बिना मुआवजा जमीन अधिग्रहण का आरोप, पूर्व विधायक ने डीएम से की जांच की मांग
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सलमेपुर घाट पर निर्माणाधीन उच्चस्तरीय पुल के संपर्क पथ के लिए भूमिहीन परिवारों की जमीन बिना मुआवजा दिये अधिग्रहित किये जाने का आरोप लगा पूर्व विधायक ई. ललन कुमार ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है.
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भागलपुर से ब्रजेश की रिपोर्ट
भागलपुर. सलमेपुर घाट पर निर्माणाधीन उच्चस्तरीय पुल के संपर्क पथ के लिए भूमिहीन परिवारों की जमीन बिना मुआवजा दिये अधिग्रहित किये जाने का आरोप लगा पूर्व विधायक ई. ललन कुमार ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है. पूर्व विधायक ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा या वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने की भी मांग की है. उन्होंने कहा है कि वह विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उनके विधायक कार्यकाल 2020-2025 के दौरान ही इस पुल का शिलान्यास किया गया था. विकास के साथ-साथ प्रभावित परिवारों का उचित पुनर्वास और मुआवजा सुनिश्चित किया जाना चाहिए.1988 में आवंटित भूमि को लेकर उठे सवाल
पूर्व विधायक द्वारा भेजे गये पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1988 में बिहार सरकार द्वारा मोहनपुर-मधुबन पंचायत, मौजा फौजदारी में भूमिहीन एवं गरीब परिवारों को कृषि एवं आजीविका के लिए भूमि आवंटित की गयी थी. यह भूमि लंबे समय से उनके जीवनयापन का प्रमुख साधन रही है.पुल परियोजना के संपर्क पथ में उपयोग का आरोप
वर्तमान में मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के अंतर्गत सलमेपुर घाट पर उच्चस्तरीय पुल का निर्माण कार्य चल रहा है. इस पुल के संपर्क मार्ग के निर्माण में उक्त लाभुक परिवारों की भूमि उपयोग में ली गयी है, जिसके बदले मुआवजा नहीं दिये जाने का आरोप लगाया गया है.पत्र में उदाहरण स्वरूप मौजा फौजदारी निवासी सत्यनारायण रविदास का उल्लेख किया गया है. पूर्व विधायक के अनुसार ऐसे लगभग 10 परिवार इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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