बांका के शंभुगंज में बारिश की राह देख रहे किसान, 12 हजार हेक्टेयर धान खेती का लक्ष्य अभी अधूरा

रोपाई के लिए बिचड़ा से धान के पौधे निकालते किसान.
Monsoon Waiting : आषाढ़ समाप्त होने को है लेकिन बांका के शंभुगंज प्रखंड में धान की रोपनी गति नहीं पकड़ सकी है. किसान बारिश का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ धान की खेती खतरे में है.
Monsoon Waiting : बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड में आषाढ़ समाप्ति की ओर है और सावन की दस्तक में महज एक सप्ताह बाकी है. इसके बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की रोपनी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है. खेतों में बिचड़ा तैयार है, लेकिन पानी की कमी के कारण किसान चिंतित हैं. कई किसान बोरिंग और पंपिंग सेट के सहारे रोपनी शुरू कर चुके हैं, जबकि अधिकांश किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं.
बारिश की कमी से थमी धान रोपनी
शंभुगंज प्रखंड में धान की खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है. इस वर्ष समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में रोपनी का कार्य धीमा पड़ गया है. अधिकांश खेत अब भी खाली हैं, जबकि किसानों ने पहले ही बिचड़ा तैयार कर लिया है. अब उनकी निगाहें आसमान पर टिकी हैं कि कब अच्छी बारिश हो और रोपनी में तेजी आए.

बोरिंग और पंपिंग सेट बने किसानों का सहारा
बारिश नहीं होने के कारण कई किसानों ने वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई है. बोरिंग से सिंचाई कर और नदियों से पंपिंग मशीन के जरिए पानी लाकर खेतों में धान की रोपनी शुरू की जा रही है. प्रगतिशील किसान ललन पंजिकार, लालबिहारी सिंह और राजीव कुमार ने बताया कि मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए उन्होंने इस बार धान की सीधी बुआई को प्राथमिकता दी है, ताकि बारिश में देरी का असर कम हो.
बारिश नहीं हुई तो बदलनी पड़ेगी फसल
किसान रामजी यादव, कुंदन सिंह, अजय यादव और गौरव झा ने बताया कि सीमित संसाधनों के सहारे धान की रोपनी शुरू की गई है. उनका कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की खेती प्रभावित होगी और किसानों को अरहर, मक्का सहित अन्य वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करना पड़ सकता है. इससे उत्पादन और आय दोनों पर असर पड़ने की आशंका है.
अभी सिर्फ 15 प्रतिशत रकबे में हुई खेती
प्रखंड कृषि पदाधिकारी संकेत तिवारी ने बताया कि इस वर्ष शंभुगंज प्रखंड में लगभग 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. अब तक केवल 15 प्रतिशत रकबे में ही धान की खेती हो सकी है. इनमें करीब चार प्रतिशत किसानों ने पहले ही धान की सीधी बुआई कर दी थी. उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि मध्य सावन तक अच्छी बारिश हो जाती है तो लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत धान की खेती पूरी कर ली जाएगी.
सावन की बारिश पर टिकी किसानों की उम्मीद
धान की खेती इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है. ऐसे में किसान चाहते हैं कि सावन की शुरुआत के साथ अच्छी बारिश हो, ताकि रोपनी का काम तेजी से पूरा हो सके और बेहतर उत्पादन की उम्मीद कायम रहे.
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लेखक के बारे में
By ठाकुर विनोद कुमार
ठाकुर विनोद कुमार प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. शंभूगंज (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों में रुचि रखते हैं.
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