लोक संगीत का होगा आने वाला समय : छैला बिहारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Jan 2016 8:41 AM (IST)
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बांका : कहते हैं इतिहास खुद को दोहराता है. संगीत के क्षेत्र में भी आज यही हो रहा है. लोग पॉप और रॉक संगीत से ऊब कर अब तेजी से लोक और सुगम संगीत की ओर मुखातिब होने लगे हैं. आंचलिक लोक संगीत का भविष्य सर्वाधिक उज्ज्वल है. यही वजह है कि हाल के दिनों […]
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बांका : कहते हैं इतिहास खुद को दोहराता है. संगीत के क्षेत्र में भी आज यही हो रहा है. लोग पॉप और रॉक संगीत से ऊब कर अब तेजी से लोक और सुगम संगीत की ओर मुखातिब होने लगे हैं.
आंचलिक लोक संगीत का भविष्य सर्वाधिक उज्ज्वल है. यही वजह है कि हाल के दिनों में लोक संगीत का क्रेज तथा इसके श्रोताओं की तादाद बढ़ी है. इससे लोक गायकों को भी मुकाम हासिल होने लगा है. उनका उत्साह परवान पर है. अंगिका एवं भोजपुरी के प्रसिद्ध लोक गायक सुनील छैला बिहारी ने शुक्रवार की शाम ये बातें प्रभात खबर कार्यालय में कही. वे मंदार महोत्सव में कार्यक्रम प्रस्तुति के लिए बौंसी जाने के क्रम में बांका प्रभात खबर कार्यालय में कुछ देर के लिए रूके थे. चर्चित लोक गायिका मानसी तिवारी सहित टीम के कई अन्य सदस्य भी उनके साथ थे.
उन्होंने कहा कि लोक गायकों के लिए संघर्ष का दौर अब समाप्त हो चुका है. उनकेलिए बड़ा बाजार एवं श्रोता वर्ग उपलब्ध है. एक समय था जब उन्हें गुमनामी से उबरने के लिए बतौर गायक 11 वर्ष तक संघर्ष का दौर झेलना पड़ा था. लोक संगीत में अश्लीलता एवं भौंडेपन के बढ़ते प्रचलन के सवाल पर उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि लोक संगीत हमेशा अश्लील ही हो. कोई गायक अश्लील या भौंडा गीत गाना नहीं चाहता, लेकिन बाजार की मांग और आम जन की अभिरूचि उन्हें इसके लिए उकसाती है.
इस सिलसिले में उन्होंने गायिका शारदा के अलावा भोजपुरी गायक वालेश्वर की भी चर्चा की. शारदा सिन्हा को अपने शालीन गीतों को श्रोताओं तक पहुंचाने में लगभग एक दशक लग गये. जबकि वालेश्वर के गीतों को खास श्रोता वर्ग ने हाथों हाथ लिया. दरअसल बाजार और श्रोता वर्ग पर तेजी से छा जाने की ललक ने गायकों को भी शालिनता से समझौता करने पर विवश किया है. शॉर्टकट की संस्कृति ने ऐसे प्रेरित किया है. लेकिन सच यह है कि जो शालीन और स्तरीय गाने गाते है उन कलाकारों को स्थायी ख्याति और प्रतिष्ठा हासिल होती है. उन्होंने कहा कि मेरे कुछेक आंचलिक गीतों में ही सरसता के पुट है. बांकि हमेशा उन्होंने स्तरीय गाने का ही प्रयास किया है.
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में कई भोजपुरी गायकों ने अंगिका गाने का प्रयास किया. लेकिन वे सफल नहीं हो पाये. वे मूलत: अंगिका गायक है, लेकिन भोजपुरी गायकों की अंगिका संगीत में विफलता पर गीतकार विनय बिहारी ने उन्हें भोजपुरी गाने के लिए प्रेरित किया और वे सफल रहे. चलते – चलते उन्होंने लोक संगीत के उज्ज्वल भविष्य और तीव्रतर तरक्की की भी कामना की.
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