कटोरिया के विभिन्न कलस्टर के डेढ सौ हेक्टेयर में हो रही प्राकृतिक खेती

Published by : DEEPAK KUMAR CHOUDHARY Updated At : 03 Dec 2025 9:52 PM

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महिला किसानों को गमछा व सेनेटरी पैड का पैकेट देकर किया सम्मानित

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-महिला किसानों को गमछा व सेनेटरी पैड का पैकेट देकर किया सम्मानित कटोरिया. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन अन्तर्गत कटोरिया प्रखंड में क्लस्टर बनाकर 150 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम के तहत कटोरिया प्रखंड में कुल 375 महिला किसान प्राकृतिक खेती कर रही हैं. इन्हीं किसानों को प्रोत्साहित करने को लेकर सहायक निदेशक, रसायन डॉ कृष्ण कांत की अध्यक्षता में प्राकृतिक खेती से महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम का आयोजन हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन बांका जिला किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी नीलम कुमारी के हाथों हुआ. इस कार्यक्रम में 400 से अधिक महिला किसानों ने भाग लिया. इनमें प्राकृतिक खेती कर रही किसान दीदी के साथ-साथ मशरूम, सेनेटरी पैड, चाउमीन इत्यादि का घरेलू व्यापार कर रहे महिला किसानों द्वारा अपने-अपने उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई. इस कार्यक्रम में कृषि विभाग के उपनिदेशक अभियंत्रण एवं जिला उद्यान पदाधिकारी भी उपस्थित रहे. डा. कृष्ण कांत ने बताया कि पूरे जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 9 क्लस्टर बनाकर 1125 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. इस खेती में किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग नहीं किया जाता. उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती में उपयोग किए जाने वाले उर्वरक गाय के गोबर व गोमूत्र इत्यादि की सहायता से किसान खुद ही तैयार करते हैं. कुछ किसान इसे तैयार कर स्थानीय स्तर पर बिक्री भी कर रहे हैं. प्राकृतिक खेती के तहत हाथीखाद, नैनो कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट इत्यादि का निर्माण स्थानीय स्तर पर मिशन के तहत आच्छादित किसानों द्वारा स्वयं किया जा रहा है. इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र महिला किसान दीदियों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना था. उपस्थित सभी महिला किसानों व उद्यमियों को गमछा एवं सेनेटरी पैड का पैकेट देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में जैविक खेती के महत्व एवं इसके भविष्य में होने वाले आर्थिक फायदे की भी जानकारी दी गई. इस क्षेत्र में आदिवासी महिलाओं द्वारा जैविक मिशन के तहत शिमला मिर्च, नींबू, टमाटर, ड्रैगन फ्रूट एवं अन्य कई तरह की सब्जियां तथा रेशम का भी व्यापार किया जा रहा है. कार्यक्रम में बांका जिला से आए बच्चियों व स्थानीय आदिवासी बच्चियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुती दी. सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाली बच्चियों की टीम को पांच-पांच हजार रुपये देकर उत्साहवर्धन किया गया. सहायक निदेशक रसायन डॉ कृष्ण कांत ने बताया कि दिसंबर माह में इस तरह के कुल पांच कार्यक्रम जिला के विभिन्न प्रखंडों में आयोजित किए जाएंगे, जिसका मूल उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों से मिट्टी के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव के प्रति किसानों एवं आमजन को जागरूक करना है.

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