bhagalpur news. अंग की लोक कला मंजूषा ने राष्ट्रपति भवन में बनायी जगह, मनोज पंडित को मिला राष्ट्रपति अवार्ड

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bhagalpur news. अंग की लोक कला मंजूषा ने राष्ट्रपति भवन में बनायी जगह, मनोज पंडित को मिला राष्ट्रपति अवार्ड

यह भागलपुर और मंजूषा कला के लिए वास्तव में गौरवशाली क्षण है. जब राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों मनोज पंडित की साधना को सम्मान मिला, तो अंग जनपद की प्राचीन लोक कला को भी सम्मान मिला.

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यह भागलपुर और मंजूषा कला के लिए वास्तव में गौरवशाली क्षण है. जब राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों मनोज पंडित की साधना को सम्मान मिला, तो अंग जनपद की प्राचीन लोक कला को भी सम्मान मिला. इससे भागलपुर कला जगत उल्लास से भर गया. मंजूषा कलाकार मनोज पंडित को राष्ट्रपति भवन में आर्टिस्ट इन रेजिडेंसी कार्यक्रम में हिस्सा लेने का अवसर मिला. पहला अवसर है जब भागलपुर का कोई कलाकार इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का हिस्सा बने. मंजूषा से परिचित थीं राष्ट्रपति, मंजूषा कला से उकेरी साड़ी पाकर हुईं प्रसन्न मनोज पंडित ने अपने हाथों से मंजूषा कला से उकेरी गयी साड़ी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेंट की. उन्होंने मनोज पंडित की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि मंजूषा कला बहुत प्राचीन है. इससे परिचित हूं. मनोज पंडित ने मंजूषा कला को जन-जन में पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया है. मनोज पंडित ने बताया कि बिहुला-विषहरी की गाथाओं को कैनवास पर जीवंत किया और अब तक 15 हजार युवाओं को प्रशिक्षित किया है. भागलपुर में मंजूषा महोत्सव की नींव रखने से लेकर इस लोक कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने तक से अवगत कराया. मंजूषा कला अंग प्रदेश (प्राचीन चंपा, वर्तमान भागलपुर) की अमूल्य विरासत है, जिसका इतिहास सातवीं शताब्दी से जुड़ा है. डब्लूजी आर्चर जैसे विशेषज्ञों ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास किया, लेकिन इसे जन-जन तक पहुंचाने का श्रेय स्थानीय कलाकारों को जाता है. दिवंगत चक्रवर्ती देवी और निर्मला देवी जैसी महान कलाकारों ने इस परंपरा को जीवित रखा. निर्मला देवी के पुत्र मनोज कुमार पंडित ने अपनी माता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए मंजूषा कला को आधुनिक पहचान दिलायी. मनोज ने कहा कि यह निमंत्रण मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों हाथों और उस परंपरा का सम्मान है, जो सदियों से चंपापुरी की गलियों में जीवित है. राष्ट्रपति भवन में 15 से 20 अप्रैल तक हुआ कार्यक्रम मंजूषा गुरु मनोज कुमार पंडित 15 अप्रैल से 20 अप्रैल तक राष्ट्रपति भवन में प्रवास रहे. यहां मंजूषा कला का प्रदर्शन किया. बधाई देने का शुरू हुआ सिलसिला मोहदीनगर, सूर्य लोक कॉलोनी, मिरजानहाट, बरारी, कहलगांव समेत प्रदेशभर के कलाकारों, उनसे जुड़े लोगों व गण्यमान्यों का बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया. लोगों ने कहा कि मनोज पंडित ने संपूर्ण अंग प्रदेश का नाम रोशन किया. देवघर एयरपोर्ट में सूर्या जनमानस विकास समिति, कला सागर सांस्कृतिक संगठन, गंगा घाट विकास समिति के अध्यक्ष नवीन सिंह कुशवाहा, काशी कांत सिंह, सृष्टि जनकल्याण संस्थान, माया तेतर लोक सेवा संस्थान इत्यादि संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सम्मानित किया. पूर्व सैनिक संगठन के जिला अध्यक्ष सुबोध पांडे एवं उनके कार्यकारी सदस्यों ने इस कार्य के लिए मंजूषा गुरु मनोज पंडित को दिल से आभार व्यक्त किया. मंजूषा कला प्रशिक्षण केंद्र की प्राचार्य सुमना, अनुकृति, पवन सागर, विशुद्धानंद मिश्रा, अंजना कुमारी, उलूपी झा और युवा कलाकर अमन सागर ने भी बधाई दी.

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निशिरंजन ठाकुर

लेखक के बारे में

By निशिरंजन ठाकुर

निशिरंजन ठाकुर मुख्यधारा की पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक समय से सक्रिय. साहित्यिक विषयों में भी गहरी रूचि. खबरों में तथ्य के साथ मानवीय संवेदना और भाषा की सादगी को अहम मानते हैं.

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