परंपरागत शिकार में मारे गये दर्जनों वन्य जीव

Published at :15 Jan 2016 9:12 PM (IST)
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परंपरागत शिकार में मारे गये दर्जनों वन्य जीव

परंपरागत शिकार में मारे गये दर्जनों वन्य जीव फोटो 15 बीएएन 60 शिकार से लौटते शिकारी दलप्रतिनिधि, कटोरिया प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मकर संक्रांति के मौके पर कटोरिया वन परिक्षेत्र के विभिन्न जंगलों में शुक्रवार को परंपरागत शिकार के तहत दर्जनों वन्य जीवों का शिकार किया गया़ जिसमें जंगली सूअर, खरगोश, वनमुर्गी, […]

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परंपरागत शिकार में मारे गये दर्जनों वन्य जीव फोटो 15 बीएएन 60 शिकार से लौटते शिकारी दलप्रतिनिधि, कटोरिया प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मकर संक्रांति के मौके पर कटोरिया वन परिक्षेत्र के विभिन्न जंगलों में शुक्रवार को परंपरागत शिकार के तहत दर्जनों वन्य जीवों का शिकार किया गया़ जिसमें जंगली सूअर, खरगोश, वनमुर्गी, तीतर आदि शामिल है़ शिकारी दल में कटोरिया व चांदन प्रखंड क्षेत्र के अलावा झारखंड के सीमावर्ती जिला देवघर क्षेत्र के विभिन्न आदिवासी बाहुल गांवों के आदिवासी लोग भी शामिल हुए, जिनकी संख्या दो हजार से भी अधिक थी़ प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार को कटोरिया के भोरसार, कलोथर, खिजुरिया, सरोखर, बसुआ आदि जंगलों में सुबह से ही आदिवासी समुदाय के लोग तीर, धनुष, भाला, फरसा, कुल्हाड़ी जैसे पारंपरिक हथियारों से लैश होकर जंगल की घेराबंदी कर शिकार किया़ शिकारी दल में दर्जनों की संख्या में कुत्ते भी शामिल थे़ शिकार के दौरान कुत्ते अहम भूमिका निभाते हैं. शिकार किये गये जीवनों का ग्रामीण अपने गांव में लाकर बंटवारा करते हैं. जिसमें शिकारी कुत्ते को भी बराबर हिस्सा दिया जाता है़ ज्ञात हो कि शिकारी के हथियार से जख्मी होने के बाद जब जंगली जानवर शिकारी दल पर हमला करना चाहता है, तो मुकाबले के लिए सबसे पहले शिकारी कुत्ता आगे आ जाता है़ इस बीच शिकारियों को मोर्चा संभालने का भी वक्त मिल जाता है़ इसके अलावा भाग चुके जख्मी शिकार को ढूंढने में भी कुत्ते की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है़ मालूम हो कि क्षेत्र के जंगलों में पहले काफी संख्या में भालू, नीलगाय, हिरण, मोर आदि भी पाया जाता था़ लेकिन अब यहां से ये जानवर विलुप्त होने के कगार पर हैं.

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