बेतिया में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान पर संकट, देखभाल नहीं मिलने से सूख रहे 570 पौधे

Updated:
विज्ञापन
फोटो --कैप्शन : समाहरणालय के समक्ष बिपिन प्लस टू स्कूल परिसर में सूख रहा पौधा | Prabhat Khabar Network

फोटो --कैप्शन : समाहरणालय के समक्ष बिपिन प्लस टू स्कूल परिसर में सूख रहा पौधा | Prabhat Khabar Network

बेतिया नगर निगम में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान गंभीर संकट में है. राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की शाखा बंद होने के बाद लगाए गए 570 पौधों की देखभाल ठप पड़ गई है, जिससे वे सूखने लगे हैं. स्थानीय लोग वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.

विज्ञापन

बेतिया नगर निगम: नगर निगम क्षेत्र में अमृत 2.0 योजना के तहत बड़े उत्साह के साथ शुरू किया गया 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान अब गंभीर संकट का सामना कर रहा है. राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) की स्थानीय शाखा के अचानक बंद होने के बाद अभियान के तहत लगाए गए 570 पौधों की नियमित देखभाल लगभग ठप पड़ गई है. समय पर सिंचाई और संरक्षण नहीं मिलने से कई पौधे सूखने लगे हैं, जबकि बाकी पौधों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है. स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने नगर निगम से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है.

14 प्रमुख स्थानों पर लगाए गए थे 570 पौधे

नगर निगम ने अमृत 2.0 योजना के तहत शहर के 14 प्रमुख स्थलों को चिन्हित कर कुल 570 पौधे लगाए थे. इनमें महंत राम रूप गोस्वामी कॉलेज के निकट, विपिन हाई स्कूल परिसर, गरदान पोखरा, शेखौना मठ, एमजेके कॉलेज, आरएलएसवाई कॉलेज, बैजनाथ आंगनबाड़ी छठ घाट, वैराट माता स्थल, रामपुर गोनौली, रानी पकड़ी जिरात, बैद्यनाथपुर स्कूल, रानी पकड़ी पश्चिम टोला, मठिया राम जानकी मंदिर और वार्ड-47 स्थित छठ स्थान गनौली जैसे इलाके शामिल हैं.

31 स्वयं सहायता समूहों को मिली थी जिम्मेदारी

इन पौधों की देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा का जिम्मा DAY-NULM के तहत चयनित 31 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपा गया था. अभियान की शुरुआत नगर निगम की महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने की थी. उस समय इसे शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया था.

शाखा बंद होते ही ठप हुई निगरानी

स्थानीय DAY-NULM शाखा बंद होने के बाद पौधों की देखभाल की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई है. जिन समूहों के माध्यम से नियमित सिंचाई और निगरानी की जा रही थी, उनके काम रुकने से पौधों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. बारिश का पर्याप्त साथ नहीं मिलने और नियमित देखरेख के अभाव में कई पौधे सूखने लगे हैं.

नगर निगम से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर निगम ने जल्द नई व्यवस्था नहीं की तो सरकारी धन से लगाए गए अधिकांश पौधे नष्ट हो सकते हैं. पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने मांग की है कि नगर निगम तत्काल किसी अन्य एजेंसी, स्वयं सहायता समूह या कर्मचारियों के माध्यम से पौधों की देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का उद्देश्य अधूरा न रह जाए.

यह भी पढे़ं: पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए अब थाने का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं, पुलिस खुद करेगी संपर्क


विज्ञापन
Madhukar Mishra

लेखक के बारे में

By Madhukar Mishra

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन