मिथिला पेंटिंग में चमक रहा बेगूसराय की बेटी का नाम, रंगों और रेखाओं से संस्कृति को दे रहीं नई पहचान, मोनी कुमारी की प्रेरक कहानी

Updated:
विज्ञापन

मिथिला पेंटिंग करती मोनी कुमारी

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

Begusarai News : बेगूसराय की बेटी ने मिथिला पेंटिंग से बनाई नई पहचान, कला के जरिए संस्कृति और समाज को दे रहीं नई दिशा.

विज्ञापन

Begusarai News : बेगूसराय की एक बेटी आज अपनी कला के दम पर न सिर्फ अपनी पहचान बना रही है, बल्कि समाज को जागरूक करने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी काम कर रही है. इस मिथिला पेंटिंग की रंगीन दुनिया में अपनी अलग छाप छोड़ने वाली मोना कुमारी आज कई बच्चों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. कहते हैं कि अगर जुनून सच्चा हो तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है. बेगूसराय के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के चौकी गांव की रहने वाली मोनी कुमारी ने भी अपने जुनून और मेहनत के दम पर मिथिला पेंटिंग की दुनिया में एक अलग मुकाम हासिल किया है. सिर्फ दो वर्षों पहले मिथिला पेंटिंग से जुड़ने वाली मोनी आज इस पारंपरिक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जुटी हैं. उनके हाथों से उकेरे गए रंग और रेखाएं न केवल मिथिला की समृद्ध संस्कृति को जीवंत करती हैं, बल्कि समाज को कई महत्वपूर्ण संदेश भी देती हैं. मोनी का मानना है कि मिथिला पेंटिंग सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, उनकी पहचान और उनका जुनून है.

विज्ञापन

मिथिला पेंटिंग को घर-घर पहुंचाने का संकल्प, नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने में जुटीं मोनी कुमारी

यही वजह है कि वह इस कला को घर-घर तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं. सबसे खास बात यह है कि मोनी अपने घर पर बच्चों को निशुल्क मिथिला पेंटिंग का प्रशिक्षण भी देती हैं. यहां बड़ी संख्या में बच्चे इस पारंपरिक कला को सीखने पहुंचते हैं. रंगों के साथ अपनी कल्पनाओं को आकार देते इन बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई देती है. मिथिला पेंटिंग मेरे लिए सिर्फ एक कला नहीं है, बल्कि मेरी संस्कृति, मेरी पहचान और मेरा जुनून है. मेरा लक्ष्य है कि इस कला को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाऊं और नई पीढ़ी को इससे जोड़ूं. मैं बच्चों को मुफ्त में प्रशिक्षण देती हूं ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहर आगे बढ़ती रहे. “आज के आधुनिक दौर में जहां पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे लोगों से दूर होती जा रही हैं, वहीं मोनी जैसी बेटियां अपनी मेहनत और समर्पण से इन धरोहरों को संजोने का काम कर रही हैं. उनकी कोशिश न केवल मिथिला पेंटिंग को नई पहचान दे रही है बल्कि गांव के बच्चों को भी अपनी संस्कृति से जोड़ रही है. बेगूसराय की यह बेटी साबित कर रही है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कला केवल पहचान ही नहीं देती, बल्कि समाज में बदलाव और जागरूकता का माध्यम भी बन जाती है. मोनी कुमारी की यह पहल आज कई बेटियों और बच्चों के लिए प्रेरणा बन रही है.

Also Read : सीवान में पिता की लाश पोखरे से मिली, देखने पहुंची बेटी की करंट लगने से मौत

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन