जब बाबा अजगैवीनाथ धाम पहुंचे थे पृथ्वीराज कपूर, 74 साल पुराना हस्तलिखित संदेश आज भी है सुरक्षित
हस्तलिखित संदेश और पुजारी
जानें कैसे भारतीय सिनेमा के दिग्गज पृथ्वीराज कपूर और शम्मी कपूर ने बाबा अजगैवीनाथ धाम में आस्था जताई. 74 साल पुराना हस्तलिखित संदेश आज भी पंडा परिवार के पास सुरक्षित है, जो उनकी गहरी आस्था का प्रतीक है.
श्रावणी मेला के gaदौरान हर वर्ष लाखों शिवभक्त उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर प्रस्थान करते हैं. इस पावन यात्रा में साधारण श्रद्धालु से लेकर देश की बड़ी-बड़ी हस्तियां, उद्योगपति और प्रशासनिक अधिकारी सुलतानगंज पहुंचते हैं. बाबा अजगैवीनाथ के दरबार में पहुंचते ही सभी की एक ही पहचान रह जाती है—'कांवरिया'. अजगैवीनाथ मंदिर की इसी गौरवशाली और सर्वसमावेशी परंपरा का एक ऐतिहासिक पन्ना आज भी ध्वजागली स्थित पंडा परिवार के पास एक अमूल्य धरोहर के रूप में सुरक्षित है, जो भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता स्व. पृथ्वीराज कपूर और उनके पुत्र शम्मी कपूर की अगाध आस्था की गवाही देता है.
19 जनवरी 1952 की वह ऐतिहासिक सुबह
ध्वजागली निवासी पंडित मिथिलेश झा उर्फ डबलू महाराज बताते हैं कि 19 जनवरी 1952 को उनके दादा स्वर्गीय पंडित यमुना झा ने पृथ्वीराज कपूर, शम्मी कपूर और 'पृथ्वी थिएटर' के अन्य कलाकारों का बाबा अजगैवीनाथ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संकल्प पूजन कराया था:
- हस्तलिखित भावपूर्ण टिप्पणी: पूजा-अर्चना के बाद पृथ्वीराज कपूर ने स्वयं अपने हाथों से मंदिर और पंडा परिवार के आतिथ्य व सेवा-भाव पर एक सुंदर संदेश लिखा था.
- संदेश में क्या लिखा था: उन्होंने लिखा कि अजगैवीनाथ धाम आकर उन्हें अद्भुत आत्मिक शांति और आनंद प्राप्त हुआ. उन्होंने पंडा परिवार की सादगी, आत्मीयता और गरीब विद्यार्थियों के प्रति समर्पण की मुक्तकंठ से सराहना की थी.
विशाल रजिस्टरों में दर्ज है पीढ़ियों का इतिहास
ध्वजागली निवासी स्व. पंडित नरेश झा वर्षों तक देश भर से आने वाले यजमानों का संकल्प पूजन कराते रहे. अब उनके पुत्र डबलू महाराज, पोते दुर्गेश कुमार झा (राजा झा), गुलशन कुमार झा और परिवार के अन्य सदस्य इस पारंपरिक व्यवस्था को संभाल रहे हैं:
- दशकों पुराना रिकॉर्ड: डबलू महाराज बताते हैं कि उनके पास वर्षों पुराने विशाल रजिस्टरों में हर यजमान का पूरा रिकॉर्ड दर्ज है. कौन सा परिवार कब आया, किस पीढ़ी ने संकल्प लिया, यह सब क्रमवार दर्ज है.
- चौथी पीढ़ी तक जुड़ाव: कई नामचीन उद्योगपतियों और संभ्रांत परिवारों की तीसरी और चौथी पीढ़ी आज भी उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए सबसे पहले पंडा परिवार के पास ही पहुंचती है.
'अजगैवीनाथ के दरबार में सब केवल कांवरिया'
पंडा परिवार का कहना है कि सुलतानगंज पहुंचने के बाद किसी का पद, कद या संपत्ति मायने नहीं रखती. पंडा परिवार के अनुसार, "यहाँ कोई उद्योगपति या बड़ा अधिकारी नहीं रहता. बाबा के दरबार में सब केवल शिवभक्त और कांवरिया हैं." पंडा परिवार इसी समभाव से सभी श्रद्धालुओं का संकल्प कराकर उनकी सुगम यात्रा की मंगल कामना करता है.
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लेखक के बारे में
By शुभंकर
शुभंकर,करियर की शुरुआत दिल्ली के एक पाक्षिक पत्रिका से किया. राष्ट्रीय सहारा के बाद वर्ष 2005 में प्रभात खबर से जुड़ कर लगातार 21 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. अभी प्रभात खबर सुलतानगंज भागलपुर क्षेत्र में काम कर रहे हैं.हर पल बदलते सामाजिक घटनाक्रम पर पैनी नजर रखते हुए नए कंटेंट के साथ खबरों के लिए प्रभात खबर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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