22 मार्च को कद्दू-भात के साथ चार दिवसीय चैती छठ पर्व का होगा आगाज

Updated at : 14 Mar 2026 8:01 PM (IST)
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22 मार्च को कद्दू-भात के साथ चार दिवसीय चैती छठ पर्व का होगा आगाज

लोक आस्था का महापर्व चैती छठ को लेकर शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धा का वातावरण शुरू हो चुका है.

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24 मार्च को संध्या अर्घ्य, तो 25 को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का होगा समापन

तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटे श्रद्धालु, जिलेभर में उत्साह का माहौल

चंदन कुमार, बांका. लोक आस्था का महापर्व चैती छठ को लेकर शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धा का वातावरण शुरू हो चुका है. आगामी 22 मार्च को नहाय-खाय (कद्दू-भात) के साथ ही चार दिवसीय इस महापर्व का अनुष्ठान आरंभ हो जायेगा. इसके पूर्व श्रद्धालु व छठ व्रती गंगा सहित जिले के प्रमुख नदियों में डुबकी लगाकर पवित्र हो रहे है. साथ ही छठ व्रत को लेकर पूजन सामग्री की खरीदारी भी करना शुरु कर दिया है. वहीं शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे-बड़े घाटों की साफ-सफाई को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है. दूसरी तरफ शांतिपूर्ण छठ पर्व संपन्न कराने को लेकर जिला प्रशासन काफी मुस्तैद दिख रही है. लोक आस्था के इस पर्व पर पूजन सामग्री को लेकर शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बाजार सज गया है. मान्यता के अनुसार, हिंदू समुदाय का यह विशेष त्योहार होने की वजह से तैयारी भी उसी तरह की जा रही है. छठ पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाने का पूर्व से चलन रहा है. इस पर्व को सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए इन दिनों गांव व शहर के गली मोहल्ले में छठ गीत सुनाई देने लगा है, जिससे वातावरण भक्तिमय होने लगा है.

हिंदू धर्म में छठ पूजा का है विशेष महत्व

बौंसी गुरुधाम के पंडित गोपाल शरण ने बताया कि हिंदू धर्म में यह पर्व चार दिनों तक चलता है. पंचाग के अनुसार चैती छठ पूजा का यह पावन पर्व हर साल चैत मास में मनाया जाता है. यह व्रत संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की कामना के लिए रखा जाता है. साथ ही चैती छठ कृषि से जुड़ा है. चैत मास में यह पर्व तब मनाया जाता है जब नई फसलें कट कर किसानों के घर आ जाती है. अनाज से घर भरने को किसान सूर्य देव की कृपा मानते हैं. अन्न-धन से जब घर भर जाते हैं तो किसान परिवार सूर्य भगवान व उनकी बहन छठी मैया का आभार प्रकट करने को छठ पर्व मनाते हैं. छठी मैया ब्रह्मा की मानस पुत्री और षष्ठी तिथि की स्वामिनी हैं. भगवान सूर्य की बहन होने के नाते षष्ठी तिथि को छठी मैया के साथ सूर्य देव की भी पूजा-अर्चना की जाती है. यह सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. 36 घंटों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए व्रती इस व्रत को रखते है. छठ पूजा का व्रत रखने वाले लोग 24 घंटे से अधिक समय तक निर्जल उपवास रखते हैं. साथ ही सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के बाद ये व्रत समाप्त होता है.

चैती छठ की इस दिन से होगी शुरुआत

वैदिक पंचांग के अनुसार चैती छठ पर्व 22 मार्च यानि रविवार से शुरू होगा. इस दिन से छठ व्रत की शुरुआत नहाय-खाय की परंपरा से होती है. इसके बाद चार दिनों तक अलग-अलग पूजा विधियां की जाती हैं, जिसमें नहाय-खाय (पहला दिन) 22 मार्च रविवार को, खरना पूजा (दूसरा दिन) 23 मार्च सोमवार को, संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन) 24 मार्च मंगलवार को, उषा अर्घ्य (चौथा दिन) 25 मार्च बुधवार को. इन चार दिनों में व्रती विशेष नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना करते हैं.

चैती छठ के दौरान अर्घ्य देने का मुहूर्त

पंचांग के अनुसार तीसरे दिन यानी 24 मार्च को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जायेगा. उस दिन सूर्यास्त का समय लगभग शाम 6 बजकर 40 मिनट रहेगा. वहीं चौथे दिन यानी 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जायेगा. इस दिन सूर्योदय का समय लगभग सुबह 5 बजकर 47 मिनट बताया गया है. इसी समय व्रती उषा अर्घ्य देकर अपना व्रत पूरा करते हैं.

चैती छठ का धार्मिक महत्व

चैती छठ वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक विशेष पर्व है. इस समय प्रकृति नयी ऊर्जा और ताजगी से भर जाती है. इसलिए इस व्रत को शुद्धता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक भी माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत स्वास्थ्य, संतान प्राप्ति, सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा के लिए रखा जाता है. कहा जाता है कि छठी मइया और सूर्य देव की कृपा से व्रती के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. छठ पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है. ऐसा माना जाता है कि सूर्य की पहली और आखिरी किरण को अर्घ्य देने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और व्यक्ति का जीवन प्रकाशमय बनता है.

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SHUBHASH BAIDYA

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