बांका में 20 सितंबर तक मौसम बदलेगा मिजाज, बादलों की आवाजाही के बीच कई जगह हल्की बारिश के आसार

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आसमान में छाये बादल की तस्वीर. | Prabhat Khabar Network

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बांका जिले में 18 से 20 सितंबर के बीच मौसम में बदलाव की संभावना है. घने बादलों के बीच तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. मौसम विभाग ने किसानों को फसलों, खासकर धान और खरीफ मक्का की नियमित निगरानी की सलाह दी है.

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बांका जिले में सितंबर के तीसरे सप्ताह में मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा ने 18 से 20 सितंबर तक के लिए मध्यावधि मौसम पूर्वानुमान जारी किया है. इसके अनुसार इस दौरान आसमान में घने बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है और जिले के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवा तथा हल्की से मध्यम बारिश होने के संकेत हैं. मौसम में बदलाव का असर खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है, जिसे देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है.

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20 सितंबर तक बादलों के बीच बारिश का दौर

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 18 से 20 सितंबर के बीच दक्षिण बिहार के जिलों में बादल छाए रहने की संभावना है. इस दौरान स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ तेज हवा चल सकती है और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है. हालांकि बारिश का वितरण सभी क्षेत्रों में एक जैसा रहने की संभावना नहीं है. कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, तो कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है.

33 से 34 डिग्री तक रहेगा दिन का तापमान

मौसम में बादलों की मौजूदगी के बावजूद दिन में गर्मी का असर पूरी तरह खत्म नहीं होगा. पूर्वानुमान के मुताबिक अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. पूरबा हवा 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने का अनुमान है. हवा और बादलों के कारण मौसम में उमस के साथ बीच-बीच में राहत भी महसूस हो सकती है.

बारिश कम हुई तो धान में तेजी से बढ़ेंगे खरपतवार

मौसम को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने धान की फसल को लेकर किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. वैज्ञानिकों के अनुसार कम बारिश की स्थिति में खेतों में खरपतवार तेजी से बढ़ सकते हैं. ऐसे में किसान समय पर खेतों की निगरानी करें और जरूरत के अनुसार निराई-गुड़ाई या अनुशंसित खरपतवार नियंत्रण उपाय अपनाएं. इससे धान के पौधों को पोषक तत्वों और पानी के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा से बचाया जा सकेगा.

खरीफ मक्का में तना छेदक पर रखें नजर

खरीफ मक्का की फसल में भी किसानों को तना छेदक की नियमित निगरानी करने को कहा गया है. यदि पौधे की मध्य कलिका सूखकर मुरझाने लगे या उसे खींचने पर वह आसानी से बाहर निकल आए, तो यह तना छेदक के प्रकोप का संकेत हो सकता है. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर किसान कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुसार उचित उपचार करें. मौसम में बदलाव के दौरान फसलों की नियमित निगरानी से नुकसान को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है.

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