23 साल बाद बहन ने भाई की कलाई पर बांधी राखी, छलक पड़े दोनों की आंखों से आंसू; मायके पहुंचकर मिटाई रिश्तों की दूरी

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23 साल बाद राखी के बाद एक दूसरे को मिठाई खिलाते भाई-बहन

23 साल बाद, औरंगाबाद में एक भाई-बहन का पुनर्मिलन हुआ जिसने सभी को भावुक कर दिया. बहन कलावती देवी ने अपने मायके पहुंचकर भाई रामजी महतो की कलाई पर राखी बांधी, जिसके बाद दोनों की आंखें खुशी के आंसूओं से छलक पड़ीं. यह मिलन रिश्तों में आई दूरियों को प्रेम और समय से मिटाए जाने की एक सुंदर मिसाल है.

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Raksha Bandhan : औरंगाबाद में रक्षाबंधन के दिन मदनपुर प्रखंड के बंगरे गांव में भाई-बहन के रिश्ते की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया. 23 वर्षों से एक-दूसरे से दूर रहे भाई-बहन इस रक्षाबंधन पर फिर आमने-सामने आए. बहन ने अपने मायके पहुंचकर भाई की कलाई पर राखी बांधी तो दोनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े.

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बेरी गांव निवासी कलावती देवी रक्षाबंधन के अवसर पर बंगरे गांव स्थित अपने मायके पहुंचीं. यहां उन्होंने अपने मंझले भाई रामजी महतो की कलाई पर राखी बांधी. राखी बांधने के साथ ही दोनों पुराने दिनों की यादों में खो गए. लंबे समय से मन में दबा स्नेह और अपनापन भावनाओं के रूप में आंखों से छलक पड़ा.

2003 के बाद नहीं बंधी थी भाई की कलाई पर राखी

रामजी महतो ने बताया कि उनकी बहन कलावती देवी ने आखिरी बार वर्ष 2003 में उन्हें राखी बांधी थी. इसके बाद पारिवारिक विवाद और आपसी मनमुटाव के कारण दोनों के बीच दूरी बढ़ती चली गयी. धीरे-धीरे हालात ऐसे हो गए कि एक-दूसरे के घर के बीच महज आठ किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद भाई-बहन वर्षों तक मिल नहीं सके.

भाई रामजी की कलाई पर राखी बांधती बहन कलावती | Prabhat Khabar Network
भाई रामजी की कलाई पर राखी बांधती बहन कलावती

समय गुजरता गया और रिश्तों में आई खटास भी धीरे-धीरे कम होने लगी. पुराने विवाद और गिले-शिकवे पीछे छूटने लगे. आखिरकार दोनों ने रिश्ते को फिर से अपनाने का फैसला किया. इसी के बाद इस वर्ष रक्षाबंधन पर कलावती देवी अपने मायके बंगरे पहुंचीं.

राखी बांधते ही छलक पड़े खुशी के आंसू

कलावती देवी ने जैसे ही रामजी महतो की कलाई पर राखी बांधी, दोनों भाई-बहन भावुक हो गए. 23 साल बाद बहन के हाथों राखी बंधने का पल रामजी महतो के लिए भी बेहद खास रहा. वहीं कलावती देवी के लिए भी यह सिर्फ रक्षाबंधन का त्योहार नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही दूरी के खत्म होने का दिन था.

राखी बांधने के दौरान दोनों की आंखों से आंसू निकल पड़े. वहां मौजूद लोगों के लिए भी यह दृश्य बेहद मार्मिक रहा. लंबे समय बाद भाई की कलाई पर राखी बांधने के बाद कलावती देवी भाव-विभोर नजर आयीं. रामजी महतो ने भी बहन के प्रति वर्षों से मन में दबे स्नेह को भावनाओं के जरिए जाहिर किया.

प्रेम ने मिटाई वर्षों पुरानी नाराजगी

भाई-बहन का यह मिलन इस बात की मिसाल बन गया कि रिश्तों में चाहे कितनी भी दूरी क्यों न आ जाए, समय के साथ गिले-शिकवे खत्म हो सकते हैं. एक समय आठ किलोमीटर की दूरी भी दोनों के बीच बड़ी दीवार बन गयी थी, लेकिन रक्षाबंधन के पवित्र मौके पर वही दूरी खत्म हो गयी.

23 साल बाद जब बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधी तो वर्षों पुराना रिश्ता फिर उसी अपनापन और स्नेह से जुड़ गया. बंगरे गांव में हुआ यह भावुक मिलन रक्षाबंधन के पर्व को और भी खास बना गया. भाई-बहन के इस मिलन ने वहां मौजूद लोगों को भी यह संदेश दिया कि रिश्तों में नाराजगी कितनी भी पुरानी क्यों न हो, प्रेम और अपनापन उसे फिर से जोड़ने की ताकत रखते हैं.


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