गंगाजल की बूंदों से पवित्र हो रही 105 किमी कांवरिया पथ की डगर, आस्था के रंग में रंगा बाबाधाम मार्ग

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श्रद्धा भाव से बाबा धाम के लिए जाते कांवरिये | Prabhat Khabar Network

श्रावणी मेला में सुल्तानगंज से बाबाधाम तक कांवरिया पथ की पवित्रता, श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और नियमों के पालन की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

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कटोरिया (बांका). श्रावणी मेला के दौरान सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम से बाबाधाम तक करीब 105 किलोमीटर लंबी कांवर यात्रा सिर्फ श्रद्धा और भक्ति का सफर नहीं, बल्कि आस्था, नियम और परंपराओं के अनूठे संगम की तस्वीर भी पेश कर रही है. उत्तरवाहिनी गंगा से गंगाजल लेकर बाबाधाम की ओर बढ़ रहे लाखों कांवरियों के कदमों से कच्ची कांवरिया पथ का कण-कण पवित्र व भक्तिमय होता नजर आ रहा है. शुद्धि-जल का छिड़काव सुल्तानगंज में गंगा स्नान कर कांवर में दो गागर गंगाजल भरने के साथ कई श्रद्धालु एक छोटे डिब्बे में गंगाजल शुद्धि-जल के रूप में भी रखते हैं. यात्रा के दौरान विश्राम, नाश्ता, भोजन, लघुशंका या स्नान आदि के बाद कांवर को दोबारा कंधे पर रखने से पहले श्रद्धालु स्वयं पर शुद्धि-जल का छिड़काव करते हैं. मान्यता है कि इससे यात्रा के दौरान हुई अशुद्धि दूर होती है और कांवर को पुनः पवित्रता के साथ कंधे पर धारण किया जाता है. दंड-बैठक कर मांगी जाती है क्षमा कांवर उठाने से पहले कई श्रद्धालु कान पकड़कर पांच बार दंड-बैठक भी करते हैं. इसे कांवर यात्रा के दौरान नियमों और धार्मिक मर्यादाओं के पालन में हुई भूल-चूक के लिए भोलेनाथ से क्षमा मांगने की परंपरा के रूप में देखा जाता है. श्रद्धालुओं की यह आस्था और अनुशासन कांवर यात्रा को और भी विशेष बना देता है. साफ-सफाई को लेकर प्रशासन भी सजग कांवरिया पथ की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने को लेकर जिला प्रशासन की टीम के साथ सेवा शिविर संचालक एवं स्थानीय दुकानदार भी लगातार साफ-सफाई में जुटे हैं. जगह-जगह नियमित रूप से कचरा हटाने, मार्ग की सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है. इससे कांवरियों को लंबी यात्रा के दौरान स्वच्छ एवं सुगम मार्ग उपलब्ध हो रहा है. केसरिया रंग में रंगी कांवरिया पथ की डगर श्रावणी मेला के साथ ही सुल्तानगंज से बाबाधाम तक की पूरी डगर केसरिया वस्त्रधारी कांवरियों से गुलजार हो चुकी है. बोल बम के जयघोष, कांवरियों की भक्ति और सेवा शिविरों में गूंजते भजनों से पूरा कांवरिया पथ शिवमय नजर आ रहा है. कहीं श्रद्धालु विश्राम कर रहे हैं तो कहीं सेवा शिविरों में कांवरियों की सेवा की जा रही है. अटूट विश्वास व समर्पण की यात्रा गंगाजल, आस्था और भक्ति से जुड़ी परंपराओं के बीच करीब 105 किलोमीटर की यह कांवर यात्रा श्रद्धालुओं के लिए केवल पैदल सफर नहीं, बल्कि बाबा बैद्यनाथ के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण की यात्रा बन चुकी है.


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दीपक चौधरी

लेखक के बारे में

By दीपक चौधरी

दीपक चौधरी प्रिंट माध्यम में 23 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. कटोरिया (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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