बीत गया आद्रा, नहीं बरसे बदरा, सूखे खेत और बारिश का इंतजार, आसमान ताक रहे किसान

खेत में धान रोपाई के लिए पंपसेट से पानी ले जाते किसान
बगहा के किसान इस साल "आद्रा बरसे, किसान हंसे" कहावत को सच होते नहीं देख पा रहे हैं. आद्रा नक्षत्र बीतने के बाद भी पर्याप्त बारिश न होने से खेत सूखे पड़े हैं और धान-गन्ने की फसल पर संकट मंडरा रहा है.
Bagaha News: "आद्रा बरसे, किसान हंसे" और "आवते आद्रा, जाते हथिया; न बरसे तो किसान रोवत रहिया" जैसी लोक कहावतें इस वर्ष बगहा के किसानों के लिए सच होती नजर नहीं आ रहीं. आद्रा नक्षत्र बीत जाने के बावजूद क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. इसके कारण खेत, खलिहान, सरेह और पोखरों के छोटे-बड़े गड्ढे तक सूखे पड़े हैं. किसान अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं.
धान और गन्ने की खेती पर बढ़ी चिंता
बगहा अनुमंडल में धान और गन्ना प्रमुख फसलें हैं, जिनकी खेती काफी हद तक वर्षा पर निर्भर करती है. किसानों का कहना है कि एक ओर बारिश नहीं हो रही है, वहीं दूसरी ओर जरूरत के अनुसार यूरिया भी उपलब्ध नहीं हो रही है. इससे खेती की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
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लोक कहावतें भी दे रहीं संकेत
ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी से जुड़ी कई पारंपरिक कहावतें आज भी मौसम का संकेत मानी जाती हैं. बुजुर्ग कहते हैं, "आद्रा बरसे, धान तरसे नहीं", लेकिन इस बार आद्रा सूखा गुजर गया.
लोककवि घाघ की प्रसिद्ध कहावत "आवते आद्रा, जाते हथिया; न बरसे तो पछतावे किसान" किसानों की चिंता को और गहरा कर रही है. मान्यता है कि आद्रा और हथिया नक्षत्र में अच्छी वर्षा होने पर धान के साथ रबी फसलों का उत्पादन भी बेहतर होता है.
वैकल्पिक सिंचाई का ले रहे सहारा
बारिश नहीं होने के कारण किसान पंपसेट, बोरिंग, नहर और आहर के सहारे खेतों की सिंचाई कर रहे हैं. हालांकि तेज धूप के कारण खेतों में डाला गया पानी भी जल्दी गर्म हो जा रहा है.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लगातार कृत्रिम सिंचाई और अधिक तापमान का पौधों की बढ़वार और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
अच्छी बारिश का इंतजार
किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की रोपनी और फसल दोनों प्रभावित होंगी. पूरे क्षेत्र के किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं.
इन दिनों गांवों में एक और कहावत खूब सुनाई दे रही है, "सावन सूखा, किसान रूखा", जो समय पर बारिश नहीं होने से किसानों की बढ़ती चिंता को दर्शाती है.
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