कटोरिया में 50 माताओं को मिला पोषण का पाठ, आंगनबाड़ी केंद्रों पर सिखाया बच्चों का सही आहार

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कार्यक्रम में उपस्थित महिलाएं | Prabhat Khabar Network

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कटोरिया में पोषण माह के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर माताओं को बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन बनाने का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया. 6 से 23 माह के बच्चों के विकास के लिए इस ज्ञान का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ेगा.

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Nutrition Month 2026 Katioria: कटोरिया (बांका). बच्चे की थाली में क्या है, यह सिर्फ उसकी भूख नहीं, बल्कि उसके आने वाले स्वास्थ्य और विकास को भी तय करता है. खासकर 6 से 23 माह की उम्र में सही पोषण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए कटोरिया प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों पर शनिवार को माताओं को केवल पोषण की जानकारी नहीं दी गयी, बल्कि पौष्टिक व्यंजन बनाकर खिलाने का तरीका भी व्यवहारिक रूप से सिखाया गया.

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राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के तहत आयोजित खाद्य प्रदर्शनी एवं अभ्यास सत्र में करीब 50 माताओं ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य घर में उपलब्ध खाद्य पदार्थों के सही संयोजन से बच्चों के लिए उम्र के अनुरूप पौष्टिक भोजन तैयार करने के प्रति माताओं को जागरूक करना रहा. कार्यक्रम के दौरान यह समझाने पर जोर दिया गया कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में भोजन की गुणवत्ता और नियमितता का उनकी सेहत पर सीधा असर पड़ता है.

आंगनबाड़ी केंद्र पर ही तैयार कराया गया पौष्टिक भोजन

कटोरिया प्रखंड के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित इस कार्यक्रम में 6 से 23 माह के बच्चों के लिए उम्र के अनुसार पौष्टिक व्यंजन तैयार किये गये. माताओं और देखभालकर्ताओं को इन व्यंजनों को तैयार करने के साथ बच्चों को खिलाने की विधि का भी अभ्यास कराया गया.

प्रशिक्षण के दौरान भोजन में अलग-अलग खाद्य पदार्थों के सही संयोजन, बच्चों को दी जाने वाली मात्रा और नियमित पोषण के महत्व की जानकारी दी गयी. इसका उद्देश्य यह था कि माताएं केवल कार्यक्रम तक सीमित जानकारी लेकर न लौटें, बल्कि घर पर भी उसी तरीके से बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार कर सकें.

शुरुआती उम्र में पोषण क्यों है इतना जरूरी

आयोजकों के अनुसार बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्षों में उचित पोषण उनके शारीरिक और मानसिक विकास की बुनियाद तैयार करता है. इस उम्र में पोषण की कमी होने पर बच्चों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. इसलिए कुपोषण से निपटने के लिए सिर्फ बच्चों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार में भोजन तैयार करने और बच्चों को खिलाने की जिम्मेदारी निभाने वाले लोगों को भी सही जानकारी देना जरूरी है.

इसी सोच के तहत माताओं और देखभालकर्ताओं को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उन्हें बताया जा रहा है कि उम्र के अनुसार भोजन की मात्रा, खाद्य पदार्थों का संयोजन और नियमित भोजन बच्चों के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

जानकारी से आगे बढ़कर व्यवहार में बदलाव पर जोर

कुपोषण के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान में इस बार सिर्फ जागरूकता संदेश देने के बजाय माताओं को प्रत्यक्ष अभ्यास से जोड़ने पर जोर दिया गया. खाद्य प्रदर्शनी और अभ्यास सत्र के जरिये उन्हें यह दिखाया गया कि बच्चों के लिए पौष्टिक व्यंजन किस तरह तैयार किये जा सकते हैं और उन्हें किस तरीके से खिलाया जाना चाहिए.

इस तरह की पहल का स्थानीय स्तर पर महत्व इसलिए भी है क्योंकि आंगनबाड़ी केंद्र माताओं और छोटे बच्चों तक पोषण संबंधी जानकारी पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं. यहां मिली जानकारी को यदि परिवार रोजमर्रा के भोजन में अपनाते हैं, तो बच्चों के पोषण की स्थिति में सुधार लाने में मदद मिल सकती है.

कुपोषण खत्म करने के लिए परिवार की भूमिका अहम

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कुपोषण के कारणों को जड़ से समाप्त करना, माताओं को पोषण के प्रति जागरूक करना और बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार उचित एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना रहा. आयोजकों ने माताओं को घर पर भी पौष्टिक भोजन तैयार करने के लिए प्रेरित किया.

कुपोषण से निपटने की जिम्मेदारी केवल किसी एक विभाग या संस्था की नहीं है. आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाली जानकारी को परिवार के स्तर पर व्यवहार में उतारना भी उतना ही जरूरी है. नियमित निगरानी, सही पोषण संबंधी जानकारी और समय पर जागरूकता से बच्चों के स्वास्थ्य में बेहतर बदलाव लाने की दिशा में मदद मिल सकती है.

Nutrition Month 2026 Katioria: विभाग और संस्था की साझेदारी से चला अभियान

यह कार्यक्रम बाल विकास परियोजना के अंतर्गत टाटा ट्रस्ट के सहयोग से नीड्स संस्था द्वारा आयोजित किया गया. कार्यक्रम में महिला पर्यवेक्षिका पूजा कुमारी, जीविका की सीएनआरपी सीता देवी, एएनएम रमा कुमारी और संबंधित आंगनबाड़ी सेविका मौजूद रहीं.

नीड्स संस्था की ओर से क्षेत्र समन्वयक भूदेव कुमार, सेवक कुमार, नेहा कुमारी और प्रखंड समन्वयक अजीत मौर्य ने भी कार्यक्रम में भाग लिया. माताओं की भागीदारी और उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण देने से अभियान को घर-घर तक पहुंचाने की कोशिश की गयी.

आगे भी इस तरह के पोषण संबंधी अभ्यास और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिये माताओं को बच्चों की उम्र और जरूरत के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया जाना महत्वपूर्ण होगा. इससे आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाली जानकारी को परिवार के रोजमर्रा के भोजन और बच्चों की देखभाल से जोड़ा जा सकेगा.

कार्यक्रम में उपस्थित महिलाएं  | Prabhat Khabar Network
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाएं | Prabhat Khabar Network

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