पूर्व बिहार में भगवान भरोसे महिलाओं का इलाज, कहीं एएनएम तो कहीं आयुष चिकित्सक कर रहे हैं उपचार
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 12 Jun 2022 2:11 PM
कोसी-पूर्व बिहार के सदर अस्पताल हों या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, हर जगह डॉक्टरों की भारी कमी है. उसमें भी महिला चिकित्सक तो कई पीएचसी में हैं ही नहीं. स्थिति यह है कि कहीं आयुष चिकित्सक तो कहीं एएनएम इलाज कर रहे हैं.
बांका जिले की आबादी करीब 25 लाख है. जिसमें महिला की आधी आबादी है. यानी इतनी बड़ी महिला जनसंख्या के बावजूद यहां महज 19 महिला चिकित्सक ही कार्यरत हैं. जिले के सभी सभी अस्पताल महिला चिकित्सक की कमी से जूझ रहा है. नतीजतन महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना मुमकिन नहीं हो पाता है. विभागीय आंकड़े के देखें तो जिले में 237 चिकित्सक के पद सृजित हैं. जिसमें 116 पद पर चिकित्सक कार्यरत हैं. जबकि 119 पद लंबे समय से रिक्त पड़ा हुआ हैं. इन 116 कार्यरत चिकित्सकों में 19 महिला चिकित्सक भी शामिल हैं. जिले के प्रमुख अस्पताल सदर अस्पताल की बात करें तो यहां जिले भर के मरीज आते हैं और स्वाभविक तौर पर मरीजों की भीड़ भी सर्वाधिक यहीं बनी रहती हैं.
यहां चिकित्सक के 38 पद सृजिद हैं. जिसमें तीन महिला समेत 15 चिकित्सक कार्यरत हैं. जिले के सबसे बड़े अस्पताल में भी 23 चिकित्सक के पद रिक्त पड़े हुये हैं. मानक के अनुसार यहां भी महिला चिकित्सकों की संख्या करीब 10 होनी ही चाहिए, लेकिन है तीन. जिले में अमरपुर, कटोरिया व बौंसी रेफरल अस्पताल है. अमरपुर व कटोरिया में महिला चिकित्सक है. लेकिन, बौंसी में एक भी महिला चिकित्सक नहीं है जो चिंता की बात है. उधर बेलहर, बौंसी व रजौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी महिला चिकित्सक नही है. साथ ही स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की यहां घोर कमी है.
जमुई. जिले के सभी अस्पतालों में 16 महिला चिकित्सक में से 10 कार्यरत हैं. जिनके द्वारा प्रसव सहित महिलाओं के अन्य बीमारी का इलाज किया जा रहा है . वर्तमान में जिले की आबादी 19 लाख है .इतनी बड़ी आबादी में महिलाओं के प्रसव सहित अन्य व्यवस्था को लेकर 16 रिक्ति में से मात्र 10 महिला चिकित्सक ही कार्यरत हैं. ऐसे में परेशानी होना अनिवार्य है .यही कारण है कि प्रतिदिन अस्पताल से महिलाओं को रेफर किया जा रहा है. सरकार सुरक्षित प्रसव, मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर कई उपाय कर रखी है. कई कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं .लेकिन जरूरत के हिसाब से जब डॉक्टर ही नहीं हो तो व्यवस्था का लाभ मिल पाएगा.
लखीसराय जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञ की घोर का घोर अभाव है. जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों के कुल 10 पद सृजित हैं. जिसमें मात्र चार पद पर ही स्त्री रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं. शेष पद खाली हैं या फिर उक्त पद के लिए चयनित चिकित्सक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित चल रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञ के कुल 10 पद सृजित हैं, जिसमें दो पद सदर अस्पताल में तथा शेष अन्य सात पीएचसी में तथा एक रेफरल अस्पताल बड़हिया के लिए सृजित हैं, लेकिन इनमें से सदर अस्पताल में दो पदों पद चिकित्सक तैनात हैं. जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञ की भारी कमी की वजह से जिले के पीएचसी व सीएचसी में महिलाओं का इलाज स्थानीय एएनएम या पुरुष चिकित्सक के द्वारा किया जाता है या फिर उन्हें सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है.
सहरसा . जहां एक तरफ महिलाओं के उत्थान के लिए सरकार के द्वारा कई योजनाएं चलायी जा रही है. वही महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति कोई खास व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थिति यह है कि जिले में महिलाओं के इलाज के लिए पूरे जिले में मात्र छह महिला चिकित्सक पदस्थापित है. जानकारी के अनुसार कोसी का प्रमंडलीय अस्पताल कहे जाने वाले सदर अस्पताल में स्वीकृत छह पद के विरूद्व पांच महिला चिकित्सक पदस्थापित है. जानकारी के अनुसार जिले में महिलाओं की जनसंख्या नौ लाख से अधिक है. ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि महिलाओं को अपने इलाज के लिए कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता होगा.i
पूर्णिया. पूर्णिया जिले के अधिकांश पीएचसी में गायनेकोलॉजिस्ट का अभाव है. हालांकि प्रशिक्षित एएनएम टेलीमेडिसीन के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाओं को आवश्यक सहयोग करती हैं. हालांकि गायनेकोलॉजिस्ट की कमी के कारण गंभीर प्रसूता को रेफर करने की नौबत रहती है. पूर्णिया में जीएमसीएच में मॉडल लेबर रूम की व्यवस्था है. जबकि स्त्री रोग विशेषज्ञ भी ओपीडी और इपीडी में मौजूद रहती हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीनगर में एक महिला डॉक्टर का सृजित पद है परंतु अभी तक महिला डॉक्टर का पद खाली है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवानीपुर में गायनोलॉजिस्ट के नहीं रहने से प्रसव कराने आयी महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
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खगड़िया. जिले के अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी महिला चिकित्सक व्यवस्था नहीं है. महिला मरीजों को पुरूष चिकित्सक द्वारा इलाज किया जाता है. जबकि प्रसव पीड़ा से कराह रही महिलाएं एएनएम के भरोसे है. सदर अस्पताल में महिला चिकित्सक के छह स्वीकृत पद में से मात्र दो महिला चिकित्सक पदस्थापित है. जबकि दो महिला चिकित्सक को प्रतिनियुक्ति पर रखा गया है. सदर अस्पताल में भी मात्र चार महिला चिकित्सक प्रतिदिन लगभग दो सौ महिला मरीजों का इलाज कर रही है. रेफरल अस्पताल गोगरी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेलदौर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परबत्ता, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानसी में एक भी महिला चिकित्सक पदस्थापित नहीं है.
अररिया. जिला की चिकित्सा व्यवस्था भगवान भरोसे है. 199 स्वीकृत चिकित्सक पद की जगह जिला में मात्र 72 चिकित्सक ही मौजूद हैं. 30 लाख आबादी वाले इस जिला को मात्र 72 डॉक्टरों के भरोसे छोड़ दिया गया है. इनमें 65 पुरुष व 07 महिला चिकित्सक पदस्थापित हैं. जिला के एक मात्र सदर अस्पताल में 08 महिला चिकित्सक का पद सृजित है .जिसमें से मात्र 02 महिला चिकित्सक हैं पदस्थापित. जिला के दो रेफरल हॉस्पिटल जोकीहाट व रानीगंज में आयुष चिकित्सक से लिया जा रहा कार्य. वहीं जिला के दो सीएचसी में एक भी महिला चिकित्सक नहीं है. जिला के 07 पीएचसी व 34 एपीएचसी में 05 महिला चिकित्सक कार्यरत हैं.
कटिहार. कहने को तो जिले में 19 महिला चिकित्सक है. इसमें मात्र तीन महिला चिकित्सक सिर्फ सदर अस्पताल में सिजेरियन करती है. सदर अस्पताल में 9 महिला चिकित्सक मौजूद है. जिसमें तीन महिला चिकित्सक ही गंभीर अवस्था में डिलीवरी मरीजों का सिजेरियन करती है. पीएससी में कहीं भी विशेषज्ञ महिला चिकित्सक पदस्थापित नहीं है. बरारी पीएचसी व रेफरल अस्पताल में महिला चिकित्सक का पद वर्षों से खाली है. Prabhat Khabar App: देश-दुनिया, बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस अपडेट, क्रिकेट की ताजा खबरे पढे यहां. रोजाना की ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए प्रभात खबर ऐप.
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