी टैंक की ढलाई की गयी थी. बुधवार की सुबह सेंटरिंग खोलने का काम शुरू हुआ, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह काम जानलेवा साबित होगा.सबसे पहले मजदूर जयनंदन मंडल टैंक के अंदर उतरे. जहरीली गैस से वह तुरंत बेहोश हो गये. उन्हें बचाने श्रीलाल मंडल अंदर गये, लेकिन वह भी बेहोश हो गये. इसके बाद मिस्त्री बमबम मंडल खुद नीचे उतरे और वह भी उसी गैस की चपेट में आकर अचेत हो गये. घटना के बाद कोई अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था. ऐसे में साहस दिखाते हुए गांव के गुलशन मंडल और कन्हैया मंडल रस्सी बांध कर अंदर उतरे और एक-एक कर तीनों को बाहर निकाला. इस दौरान कन्हैया मंडल की हालत बिगड़ गयी, हालांकि समय पर प्राथमिक उपचार मिलने से उनकी जान बच गयी.
प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है. पंचायत स्तर पर भी अंतिम संस्कार के लिए सहायता राशि देने की बात कही गयी है. सवाल अब भी बाकी है- क्या इन जिंदगियों की कीमत सिर्फ मुआवजा है, या फिर ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जायेंगे ?मृतक के परिजनों को दिया जायेगा मुआवजा
नवगछिया भूमि सुधार उपसमाहर्ता सह प्रभारी अनुमंडल पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि मृतक के परिजनों को आपदा विभाग, श्रम विभाग व कल्याण विभाग से मिलने वाला मुआवजा दिलवाया जायेगा. पंचायत के मुखिया पंकज जायसवाल ने बताया कि मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत राशि उपलब्ध करवायी जायेगी.
सैप्टिक टैंक खोलने के दौरान दम घुटने से दो मजदूर की हुई थी मौत
गोपालपुर सैदपुर गांव में सितंबर 2022 में शौचालय का सेप्टिक टैंक (टंकी) खोलते समय जहरीली गैस से दम घुटने से दो मजदूरों की मौत हो गयी थी. शटरिंग हटाने के लिए मिस्त्री राजीव कुमार पंडित सबसे पहले शटरिंग खोलने नीचे उतरे थे. थोड़ी देर तक ऊपर नहीं आने पर मजदूर मनोहर पंडित नीचे गये. इस तरह मजदूर सिंटू शर्मा भी नीचे उतरे, लेकिन किसी के ऊपर नहीं आने पर अनहोनी की आशंका पर ग्रामीणों ने तीनों को छड़ के सहारे ऊपर लाया गया. मिस्त्री राजीव पंडित व मजदूर सिंटू शर्मा की मौत दम घुटने से टैंक में ही हो गयी थी और मजदूर मनोहर की हालत गंभीर हो गयी थी. इलाज के बाद मजदूर मनोहर की जान बच गयी थी.बिना सुरक्षा उपाय के कार्य करना खतरनाक
नवगछिया इन दिनों सैफ्टी टैंक खोलने के दौरान मजदूरों की लगातार हो रही मौत चिंता का विषय बन गया है. बिना सुरक्षा उपाय के इस तरह का कार्य करना जान जोखिम में डालना है. विशेषज्ञों के अनुसार सेफ्टी टैंक, कुआं या अन्य बंद जगहों में मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैस जमा हो जाती है. यह गैस कुछ ही सेकेंड में व्यक्ति को बेहोश कर सकती हैं और समय पर बाहर नहीं निकालने पर मौत भी हो सकती है.इस तरह की एहतियात बरतें :
टैंक खोलने से पहले उसे पूरी तरह वेंटिलेट (हवादार) किया जाये. ढक्कन खोलकर कुछ समय तक खुला छोड़ दें, ताकि गैस बाहर निकल सके. बिना जांच के कभी भी सीधे टैंक में प्रवेश न करें. गैस की मौजूदगी की जांच जरूरी है. टैंक में उतरने वाले व्यक्ति को सेफ्टी बेल्ट और मजबूत रस्सी से बांधना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में तुरंत बाहर निकाला जा सके. काम के दौरान मास्क, ऑक्सीजन सिलिंडर या गैस प्रोटेक्शन उपकरण का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाये. टैंक के बाहर कम से कम दो-तीन लोग निगरानी के लिए मौजूद रहें. किसी के बेहोश होने पर बिना सुरक्षा के दूसरा व्यक्ति अंदर न जाए .स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से मजदूरों को समय-समय पर प्रशिक्षण देना चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हादसों को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए और निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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