कांवरिया पथ पर सेवा का लगेगा महाकुंभ, 120 नि:शुल्क शिविरों में लाखों शिवभक्तों के स्वागत की है तैयारी

कांवरिया पथ पर निर्माणाधीन पंडाल. | Prabhat Khabar Network
Shravani Mela 2026 : श्रावणी मेला केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सेवा की भारतीय परंपरा का सबसे बड़ा उदाहरण है. सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक 105 किमी लंबे मार्ग पर 120 निःशुल्क सेवा शिविर लाखों श्रद्धालुओं की सेवा के लिए तैयार हैं. देशभर से हजारों सेवादार इस महाआयोजन में शामिल होते हैं.
Shravani Mela 2026 : श्रावणी मेला केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सेवा की भारतीय परंपरा का भी सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है. सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक करीब 105 किलोमीटर लंबे कच्चे कांवरिया मार्ग पर लगभग 120 नि:शुल्क सेवा शिविर और निजी धर्मशालाएं हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की सेवा में जुटती हैं. इन शिविरों में कांवरियों, डाक बम और दंडी बम के लिए नि:शुल्क ठहरने की व्यवस्था के साथ शुद्ध पेयजल, स्नान, शौचालय, चाय, शरबत, गर्म पानी, फल, भोजन और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.
सालभर जारी रहती है कई धर्मशालाओं की सेवा
कांवरिया मार्ग पर कई धर्मशालाएं ऐसी भी हैं, जहां केवल श्रावणी मेला ही नहीं बल्कि पूरे वर्ष बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा की जाती है. इन सेवा केंद्रों पर स्वयंसेवक पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ दिन-रात यात्रियों की सुविधा में लगे रहते हैं. यही निस्वार्थ सेवा भावना श्रावणी मेला की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है.
देशभर से पहुंचते हैं हजारों सेवादार
श्रावणी मेला के दौरान बिहार और झारखंड के अलावा छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के सदस्य अपने-अपने सेवा शिविर लगाते हैं. उनका उद्देश्य केवल एक होता है—लंबी पैदल यात्रा करने वाले शिवभक्तों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराना. यही कारण है कि कांवरिया पथ हर वर्ष सेवा, सहयोग और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बन जाता है.
प्रमुख सेवा शिविरों में अंतिम चरण की तैयारियां
कांवरिया पथ पर पूर्णिया सेवा शिविर, व्याहुत-कलवार सेवा शिविर (पाकुड़), मुजफ्फरपुर सेवा शिविर, छत्तीसगढ़ सेवा शिविर, जोगबनी-विराटनगर सेवा शिविर, श्रीराम सेवा शिविर, धनबाद सेवा शिविर और कमल सेवा संस्थान पुटकी धनबाद सहित कई प्रमुख शिविरों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं. इसके अलावा किशनगंज सेवा सदन, नथमल अग्रवाल सेवा स्मृति सदन, छत्तीसगढ़ बोलबम कल्याण संघ, बोलबम सेवा समिति टोनापाथर, दांडी आश्रम गड़ुआ, असम-बंगाल धर्मशाला, मिथिला कांवरिया आश्रम और सिवान धर्मशाला जैसी निजी धर्मशालाओं में भी श्रद्धालुओं के स्वागत की व्यापक तैयारी की जा रही है.
'बोल बम' के जयघोष के बीच शुरू होगा सेवा का महापर्व
श्रावणी मेला शुरू होते ही पूरा कांवरिया पथ 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठेगा. आकर्षक पंडाल, बेहतर सुविधाएं और हजारों स्वयंसेवकों का सेवा भाव लाखों शिवभक्तों की यात्रा को सुरक्षित, सुगम और यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाएगा. प्रशासनिक तैयारियों के साथ सामाजिक संगठनों की यह भागीदारी श्रावणी मेला को देश के सबसे अनुकरणीय धार्मिक आयोजनों में शामिल करती है.
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लेखक के बारे में
By दीपक चौधरी
दीपक चौधरी प्रिंट माध्यम में 23 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. कटोरिया (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.
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