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म्यूजियम ऑफ स्पीशीज इन डेंजर में स्त्रियों की पीड़ा का किया गया मंचन

Updated at : 07 Jul 2025 4:53 PM (IST)
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म्यूजियम ऑफ स्पीशीज इन डेंजर में स्त्रियों की पीड़ा का किया गया मंचन

पथ संस्था जमशेदपुर द्वारा प्रस्तुत नाटक वर्तमान समय के स्त्री विमर्श जैसे गम्भीर विषय को प्रतिबिंबित करता

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कला संस्कृति एवं युवा विभाग वयूनिटी संस्था के तत्वावधान में उच्च विद्यालय एकौनी के खेल मैदान में हुआ नाटक का मंचन प्रतिनिधि, दाउदनगर. यूनिटी रंग महोत्सव के दूसरे दिन कला संस्कृति एवं युवा विभाग और यूनिटी संस्था के तत्वावधान में उच्च विद्यालय एकौनी के खेल मैदान में म्यूजियम ऑफ स्पीशीज इन डेंजर का मंचन किया गया. शिक्षक अंबुज कुमार सिंह ने कहा कि मो निजाम के निर्देशन में पथ संस्था जमशेदपुर द्वारा प्रस्तुत नाटक वर्तमान समय के स्त्री विमर्श जैसे गम्भीर विषय को प्रतिबिंबित करता है. म्यूजियम में रखी हुई वस्तुएं या मूर्तियां अत्यंत ही आकर्षक और प्रेरक होती हैं, लेकिन उन मूर्तियों के संदर्भ में संबंधित व्यक्तित्व में छिपे दर्द को साधारण मानव महसूस नहीं कर पाते. उपर्युक्त अवधारणाओं को साबित करती है. प्रतीकात्मक शैली में सूत्रधार सुमन द्वारा प्रस्तुत नाटक पौराणिक से लेकर ऐतिहासिक और आधुनिक दौर में स्त्रियों के दमन, अत्याचार, शोषण की पीड़ा को उन्हीं की जुबानी कलात्मक तरीके से रेखांकित करता है. युवा प्रधानाध्यापक श्रीनिवास मंडल के अनुसार, हम स्त्रियों को पूजा या सम्मान का प्रतीक तो मान लेते हैं, लेकिन इसके आगोश में छिपे हुए उसके दर्द और संवेदना को महसूस नहीं कर पाते. नाटक में अनेक ज्वलंत सवालों को उत्पन्न किया गया. पौराणिक पात्र सीता अपने राम से सवाल करती है कि प्रभु आप तो समझ रहे थे कि रावण तो मुझे छुआ भी नहीं है, फिर भी मेरी अग्निपरीक्षा क्यों. रावण लाख बुरा रहा हो, लेकिन मेरी मर्जी के खिलाफ उसने कुछ नहीं किया. फिर शूर्पणखा राम से अपने प्रेम निवेदन के प्रतिफल के रूप में अपने नाक, कान से वंचित होने के दर्द और व्यथा को व्यक्त करती है. आधुनिक दौर में राजस्थान की भंवरी देवी के साथ हुई घटना को मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त किया गया. दंगों में अपने परिवार को खोने वाली महिला के दर्द को प्रस्तुत किया गया. इसी प्रकार कोई पर्व त्योहार के मेलों में उठाकर सामूहिक बलात्कार की पीड़ा को झेलती महिला, तो कोई एक तरफा प्यार में पागल किसी प्रेमी द्वारा तेजाब छिड़कने से घायल हुई लड़की की व्यथा उन्हीं के शब्दों में रंगमंच पर जीवंत हो उठती है. सशक्त कथानक के साथ अभिनेत्रियों के जीवंत अभिनय ने नाटक में जान डाल दी. ये दृश्य आम दर्शकों की संवेदना को झकझोरने का काम किया. इसके बावजूद नाटक एक आशा की किरण भी दिखाता है. विपरीत परिस्थितियों में भी जीजीविषा को बरकरार रखती स्त्रियां अपने संघर्ष और मेहनत के बदौलत किरण बेदी, सानिया मिर्जा, संतोष यादव, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स आदि बनकर अपनी प्रतिभा की लोहा मनवाने में सफल रही है. उत्कृष्ट अभिनय के रूप में अनन्या राज, प्रिया यादव, नताशा, पूजा, सुमन, सुषमा के जीवंत अभिनय की काफी तारीफ हुई. गायन मंडली में श्यामदेव, अंकिता, आशा, खुर्शीद आलम ने मनोरंजन भी किया. पार्श्व संगीत में नीतीश राय दृश्यों के अनुरूप संगीत संयोजन में सफल रहे. खुर्शीद आलम का मंच संयोजन अंत तक आकर्षण का केंद्र बना रहा. नाटक के अंत में कलाकारों को सम्मानित करते हुए शिक्षाविद अरविंद कुमार और न्यूटन कोचिंग सेंटर के निदेशक शिक्षक डॉ एसपी सुमन ने ऐसे स्तरीय नाटकों के मंचन को ऐतिहासिक करार दिया. उन्होंने यूनिटी और नाट्य टीम के प्रति हर्ष जताया. यूनिटी सचिव रविकांत, रामाकांत सिंह, अंबुज कुमार, सुधीर प्रकाश ने भी आभार व्यक्त किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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SUJIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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