मद्य निषेध ने खाने का बिल दबाया, उपभोक्ता अदालत ने दिलाया

भोजन के बकाये का अनोखा मामला : उपभोक्ता अदालत ने दिलवाया इंसाफ
भोजन के बकाये का अनोखा मामला : उपभोक्ता अदालत ने दिलवाया इंसाफ औरंगाबाद शहर. मद्य निषेध विभाग ने नाबार्ड रूरल मार्ट से 19 बार खान मंगाया और उसका बिल दबा दिया. यह मामला तब उजागर हुआ, जब मामला जिला उपभोक्ता अदालत में पहुंचा. हालांकि, जिला उपभोक्ता अदालत ने रूरल मार्ट के संचालक को उसके मेहनत की कमाई दिलाकर यह साफ संदेश दिया है कि सरकारी ओहदे की आड़ में बकाया दबाना आसान नहीं है. मामला उत्पाद (मद्य निषेध) विभाग से जुड़ा है. वैसे यह अब चर्चा का विषय बन गया है. जिला उपभोक्ता अदालत ने मामले में पहल करते हुए न्याय दिलाया. मंगलवार को बकाये राशि का चेक रूरल मार्ट के संचालक को सौंप दिया गया. अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि जिला परिषद के सामने संचालित नाबार्ड रूरल मार्ट के परियोजना प्रभारी अनिल कुमार उपभोक्ता अदालत में वाद लाया था. अनिल नाबार्ड रूरल मार्ट का संचालन कर अपना जीविकोपार्जन करते हैं. उनसे उत्पाद विभाग के निरीक्षक चंदन कुमार और अकाउंटेंट नीरज कुमार ने मौखिक आदेश पर विभिन्न तिथियों में कुल 19 बार अपने अधिकारियों के लिए भोजन मंगवाया. इन सभी भोजन का कुल मूल्य 26840 रुपये था. बताया गया कि भोजन लेने के बाद अधिकारियों ने लगभग एक साल तक भुगतान में टालमटोल की, जिससे अनिल कुमार को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ा. मजबूर होकर अनिल कुमार ने दो प्रतिशत मासिक ब्याज के साथ कुल 33281 रुपये की मांग करते हुए 29 मार्च 2025 को विधिवत वकालतन नोटिस भेजा, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया. न्याय की उम्मीद में अनिल ने अंततः जिला उपभोक्ता अदालत की शरण ली. अदालत से नोटिस जारी होने के बाद उत्पाद (मद्य निषेध) विभाग हरकत में आया और 26840 रुपये का चेक अदालत में जमा किया. मंगलवार को जिला उपभोक्ता अदालत के सदस्य बद्री नारायण सिंह ने उक्त चेक पीड़ित अनिल कुमार को प्रदान किया. यह मामला अब शहर के व्यवसायियों के बीच नजीर के रूप में देखा जा रहा है. लोग चर्चा कर रहे हैं कि यदि हक का पैसा न मिले तो चुप रहने के बजाय कानून का दरवाजा खटखटाना चाहिए, क्योंकि न्याय देर से सही, मिलता जरूर है.
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