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हाई कोर्ट में बौंसी मेला सैरात की सुनवाई टली, 15 दिन बाद डबल बेंच में होगा फैसला

Updated at : 09 Jan 2026 8:32 PM (IST)
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हाई कोर्ट में बौंसी मेला सैरात की सुनवाई टली, 15 दिन बाद डबल बेंच में होगा फैसला

पटना हाई कोर्ट में ऐतिहासिक बौंसी मेला सैरात पर चल रही सुनवाई शुक्रवार को फिर टल गयी. यह सुनवाई अब 15 दिनों के बाद कोर्ट में डबल बेंच में होगी.

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अब सरकारी स्तर पर लगेगा ऐतिहासिक बौंसी मेला

बौंसी. पटना हाई कोर्ट में ऐतिहासिक बौंसी मेला सैरात पर चल रही सुनवाई शुक्रवार को फिर टल गयी. यह सुनवाई अब 15 दिनों के बाद कोर्ट में डबल बेंच में होगी. याचिका कर्ता के वकील शाहबाज यूसुफ ने बताया कि पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि विषय से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है. ऐसे में डबल बेंच में ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा. तब तक मेला आयोजन की जिम्मेदारी प्रशासन के पास रहेगी. मालूम हो कि विगत दिनों कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पांच जनवरी को थी. उसके बाद फिर सुनवाई की तिथि नौ जनवरी निर्धारित हुई थी. जिसमें याचिका कर्ता की दलील सुनने के बाद मामला आगे टल गया. इससे स्थानीय दुकानदारों के बीच निराशा का माहौल देखा जा रहा है.

इस बार जिला प्रशासन की देखरेख में लगेगा मेला

बौंसी मेला सैरात बंदोबस्ती का मामला कोर्ट में रहने के कारण जिला प्रशासन कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रही थी, लेकिन निर्धारित समय पर मामले में कोर्ट का निर्णय नहीं आने पर अब जिला प्रशासन को अपनी देखरेख में मेले की सैरात आदि सभी पहलुओं को निबटाना होगा. बताया जा रहा है कि गत 2014 में भी कुछ इस तरह का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन को ही सैरात आदि की देखरेख करनी पड़ी थी. हालांकि प्रशासन के द्वारा पूरे मामले को लेकर पहले से ही अपनी तैयारी शुरू कर दी गयी थी. जिसके अंतर्गत सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर सभी आवश्यक इंतजाम पिछले एक सप्ताह से किया जा रहा है. जानकारी के अनुसार, मेले के सैरात को लेकर राजस्व उगाही जरूरी है. जिला प्रशासन ने इसके लिए एक कमेटी गठित की है. कमेटी के द्वारा मेला परिसर में लगाये जाने वाले दुकानदारों से उनकी जगह सुनिश्चित करने के लिए नियमानुसार बोली लगाकर उनसे राजस्व की वसूली की जायेगी. बताया जा रहा है मेला में जिला प्रशासन को दुकानों से एक बड़ी राशि प्राप्त होती है. पहले मेला का डाक हो जाने से सारी जिम्मेवारी संवेदक की होती थी, लेकिन इस बार संवेदक के नहीं रहने से जिला प्रशासन की जिम्मेवारी बढ़ गयी है. पूरे मामले में एडीएम अजीत कुमार ने बताया कि कोर्ट में मामला नहीं सुलझ पाने के कारण इस बार जिला प्रशासन अपने स्तर से मेला से जुड़े राजस्व को देखेगी. इसके लिए डीएम के आदेश पर एक कमेटी गठित की गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHUBHASH BAIDYA

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SHUBHASH BAIDYA is a contributor at Prabhat Khabar.

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