साठी-बेलवा नहर की सफाई ने खोली शहर की हकीकत, 5 हजार टन कचरा निकला, निगम पर उठे सवाल

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साठी-बेलवा नहर से निकाला गया कचरा

साठी-बेलवा नहर से निकाला गया कचरा

नरकटियागंज की साठी-बेलवा नहर से 5 हजार टन कचरा निकला। सफाई के बाद अब मलबे के उठाव को लेकर राजनीति तेज हो गई है। जानें पूरी खबर।

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Bettiah News : शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली साठी-बेलवा नहर की सफाई के दौरान अब तक 5 हजार टन से अधिक कचरा और मलबा निकाला जा चुका है. वर्षों से घरेलू कचरा, प्लास्टिक और मलबा नहर में फेंके जाने के कारण इसकी स्थिति बदहाल हो गई थी. अब सफाई के बाद निकले कचरे के उठाव को लेकर राजनीति तेज हो गई है, जबकि नहर को कूड़ाघर बनाने की जिम्मेदारी स्वीकार करने को कोई तैयार नहीं है.

Narkatiaganj News: 6 वार्डों में चल रहा सफाई अभियान

जल संसाधन विभाग की ओर से वार्ड संख्या 1, 2, 10, 11, 12 और 13 में सफाई अभियान चलाया जा रहा है. विभाग के अनुसार नहर किनारे रहने वाले करीब दो हजार लोगों की आबादी द्वारा वर्षों से फेंके गए कचरे के कारण नहर पूरी तरह मलबे से भर गई थी. सफाई के बाद अब उसके निस्तारण की बड़ी चुनौती सामने है.

सीमित संसाधनों के बीच जारी है मलबा हटाने का काम

त्रिवेणी नहर विभाग के सहायक अभियंता अभिनव आनंद ने बताया कि विभाग तेजी से कचरा हटाने का कार्य कर रहा है. नगर परिषद का भी सहयोग मिल रहा है और कई स्थानों से मलबा हटाया जा चुका है. हालांकि, कचरे की मात्रा अपेक्षा से अधिक होने और सीमित संसाधनों के कारण अभियान में समय लग रहा है.

कचरे के उठाव पर शुरू हुई सियासत

नहर से निकले कचरे के ढेर को लेकर स्थानीय लोगों, छोटे राजनीतिक दलों और स्वयंभू समाजसेवियों ने जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती कार्यक्रम के दौरान विधायक संजय कुमार पांडेय, नगर परिषद सभापति रीना देवी और उपसभापति पूनम देवी को भी लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा.

विधायक संजय कुमार पांडेय ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता से फोन पर बात कर कचरा जल्द हटाने का निर्देश दिया. वहीं सभापति रीना देवी ने कहा कि भले ही यह नगर परिषद की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं है, फिर भी नगरवासियों की सुविधा के लिए हरसंभव सहयोग किया जा रहा है.

नागरिकों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

साठी-बेलवा नहर की सफाई ने शहर के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. यदि लोग आगे भी नहर में कचरा फेंकते रहे तो करोड़ों रुपये खर्च कर किया गया यह सफाई अभियान कुछ वर्षों में फिर बेकार साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि नहर को स्वच्छ रखने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ नागरिकों की जागरूकता भी जरूरी है.

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Satish Kumar Pand

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