वित्तीय अनियमितता मामले में पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी पर बड़ा एक्शन, पूरी पेंशन रोकने का दंड बरकरार

वित्तीय अनियमितता मामले में पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी पर बड़ा एक्शन, पूरी पेंशन रोकने का दंड बरकरार
बिहार सरकार ने पश्चिम चंपारण के पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी आशुतोष शरण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. आवासीय विद्यालयों में बर्तनों की खरीद में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में उनकी पूरी पेंशन अवरुद्ध कर दी गई है. यह फैसला प्रशासनिक महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है.
Bettiah Officer Pension: पश्चिम चंपारण के तत्कालीन प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी आशुतोष शरण को लंबे समय से चल रहे एक विभागीय मामले में बिहार सरकार से बड़ा झटका लगा है. बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर सुनवाई पूरी करने के बाद उनके विरुद्ध पूरी पेंशन अवरुद्ध (रोकने) करने के दंड को बरकरार रखा है. विभाग के अपर सचिव की ओर से जारी छह पृष्ठों के आदेश में विस्तृत विभागीय कार्रवाई. जांच रिपोर्ट. हाईकोर्ट के निर्देश तथा आरोपी पदाधिकारी के जवाब पर गहन विचार करने के बाद यह अंतिम निर्णय लिया गया है. इस फैसले से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.
आवासीय विद्यालयों में बर्तनों की खरीद में हुई थी गंभीर गड़बड़ी
आदेश के अनुसार. पश्चिम चंपारण के नवनिर्मित एवं तीन पुराने अनुसूचित जाति एवं जनजाति आवासीय विद्यालयों में स्टील जग. डस्टबिन. अलमारी तथा भोजन बनाने के बर्तनों की खरीद में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे. आशुतोष शरण पर आरोप था कि खरीद प्रक्रिया में गुणवत्ता की अनदेखी की गई और बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के ही मनमाने ढंग से खरीद की गई. इसके अलावा. बर्तनों की फॉरेंसिक जांच बिहार की अधिकृत प्रयोगशाला के बजाय उत्तर प्रदेश की एक निजी एजेंसी से कराई गई थी. जो नियमों के खिलाफ था. अनुशासनिक प्राधिकार ने समीक्षा में पाया कि 360 स्टील जग की आपूर्ति बिना स्वीकृति के कराई गई और खरीद प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.
हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई सुनवाई, तर्कों को विभाग ने किया खारिज
इस मामले को लेकर वर्ष 2021 में दूसरा कारण पृच्छा जारी किया गया था. इसी दौरान बगहा थाना में भादंवि की धारा 409 और 420 के तहत प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी. इसके बाद श्री शरण ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट ने विभाग को उनका पक्ष सुनकर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया था. न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया. लेकिन प्राधिकार ने उनके सभी तर्कों को अस्वीकार कर दिया. आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि वित्तीय अनियमितता. कर्तव्यहीनता और स्वेच्छाचारिता के गंभीर आरोपों के आधार पर बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत उनकी संपूर्ण पेंशन रोकने का दंड यथावत रखा जाता है.
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