Flood in Bihar: सहरसा-मानसी रेलखंड पर संकट के बादल, घरों में घुसा बाढ़ का पानी, तटबंध पर लोगों ने बनाया आशियाना

Flood in Bihar: सहरसा / सुपौल / कटिहार / खगड़िया : नेपाल की तराई में बारिश का असर सहरसा में देखने को मिल रहा है. सहरसा-मानसी रेलखंड पर ट्रेन परिचालन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. धमारा घाट स्टेशन पानी से घिर गया है. वहीं, सहरसा के नवहट्टा में बाढ़ का पानी निचले इलाकों में आने के कारण माल-मवेशी लेकर दर्जनों परिवारों ने कोसी पूर्वी तटबंध पर आशियाना बना लिया है. जबकि, सुपौल के सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है. घरों में पानी घुसने से भोजन-पानी के लाले पड़ने लगे हैं. कटिहार में महानंदा खतरे के निशान से 93 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. वहीं, निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से परेशानी बढ़ गयी है.
Flood in Bihar: सहरसा / सुपौल / कटिहार / खगड़िया : नेपाल की तराई में बारिश का असर सहरसा में देखने को मिल रहा है. सहरसा-मानसी रेलखंड पर ट्रेन परिचालन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. धमारा घाट स्टेशन पानी से घिर गया है. वहीं, सहरसा के नवहट्टा में बाढ़ का पानी निचले इलाकों में आने के कारण माल-मवेशी लेकर दर्जनों परिवारों ने कोसी पूर्वी तटबंध पर आशियाना बना लिया है. जबकि, सुपौल के सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है. घरों में पानी घुसने से भोजन-पानी के लाले पड़ने लगे हैं. कटिहार में महानंदा खतरे के निशान से 93 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. वहीं, निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से परेशानी बढ़ गयी है.
नेपाल की तराई में हो रही लगातार बारिश के कारण सहरसा-मानसी रेलखंड पर ट्रेनों के परिचालन बंद होने की संभावना बनती जा रही है. मंगलवार को नेपाल की ओर से 3.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण पानी का दबाव एक से दो दिनों में धमारा घाट और आसपास के स्टेशनों के पास देखा जा सकता है.
इधर, रेलवे की ओर से ट्रेनों के परिचालन को लेकर लगातार पैनी निगाह रखी जा रही है. समस्तीपुर-हयाघाट के साथ ही सहरसा-मानसी रेलखंड पर रेलवे ट्रैक पर गश्ती बढ़ा दी गयी है. पीडब्लूआइ के साथ अभियंत्रण विभाग के वरीय अधिकारी जलस्तर की लगातार मॉनीटरिंग कर रहे हैं. खबर प्रेषण तक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ना जारी था. रेल पुल के गर्डर के करीब बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है.
कोसी नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी होने के कारण सहरसा-मानसी रेलखंड का धमारा घाट स्टेशन पानी से घिर गया है. हालांकि, अभी रेलवे ट्रैक से पानी नीचे रहने के कारण ट्रेनों के परिचालन पर असर नहीं हुआ है. सूत्रों की मानें तो यहां नेपाल से छोड़े जानेवाले पानी पर लगातार नजर रखी जा रही है. इससे आपात स्थिति पर परिचालन पर त्वरित निर्णय किया जा सके. समस्तीपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सरस्वतीचंद्र ने बताया कि रेल मंडल के विभिन्न रेलखंड के पास से गुजरनेवाली नदियों और रेलवे पुलों पर लगातार नजर रखी जा रही है. रात्रि गश्ती बढ़ा दी गयी है. नेपाल से आनेवाले पानी पर भी नजर रखी जा रही है.
सहरसा जिले की कैदली पंचायत के सैकड़ों परिवार के घर में बाढ़ का पानी चले जाने के कारण लोगों का जनजीवन तबाह हो रहा है. लोगों ने जहां छोटे-छोटे बच्चे को अपने रिश्तेदार के यहां भेज दिया है. वहीं, माल-मवेशी को लेकर कोसी पूर्वी तटबंध पर पलायन को विवश हो गये हैं. कोसी पूर्वी तटबंध पर पंचायत के दर्जनों परिवार अपनी झुग्गी-झोपड़ी लगा कर माल मवेशी को लेकर जीवन व्यतीत करने लगे हैं.
बाढ़ पीड़ित परिवारों का कहना है कि तटबंध के अंदर जलस्तर की स्थिति जब तक सामान्य नहीं होगी, घर-आंगन से पानी नहीं निकलेगा, तब तक वे माल-मवेशी को लेकर कोसी पूर्वी तटबंध पर ही रहेंगे. ऐसे परिवार को ना खाना बनाने की कोई सुविधा नहीं है और ना ही अब तक किसी जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन की ओर से खाने-पीने की कोई मदद मिली है. सिर्फ लोगों से उम्मीदें बची है कि एक वक्त का खाना कोई पहुंचा दे, तो वह अपना समय किसी तरह इस दुख की घड़ी में बिता लें. वहीं, प्रशासनिक अधिकारी से उन बाढ़ पीड़ित परिवारों का जो कोसी पूर्वी तटबंध पर अपने माल मवेशी को लेकर रह रहे हैं, उन्हें मदद की आस है.
मानसून काल में कोसी नदी के जलस्तर में मंगलवार को वर्ष का सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गयी. हालांकि, नदी के जलस्तर में कमी आने लगी है. लेकिन, दो दिनों तक बराह क्षेत्र व कोसी बराज से भारी डिस्चार्ज के कारण तटबंधों के बीच पानी का फैलाव जारी है. इससे तटबंध के भीतर बसे लाखों की आबादी के सामने मुश्किलें खड़ी हो गयी हैं. सदर प्रखंड की बाढ़ प्रभावित पंचायत बलवा, घूरण, बसबिट्टी, तेलवा, गोपालपुर सिरे सहित दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया. कई गांवों में नदी का तेज कटाव भी शुरू हो गया है. बाढ़ व कटाव के कारण कोसी पीड़ितों में हड़कंप है. घर-आंगन में कोसी का पानी प्रवेश कर जाने के कारण बड़ी संख्या में बाढ़ पीड़ित ऊंचे व सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं. नदी में पानी बढ़ने की संभावना के मद्देनजर प्रशासन द्वारा ध्वनि विस्तारक यंत्र से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को अलर्ट किया गया था. लेकिन, हकीकत है कि अल्टीमेटम के बावजूद अधिकतर बाढ़ पीड़ित बाहर निकलने के बजाय अब भी अपने गांव में ही बने हुए हैं.
तटबंध के भीतर बसे लोग बाढ़ के दौरान कई प्रकार की समस्या से जूझ रहे हैं. तटबंध के भीतर चहुंओर कोसी का पानी फैल चुका है. किसानों की फसल डूब चुकी हैं. कोरोना काल में पहले से पीड़ितों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या बनी हुई थी. इस बीच कोसी में बाढ़ आ जाने से पीड़ितों का दुख-दर्द दोगुना हो गया. पानी बढ़ने के बाद प्रभावित क्षेत्र से खास कर बच्चे और बुजुर्गों को बाहर निकाला जा रहा है. वहीं, पानी बढ़ने के बाद प्रभावित क्षेत्र में कई बाढ़ पीड़ितों ने अपने परिवार व बच्चे के साथ अपने घरों के छप्पड़ पर शरण ले रखा है. बाढ़ की वजह से प्रभावित इलाके के लोगों के घरों में पानी प्रवेश करने के कारण उनके कपड़े, अनाज, जलावन, चूल्हे व अन्य सामग्रियां भीग चुकी हैं. जिस कारण भोजन तैयार करना भी मुश्किल हो रहा है. बताया कि सरकार तटबंध पर बसने के बाद उनलोगों को भोजन मुहैया करायेगी. लेकिन, पूरे परिवार को लेकर तटबंध पर बसना उनलोगों के लिए कठिन है. पानी कम होने के बाद उनलोगों को फिर से अपने गांव घर लौटना ही होगा. लिहाजा कोरोना काल में वे लोग कष्ट में भी अपने घर परिवार के साथ मजबूरन रह रहे हैं.
जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में बुधवार को रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच महानंदा नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गयी है. हालांकि, गंगा एवं कारी कोसी नदी के जलस्तर में मामूली कमी आयी है. दूसरी तरफ कोसी व बरंडी नदी अभी शांत है. महानंदा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से आसपास के इलाके में बाढ़ का पानी फैलने लगा है. खासकर कदवा, आजमनगर, बारसोई, बलरामपुर, प्राणपुर, डंडखोरा आदि प्रखंडों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है. अमदाबाद प्रखंड में भीषण कटाव हो रहा है. इस प्रखंड में कई घर नदी में समा चुका है. इस बीच, महानंदा नदी दुर्गापुर में खतरे के निशान से 93 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. यह नदी झौआ में 67 सेंटीमीटर ऊपर है. जबकि, आजमनगर व धबौल में महानंदा नदी क्रमशः 68 व 69 सेंटीमीटर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. नदी के जलस्तर में वृद्धि से सैकड़ों एकड़ में लगी धान का फसल डूब चुकी हैं. दूसरी तरफ कई क्षेत्रों में आवागमन की समस्या उत्पन्न हो गयी है. कुछ क्षेत्रों में तो नाव के सहारे लोग आवाजाही कर रहे हैं. लेकिन, अब भी ऐसे क्षेत्र बचे हुए है, जहां लोगों के समक्ष आवागमन की समस्या है.
कोसी व बागमती नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी है. बीते 24 घंटे के दौरान कोसी एवं बागमती नदी के जलस्तर में 12 सेमी की वृद्धि हुई है. पहले से ही खतरे के निशान से 1.21 मीटर ऊपर बह रही कोसी के जलस्तर में लगातार हो रही है. जलस्तर में वृद्धि से बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है. कोसी में बढ़ रहे पानी से लोगों में दहशत है. वहीं, बागमती नदी के जलस्तर में एक बार फिर वृद्धि दर्ज की गयी है. 21 जुलाई को बागमती का पानी स्थिर बताया गया था. लेकिन, 22 जुलाई को इस नदी का पानी बढ़ा है. 24 घंटे में 12 सेमी पानी बागमती में बढ़ने की जानकारी प्रभारी जिला जनसंपर्क पदाधिकारी द्वारा दी गयी है. वहीं, कई दिनों से घट रहे बूढ़ी गंडक के जलस्तर में भी वृद्धि हुई है. हालांकि, बीते 24 घंटे में महज एक सेमी बूढ़ी गंडक नदी में पानी बढ़ा है. अच्छी खबर यह है कि गंगा में पानी का घटना लगातार जारी है. बताया गया कि बीते 24 घंटे में 10 सेमी पानी घटा है.
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